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बंदरिया के कब्जे में बच्ची: सब पर हमला और बच्ची को दुलार, मोबाइल पर सुनाई हनुमान चालीसा, तब जाकर छोड़ा

Wed, 22 Apr 2026 11:08 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 22 Apr 2026 11:08 PM IST
सार

Muzaffarnagar News: चरथावल में एक घर में बंदरिया घुस आई और कमरे में जाकर बच्ची के पास एक घंटे तक बैठी रही। घरवालों और अन्य लोगों ने एक घंटे तक तमाम जतन किए, मगर उसने बड़ी मुश्किल से बच्ची को छोड़ा। 

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Girl in possession of monkeys: Attacked everyone and caressed the girl, recited Hanuman Chalisa on mobile
बंदरिया के कब्जे में बच्ची। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चरथावल कस्बे के बाहरी छोर पर बस्ती के घर के कमरे में बंदरिया तीन महीने की बच्ची कलसुम के पास करीब एक घंटे तक बैठी रही। रोती बच्ची को बंदरिया के कब्जे से मुक्त कराने के परिजनों एवं वन विभाग के प्रयास निरर्थक साबित हुए। पशु प्रेमी सन्नी चौपड़ा ने मोबाइल फोन में हनुमान चालीसा का पाठ सुनाकर ग्रामीणों की मदद से बच्ची को सुरक्षित बचाया।
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घटना चरथावल देहात के लड़वा मार्ग की है। जय हिंद इंटर कॉलेज के पीछे तहसीन का मकान है। यहां नवजात बच्ची कलसुम कमरे में सो रही थी, तभी अचानक एक बंदरिया कमरे में घुस आई और उसे पकड़कर पास ही बैठ गई। बच्ची को हिलाते हुए खींचने लगी। आंख खुलने पर बच्ची करीब 15 मिनट रोती रही। इस दरमियान बच्ची की मां गुलिस्ता मकान की छत पर गई हुई थी और दादी वकीला बाहर सड़क पर बैठी थी। रोने का शोरगुल सुनकर पड़ोसी और परिजन कमरे के बाहर दौड़ पड़े।
 
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रोने की आवाज सुनकर पहुंची दादी
बच्ची के रोने की आवाज सुनकर उसकी दादी कमरे में पहुंची। कमरे के अंदर का नजारा देख वह घबरा गई। इनके पौते सलीम ने डायल 112 पर सूचना दी। मौके पर वन विभाग की टीम एवं पशु प्रेमी सन्नी सहित पुलिस पहुंची। उन्होंने मौके की वीडियो बनाई और केले देकर बच्ची के पास से हटाने की कोशिश की। लेकिन बंदरिया आक्रामक हो गई। सन्नी ने मौके की नजाकत भांप गए। उन्होंने मोबाइल फोन से हनुमान चालीसा का पाठ सुनाने के बाद बच्ची के पास से बंदरिया खुद हट गई। बच्ची को गुलिस्ता को सौंपकर वन विभाग एवं परिजनों ने राहत की सांस ली।
 
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बच्ची को दुलार...दूसरों पर हमला
बंदरिया ने करीब एक घंटे घर में रहकर बचाने का प्रयाास करने वाली दादी एवं पड़ोस के एक बच्चे पर हमला किया। दोनों के दांत लगे हैं। लेकिन मजे की बात है मासूम बच्ची को इस तरह दुलारती रही, मानो उसका बच्चा है। पिता तहसीन बताते है कि बंदरिया बच्ची को कभी गोद में भरती, तो कभी गाल चूमती। बच्ची पर हमला नहीं किया। दूसरे कमरे में उस वक्त तीन साल की बच्ची रूकैया मां के साथ थी।
 

बाहर आकर पिल्ले से लिपट गई 
डॉ. शाह आलम और सालिम बताते हैं कि बच्ची के पास से हटने के बाद बंदरिया घर से बाहर आकर एक कुत्ते के पिल्ले से लिपट गई। उसे प्यार किया। आशंका है कि बंदरिया अपने बच्चे के मरने या गायब हो जाने के कारण वह इस तरह की हरकत कर रही थी। तहसीन बताते हैं कि दो दिन पहले भी बंदरिया इस घर में आ गई थी। काफी देर रही। बच्ची की ताई के साथ हाथापाई की थी। रात को परिजनों ने बाइक पर बैठाकर बाहर जंगल में छोड़ दिया था।
 

मजदूरी पर गए थे पिता
बच्ची की मां गुलिस्ता घटना के वक्त छत पर थी। पिता तहसीन रोहाना मार्ग पर एक स्कूल के निर्माण में मजदूरी पर गए थे। राहत की बात यह रही कि बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई चोट नहीं आई।




 
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