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बंजर हो रही भूमि

Sat, 11 Jun 2016 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Sat, 11 Jun 2016 12:46 AM IST
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Getting barren land
India’s ‘water doctor’, has turned 84 acres of barren land into a water bowl
बागपत में रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ने लगी है। 11 गांवों की मिट्टी की जांच में खुलासा हुआ है कि जिले की भूमि बंजर होती जा रही है। इसका कारण मिट्टी का क्षारीय होना है। मिट्टी की पीएच (पावर ऑफ हाइड्रोजन) औसत सात से बढ़कर नौ के पार पहुंच गया है। इससे कृषि वैज्ञानिक भी हैरान हैं। गन्ना विभाग का कहना है कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से यह हालात खड़े हुए हैं। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक जगत राम का कहना है कि किसान नहीं संभले तो दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि इफ्को की मोबाइल प्रयोगशाला के जरिये दो जून को 11 गांवों की मिट्टी की जांच कराई गई थी। इनमें डोला, ढिकौली, बसी, पांची, सुभानपुर, सांकरौद, पाबला, हिसावदा, गाधी, पदड़ा और मसूरी शामिल हैं। मिट्टी का औसत पीएच सात होना चाहिए। इसमें ही अच्छी पैदावार होती है।

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जिले के पाबला गांव के किसान दिनेश और डौला के सुनील के खेत की मिट्टी में पीएच 9.2 पाया गया। बसी के ओमबीर के खेत में 8.9, हिसावदा के अंकुर, रामबीर और राजबाला के खेत का पीएच 9 मिला है। मसूरी गांव के रामकुमार के खेत का पीएच 9.1 तक पहुंच चुका है। इस दौरान 11 गांवों के 60 किसानों के खेत से सैंपल लिए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि सभी खेतों का पीएच औसत से अधिक पाया गया।

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जैविक खाद का प्रयोग है उपाय
जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार का कहना है कि रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से मिट्टी क्षारीय हो रही है। इससे बचाव के लिए किसानों को जिप्सम के अलावा जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए। रासायनिक खाद के प्रयोग से बचना चाहिए। जिस खाद का भी प्रयोग करें, उसके विषय में कृषि विशेषज्ञों से पहले मशवरा कर लें। बगैर जानकारी के खादों के गलत प्रयोग से खेतों को नुकसान हो रहा है।

पीएच और बढ़ा तो पैदावार मुश्किल
जिला गन्ना अधिकारी के मुताबिक, जमीन का पीएच लेवल 0 से 14 तक मापा जाता है। इसमें पीएच सात तक प्राकृतिक माना जाता है। सात से नीचे मिट्टी अम्लीय, जबकि सात से ऊपर क्षारीय होती है। क्षारीय मृदा में जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। अगर पीएच इसी तरह बढ़ता गया तो फसलें पैदा नहीं हो पाएंगी।
 

अ‌ध‌िकारी कहिन
कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के प्रभारी डॉ. गजेंद्र पाल का कहना है कि पीएच बढ़ना यानी मिट्टी का क्षारीय होना फसलों के लिए नुकसानदेह है। मिट्टी में सोडियम साल्ट ऊपर आ जाता है, जिससे पैदावार नहीं होती। किसान जिप्सम का प्रयोग करें।


कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र मलिक बताते हैं कि पीएच बढने से कैल्शियम घट जाता है। मिट्टी में सोडियम क्लोराइड बढ़ जाता है। इससे सूक्ष्म पोषक तत्व प्रभावित होते हैँ। एसिड पैदा करने के लिए किसान केल्शियम, जिप्सम का प्रयोग करें। इस तरह की जमीन में गोबर खाद के अलावा जौं, धान, ढेंचा फसलों की पैदावार की जानी चाहिए।

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