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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   For the first time in 300 years, Chandra Prabhu Lord's chariot journey will not come out

300 साल में पहली बार नहीं निकलेगी चंद्र प्रभु भगवान की रथ यात्रा

Sat, 22 Aug 2020 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2020 11:24 PM IST
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For the first time in 300 years, Chandra Prabhu Lord's chariot journey will not come out
बड़ौत में गत वर्ष दशलक्षण पर्व पर रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालु। - फोटो : BARAUT
दशलक्षण पर्व पर धूमधाम से निकाली जाती थी रथ यात्रा, श्रद्धालु मायूस
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बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति ने लिया निर्णय, घरों में ही मनाया जाएगा महापर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। धर्म नगरी में 300 वर्ष के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि भादो माह के दशलक्षण पर्व में निकलने वाली ऐतिहासिक श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान की रथयात्रा नहीं निकाली जाएगी और न ही मंदिरों में कोई विधान व कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। कोरोना महामारी के चलते बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति ने यह निर्णय लिया है। लोगों को घरों में ही रहकर महापर्व मनाने की अपील की है।
बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति के मंत्री अतुल जैन ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण शासन की गाइड लाइन के अनुसार दशलक्षण महापर्व पर मंदिरों की सजावट तो की जाएगी, लेकिन कोई विधान और सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे।
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अतुल जैन ने बताया कि राष्ट्र संत आचार्य विद्यासागर सहित सभी संतों ने श्रद्धालुओं से घरों में रहकर ही पूजा पाठ, जाप धर्म करने का आह्वान किया है। श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड के अनिल जैन ने बताया कि मंदिर में इस बार दशलक्षण पर्व में कोई भी कार्यक्रम नही किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि घरों में ही पूजा पाठ स्वाध्याय धर्म कर इस महापर्व को मनाएंगे।
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दस दिन तक चलता है पर्व
बड़ौत। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि दिगंबर जैन संस्कृति जितने भी पर्व है, उनमें पर्वाधिराज पर्यूषण दशलक्षण महापर्व का विशेष महत्व है। यह भादो शुक्ल पंचमी से शुरू होकर शुक्ल की चौदस तक दस दिन तक चलता है। यह पर्व अष्ट मंगल अष्ट सिद्धिदायक होता है।
दस धर्म है शामिल, इसलिए कहा जाता है दशलक्षण
बड़ौत। दशलक्षण दस धर्मों पर आधारित होते हैं। सर्वप्रथम उत्तम क्षमा, मार्दव, उत्तम आजर्व, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम अकिंचन, उत्तम ब्रह्मचर्य होते हैं। इन्हीं दस धर्मों के कारण इनको दशलक्षण धर्म कहा गया है। श्रद्धालु प्रत्येक दिन एक धर्म को अपने जीवन में अंगीकार कर इनकी साधना आराधना करते हुए आत्म विजेता बनने का प्रयास करते हैं।

दूर-दराज से शामिल होते थे बैंड-बाजे, ढोल-नगाडे़
बड़ौत। इस रथ यात्रा में मध्यप्रदेश की भजन मंडली, दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर के बैंडबाजे, राजस्थान की ढोल ताशे व आगरा की झांकी आदि शामिल होती थी। रथ यात्रा से दो दिन पहले मां पदमावती जागरण, कवि सम्मेलन आदि का आयोजन होता था। पूरे नगर को दुल्हन की तरह सजाया जाता था।
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