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गाजियाबाद के एसपी ने की कफन चोरी की जांच
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बागपत। शवों से कफन चोरी की जांच के लिए रविवार को गाजियाबाद के एसपी क्राइम संतोष गंगवार बड़ौत पहुंचे। आरोपी पक्ष से उनके घर पर पूछताछ की। उनका गोदाम भी देखा। इसके बाद थाने और फिर श्मशान में भी पहुंचे। इस दौरान इस मामले के विवेचनाधिकारी और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर दलीप सिंह बिष्ट भी उनके साथ रहे।
बड़ौत पुलिस ने नौ मई को शवों से कफन चोरी के खुलासे का दावा करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें नई मंडी बड़ौत निवासी प्रवीण कुमार जैन, उनका बेटा आशीष जैन उर्फ उदित जैन, भतीजे ऋषभ जैन के अलावा शबगा छपरौली निवासी श्रवण कुमार शर्मा, फूंस वाली मस्जिद के पीछे बड़ौत निवासी राजू शर्मा और शाहरुख खान और गुराना रोड निवासी बबलू शामिल थे। पुलिस का कहना था कि आरोपी रात में श्मशान से कफन और दूसरे कपड़े चोरी करके ले आते थे। धुलाई कराने के बाद उन पर ग्वालियर कंपनी के स्टीकर व रिबन लगाकर उन्हें महंगे दामों में बेच देते थे। पुलिस का कहना था कि इनमें कई कफन कोरोना पॉजिटिव लोगों के होते थे।
पहले हापुड़ फिर गाजियाबाद पहुंची जांच
पुलिस ने सभी सात आरोपियों को जेल भेज दिया था। कारोबारी की पत्नी जयश्री ने 12 मई को एडीजी को प्रार्थनापत्र देकर बागपत पुलिस पर झूठी कहानी रचने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कई बिंदुओं पर पुलिस के खुलासे पर सवाल उठाते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। एडीजी ने मामला आईजी के पास भेजा, जहां से अगले ही दिन मामले की जांच हापुड़ एएसपी सर्वेश मिश्रा को दे दी गई। हापुड़ एएसपी ने चार दिन में जांच रिपोर्ट आईजी ऑफिस में दाखिल कर दी। आईजी ने 26 मई को मामले की जांच गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को सौंप दी।
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बड़ौत पुलिस की अटकी रहीं सांस
इस मामले में बड़ौत पुलिस के खुलासे में कई झोल सामने आए थे। ऐसे में जांच को लेकर बड़ौत पुलिस की सांस अटकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह था कि किसी श्मशान से कफन चोरी की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हुई तो पुलिस ने इसका खुलासा किस आधार पर किया। कोरोना पॉजिटिव का शव पैक होकर सीधे श्मशान पहुंचता है, उस पर कोई कफन ही नहीं होता, फिर कोरोना संक्रमित का कफन कैसे चोरी हुआ।
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बड़ौत पुलिस ने नौ मई को शवों से कफन चोरी के खुलासे का दावा करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें नई मंडी बड़ौत निवासी प्रवीण कुमार जैन, उनका बेटा आशीष जैन उर्फ उदित जैन, भतीजे ऋषभ जैन के अलावा शबगा छपरौली निवासी श्रवण कुमार शर्मा, फूंस वाली मस्जिद के पीछे बड़ौत निवासी राजू शर्मा और शाहरुख खान और गुराना रोड निवासी बबलू शामिल थे। पुलिस का कहना था कि आरोपी रात में श्मशान से कफन और दूसरे कपड़े चोरी करके ले आते थे। धुलाई कराने के बाद उन पर ग्वालियर कंपनी के स्टीकर व रिबन लगाकर उन्हें महंगे दामों में बेच देते थे। पुलिस का कहना था कि इनमें कई कफन कोरोना पॉजिटिव लोगों के होते थे।
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पहले हापुड़ फिर गाजियाबाद पहुंची जांच
पुलिस ने सभी सात आरोपियों को जेल भेज दिया था। कारोबारी की पत्नी जयश्री ने 12 मई को एडीजी को प्रार्थनापत्र देकर बागपत पुलिस पर झूठी कहानी रचने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कई बिंदुओं पर पुलिस के खुलासे पर सवाल उठाते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। एडीजी ने मामला आईजी के पास भेजा, जहां से अगले ही दिन मामले की जांच हापुड़ एएसपी सर्वेश मिश्रा को दे दी गई। हापुड़ एएसपी ने चार दिन में जांच रिपोर्ट आईजी ऑफिस में दाखिल कर दी। आईजी ने 26 मई को मामले की जांच गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को सौंप दी।
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बड़ौत पुलिस की अटकी रहीं सांस
इस मामले में बड़ौत पुलिस के खुलासे में कई झोल सामने आए थे। ऐसे में जांच को लेकर बड़ौत पुलिस की सांस अटकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह था कि किसी श्मशान से कफन चोरी की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हुई तो पुलिस ने इसका खुलासा किस आधार पर किया। कोरोना पॉजिटिव का शव पैक होकर सीधे श्मशान पहुंचता है, उस पर कोई कफन ही नहीं होता, फिर कोरोना संक्रमित का कफन कैसे चोरी हुआ।