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Baghpat News: गर्भ कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया
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-माता मरु देवी ने देखे सोलह सपने, माता की गोद भराई में उमड़े श्रद्धालु
फोटो संख्या 5
बड़ौत। राजकीय अतिथि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ के सानिध्य, बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान मेंं चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन गर्भ कल्याणक महोत्सव दिगंबर जैन कॉलेज केसी फील्ड में मनाया गया।
सुबह पीत वस्त्रधारी इंद्रगनों ने भगवान आदिनाथ, चंद्रप्रभु और शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक कर किया। शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन को प्राप्त हुआ। इस दौरान कुबेर इंद्र अंकुर जैन, यज्ञनायक अशोक जैन, इशान इंद्र मनोज जैन, सानत इंद्र विपुल जैन, महेंद्र इंद्र सौरभ जैन ने नृत्य किया। पंडित श्रेयांस जैन के दिशा निर्देशन और प्रतिष्ठाचार्य हसमुख जैन के नेतृत्व में सभी भक्तों ने गर्भ कल्याणक की पूजन की। साथ ही हर्षोल्लास से गर्भ कल्याणक मनाया। संगीतकार रामकुमार जैन दोराहा के मधुर भजनों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अमन जैन झांसी को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेट विनोद जैन एडवोकेट द्वारा किया गया। विभिन्न स्थानों से आये श्रद्धालुओं का स्वागत अध्यक्ष धनपाल जैन, स्वागत समिति के सदस्यों ने तिलक लगाकर और प्रतीक चिह्न देकर किया। दोपहर 3 बजे तीर्थकर बालक की माता मरु देवी रूपी अनिता जैन की गोद भराई हुई। इस अवसर पर राजा नाभिराय रूपी अभय जैन ने खुशिया मनाई। रात्रि में भगवान की आरती हुई और माता के सोलह सपनों की प्रस्तुति उमेश जैन भिंड द्वारा कराई गई।
-कार्यक्रम को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष प्रवीण जैन, मुख्य संयोजक अतुल जैन, सतीश सराफ, दिनेश नवकार, पंकज जैन, नितिन जैन, सुनील जैन, सचिन भारती, गौरव, हर्षित जैन, संजय जैन, दीपक जैन, नमन जैन, चिराग जैन का सहयोग रहा।
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-जैनाचार्य अनुत्तर सागर महाराज ने 117 उपवास का किया महापारणा
मुनि 108 अनुत्तर सागर महाराज ने चातुर्मास के मध्य हुए 117 उपवास का पारणा किया, जिसका सौभाग्य सुधीर जैन को प्राप्त हुआ। समाज के सभी श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के महापारने पर हर्ष व्यक्त किया है।
-धर्मसभा मेें आचार्य ने दिए ये प्रवचन
आचार्य विशुद्धसागर महाराज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के दूसरे दिन कहा कि देवाधिदेव अरिहंत सर्वज्ञ परमात्मा के दर्शन, वंदना से पूर्व भवों के कर्म क्षय होते हैं। गुरुओं की सेवा से पाप कर्मों का क्षय होता है, पुण्य वर्धन होता है।
समर्पण से बीज वृक्ष, बूंद से सागर बन जाता है। ऐसे-ही महा-पुण्यात्मा भव्यात्मा कैसे परमात्मा बनता है, इसी का चित्रण पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में किया जाता है। कहा कि आत्मा से परमात्मा बनने की पवित्र प्रक्रिया है, पंचकल्याणक। गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और निर्वाण ये पांच कल्याणक होते हैं। कहा कि प्रभु का सच्चा भक्त, गुरु का सच्चा सेवक किसी से सम्मान नहीं चाहता है। परन्तु वह प्रभु भक्ति, गुरु सेवा के फल से जगत से सम्माननीय हो जाता है। भक्ति से मुक्ति मिलती है। सेवा का फल मेवा मिलता है। प्रभु भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती, गुरु सेवा का फल शीघ्र प्राप्त होता है। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया।
