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गोशालाओं से 13 गोवंशीय पशु ले गए गोपाल
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गोशालाओं से 13 गोवंशीय पशु ले गए गोपालक
बागपत। सीएम योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद से गोवंशीय पशुओं की कुछ सुध ली जाने लगी है। जिले में गोवंश आश्रय स्थलों से पशुओं को घरों की तरफ ले जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। तीन गोवंश आश्रय स्थलों से अब तक 13 गोवंशीय पशु ले जाए गए हैं। एक गोवंश पर 900 रुपये प्रतिमाह का अनुदान मिलेगा। इसके बाद गोवंश आश्रय स्थलों पर ग्रामीण पहुंचकर दुधारू गोवंशों को लेकर जा रहे हैं। बता दें कि अब तक गोवंशीय पशुओं की उपेक्षा और देखभाल के अभाव के कारण ही 10 से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। अब उन्हें जीवन मिलने के साथ ही पालन पोषण की उम्मीद जगी है।
बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 गोवंश आश्रय स्थल और शहरी क्षेत्रों में छह और एक कान्हा गौशाला संचालित है। तीनों जगहों पर 1941 गोवंशीय पशु हैं। इनका भरण पोषण प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। शासन ने गोवंश आश्रय स्थलों से एक गाय गोद लेने पर 900 रुपये का अनुदान प्रत्येक माह देने का नियम बनाया गया था। इसके बाद गोवंश आश्रय स्थलों पर गोवंशीय पशुओं को लेने के लिए गोपालक पहुंच रहे है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि तीन गोवंश आश्रय स्थलों से 13 गोवंशीय पशुओं को गोपालकों ने गोद लिया है। वे इनका भरण पोषण करेंगे। शासन के नियमानुसार उन्हें अनुदान देने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पूरी प्रक्रिया की जा रही है। ग्रामीणों को गोवंशीय पशुओं को गोद लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अच्छी नश्ल की गाय है, जो दुधारू है। जिसको गोवंश आश्रय स्थलों से ले सकते है।
इन गोवंश आश्रय स्थलों से ली गई गोवंश गोद
सीवीओ डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि मीतली गोवंश आश्रय स्थल से सात गोवंशों को गोद लिया गया है। वहीं टटीरी आश्रय स्थल से चार और छपरौली से एक गोवंशों को गोद लिया गया है।
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गोवंश आश्रय स्थल और गोशाला में गोवंशीय पशु
ग्रामीण क्षेत्रों में 18 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल चल रहे है। यहां पर 1360 गोवंशीय पशु है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों की संख्या दह, जिसमें 429 गोवंश मौजूद है। टीकरी नगर पंचायत में कान्हा गौशाला बनाई गई है, यहां पर 125 गोवंशीय पशुओं का भरण पोषण किया जा रहा है। वहीं खट्टा प्रहलादपुर गांव में गो संरक्षण केंद्र बनकर तैयार हो गया है। यहां भी 400 से 500 गोवंशों को रखने की व्यवस्था रहेगी।
अनुदान और बढ़ाया जाए
पशुपालकों का कहना है कि अनुदान की उम्मीद में गोवंशीय पशुओं को लोग फिर से गोद तो लेने लगे हैं। लेकिन प्रतिमाह 900 रुपये का अनुदान कम है। इसे और बढ़ाया जाना चाहिए। इतनी राशि में चारे की व्यवस्था तक कर पाना आसान नहीं होगा।
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बागपत। सीएम योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद से गोवंशीय पशुओं की कुछ सुध ली जाने लगी है। जिले में गोवंश आश्रय स्थलों से पशुओं को घरों की तरफ ले जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। तीन गोवंश आश्रय स्थलों से अब तक 13 गोवंशीय पशु ले जाए गए हैं। एक गोवंश पर 900 रुपये प्रतिमाह का अनुदान मिलेगा। इसके बाद गोवंश आश्रय स्थलों पर ग्रामीण पहुंचकर दुधारू गोवंशों को लेकर जा रहे हैं। बता दें कि अब तक गोवंशीय पशुओं की उपेक्षा और देखभाल के अभाव के कारण ही 10 से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। अब उन्हें जीवन मिलने के साथ ही पालन पोषण की उम्मीद जगी है।
बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 गोवंश आश्रय स्थल और शहरी क्षेत्रों में छह और एक कान्हा गौशाला संचालित है। तीनों जगहों पर 1941 गोवंशीय पशु हैं। इनका भरण पोषण प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। शासन ने गोवंश आश्रय स्थलों से एक गाय गोद लेने पर 900 रुपये का अनुदान प्रत्येक माह देने का नियम बनाया गया था। इसके बाद गोवंश आश्रय स्थलों पर गोवंशीय पशुओं को लेने के लिए गोपालक पहुंच रहे है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि तीन गोवंश आश्रय स्थलों से 13 गोवंशीय पशुओं को गोपालकों ने गोद लिया है। वे इनका भरण पोषण करेंगे। शासन के नियमानुसार उन्हें अनुदान देने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पूरी प्रक्रिया की जा रही है। ग्रामीणों को गोवंशीय पशुओं को गोद लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अच्छी नश्ल की गाय है, जो दुधारू है। जिसको गोवंश आश्रय स्थलों से ले सकते है।
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इन गोवंश आश्रय स्थलों से ली गई गोवंश गोद
सीवीओ डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि मीतली गोवंश आश्रय स्थल से सात गोवंशों को गोद लिया गया है। वहीं टटीरी आश्रय स्थल से चार और छपरौली से एक गोवंशों को गोद लिया गया है।
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गोवंश आश्रय स्थल और गोशाला में गोवंशीय पशु
ग्रामीण क्षेत्रों में 18 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल चल रहे है। यहां पर 1360 गोवंशीय पशु है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों की संख्या दह, जिसमें 429 गोवंश मौजूद है। टीकरी नगर पंचायत में कान्हा गौशाला बनाई गई है, यहां पर 125 गोवंशीय पशुओं का भरण पोषण किया जा रहा है। वहीं खट्टा प्रहलादपुर गांव में गो संरक्षण केंद्र बनकर तैयार हो गया है। यहां भी 400 से 500 गोवंशों को रखने की व्यवस्था रहेगी।
अनुदान और बढ़ाया जाए
पशुपालकों का कहना है कि अनुदान की उम्मीद में गोवंशीय पशुओं को लोग फिर से गोद तो लेने लगे हैं। लेकिन प्रतिमाह 900 रुपये का अनुदान कम है। इसे और बढ़ाया जाना चाहिए। इतनी राशि में चारे की व्यवस्था तक कर पाना आसान नहीं होगा।