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किसान कम सिंचाई वाली फसलों को दें महत्व : चौधरी
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खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र पर आयोजित खरीफ फसल प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर मे शामिल किसान
- फोटो : KAHKRA
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खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र में खरीफ अभियान के तहत प्रशिक्षण का आयोजन
खेकड़ा। खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र में खरीफ अभियान के तहत प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ना, धान, ज्वार अरहर फसलों के प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया। साथ ही कम सिंचाई की जरूरत वाली फसलों को महत्व देने पर जोर दिया।
केन्द्र प्रभारी डा. संदीप चौधरी ने बताया कि खरीफ मौसम में मुख्य फसल गन्ना, धान, ज्वार, अरहर आदि की खेती की जाती है। सब्जियों में मूली, अदरक, टमाटर, भिंडी, बैंगन, ककड़ी, लौकी, मेथी आदि लगाई जाती है। सिंचाई जल की मांग को देखते हुए किसानों को धान की पूसा बासमती 1847, पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1509 कम अवधि वाली किस्मों की 15 जून के बाद नर्सरी डालनी चाहिए। किसानों को कम सिंचाई वाली फसलों को अधिक महत्व देना होगा।
मृदा वैज्ञानिक डा. रविंद्र कुमार ने कहा कि संतुलित रसायन उर्वरकों के प्रयोग से अधिक खर्च पर भी नियंत्रण रहता है और भूमि की गुणवत्ता भी बनी रहती है। डा. भूपेंद्र कुमार ने बीजामृत, जीवामृत, धनजीवामृत दशपर्णी के साथ बेवेरिया बेसियाना, ट्राइकोड्रमा पाउडर आदि बनाने और प्रयोग विधि की विस्तार से जानकारी दी। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अंकिता नेगी ने खरीफ फसलों पर पड़ने वाले मौसम के प्रभाव की जानकारी दी। प्रशिक्षण शिविर में सुभाष, बिजेंद्र, राधेश्याम, सुभाष नैन, भोपाल सिंह, बलबीर सिंह, महेंद्र सिंह, पप्पू, संदीप, योगेश, हरबीर, राजपाल, महक सिंह, कालूराम आदि किसान शामिल रहे।
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खेकड़ा। खेकड़ा कृषि विज्ञान केंद्र में खरीफ अभियान के तहत प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ना, धान, ज्वार अरहर फसलों के प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया। साथ ही कम सिंचाई की जरूरत वाली फसलों को महत्व देने पर जोर दिया।
केन्द्र प्रभारी डा. संदीप चौधरी ने बताया कि खरीफ मौसम में मुख्य फसल गन्ना, धान, ज्वार, अरहर आदि की खेती की जाती है। सब्जियों में मूली, अदरक, टमाटर, भिंडी, बैंगन, ककड़ी, लौकी, मेथी आदि लगाई जाती है। सिंचाई जल की मांग को देखते हुए किसानों को धान की पूसा बासमती 1847, पूसा बासमती 1718, पूसा बासमती 1509 कम अवधि वाली किस्मों की 15 जून के बाद नर्सरी डालनी चाहिए। किसानों को कम सिंचाई वाली फसलों को अधिक महत्व देना होगा।
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मृदा वैज्ञानिक डा. रविंद्र कुमार ने कहा कि संतुलित रसायन उर्वरकों के प्रयोग से अधिक खर्च पर भी नियंत्रण रहता है और भूमि की गुणवत्ता भी बनी रहती है। डा. भूपेंद्र कुमार ने बीजामृत, जीवामृत, धनजीवामृत दशपर्णी के साथ बेवेरिया बेसियाना, ट्राइकोड्रमा पाउडर आदि बनाने और प्रयोग विधि की विस्तार से जानकारी दी। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अंकिता नेगी ने खरीफ फसलों पर पड़ने वाले मौसम के प्रभाव की जानकारी दी। प्रशिक्षण शिविर में सुभाष, बिजेंद्र, राधेश्याम, सुभाष नैन, भोपाल सिंह, बलबीर सिंह, महेंद्र सिंह, पप्पू, संदीप, योगेश, हरबीर, राजपाल, महक सिंह, कालूराम आदि किसान शामिल रहे।
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