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फोटो संख्या 5
बड़ौत। राजकीय अतिथि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ के सानिध्य, बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान मेंं चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन गर्भ कल्याणक महोत्सव दिगंबर जैन कॉलेज केसी फील्ड में मनाया गया।
सुबह पीत वस्त्रधारी इंद्रगनों ने भगवान आदिनाथ, चंद्रप्रभु और शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक कर किया। शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन को प्राप्त हुआ। इस दौरान कुबेर इंद्र अंकुर जैन, यज्ञनायक अशोक जैन, इशान इंद्र मनोज जैन, सानत इंद्र विपुल जैन, महेंद्र इंद्र सौरभ जैन ने नृत्य किया। पंडित श्रेयांस जैन के दिशा निर्देशन और प्रतिष्ठाचार्य हसमुख जैन के नेतृत्व में सभी भक्तों ने गर्भ कल्याणक की पूजन की। साथ ही हर्षोल्लास से गर्भ कल्याणक मनाया। संगीतकार रामकुमार जैन दोराहा के मधुर भजनों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अमन जैन झांसी को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेट विनोद जैन एडवोकेट द्वारा किया गया। विभिन्न स्थानों से आये श्रद्धालुओं का स्वागत अध्यक्ष धनपाल जैन, स्वागत समिति के सदस्यों ने तिलक लगाकर और प्रतीक चिह्न देकर किया। दोपहर 3 बजे तीर्थकर बालक की माता मरु देवी रूपी अनिता जैन की गोद भराई हुई। इस अवसर पर राजा नाभिराय रूपी अभय जैन ने खुशिया मनाई। रात्रि में भगवान की आरती हुई और माता के सोलह सपनों की प्रस्तुति उमेश जैन भिंड द्वारा कराई गई।
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-कार्यक्रम को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष प्रवीण जैन, मुख्य संयोजक अतुल जैन, सतीश सराफ, दिनेश नवकार, पंकज जैन, नितिन जैन, सुनील जैन, सचिन भारती, गौरव, हर्षित जैन, संजय जैन, दीपक जैन, नमन जैन, चिराग जैन का सहयोग रहा।
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-जैनाचार्य अनुत्तर सागर महाराज ने 117 उपवास का किया महापारणा
मुनि 108 अनुत्तर सागर महाराज ने चातुर्मास के मध्य हुए 117 उपवास का पारणा किया, जिसका सौभाग्य सुधीर जैन को प्राप्त हुआ। समाज के सभी श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के महापारने पर हर्ष व्यक्त किया है।
-धर्मसभा मेें आचार्य ने दिए ये प्रवचन
आचार्य विशुद्धसागर महाराज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के दूसरे दिन कहा कि देवाधिदेव अरिहंत सर्वज्ञ परमात्मा के दर्शन, वंदना से पूर्व भवों के कर्म क्षय होते हैं। गुरुओं की सेवा से पाप कर्मों का क्षय होता है, पुण्य वर्धन होता है।
समर्पण से बीज वृक्ष, बूंद से सागर बन जाता है। ऐसे-ही महा-पुण्यात्मा भव्यात्मा कैसे परमात्मा बनता है, इसी का चित्रण पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में किया जाता है। कहा कि आत्मा से परमात्मा बनने की पवित्र प्रक्रिया है, पंचकल्याणक। गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और निर्वाण ये पांच कल्याणक होते हैं। कहा कि प्रभु का सच्चा भक्त, गुरु का सच्चा सेवक किसी से सम्मान नहीं चाहता है। परन्तु वह प्रभु भक्ति, गुरु सेवा के फल से जगत से सम्माननीय हो जाता है। भक्ति से मुक्ति मिलती है। सेवा का फल मेवा मिलता है। प्रभु भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती, गुरु सेवा का फल शीघ्र प्राप्त होता है। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया।