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Baghpat News: फूलों की खेती से महकी किसानों की जिंदगी
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-सहालग के सीजन में बढ़ा फूलों का कारोबार, खेती करने वाले किसानों को खूब हो रहा फायदा
-जिले में 180 हेक्टेयर भूमि पर होती है गेंदे की खेती, लागत से चार गुना तक मिल रहा मुनाफा
फोटो संख्या 6
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत/बिनौली। फूलों की खेती से किसानों की जिंदगी में महक बढ़ने लगी है। सहालग के सीजन में फूलों का कारोबार बढ़ रहा है और इसका सीधा फायदा फूलों की खेती करने वाले किसानों को मिल रहा है। किसानों को लागत से करीब तीन से चार गुना तक मुनाफा मिल रहा है और इस खेती में रोग लगने का भी ज्यादा खतरा नहीं है।
गेंदे की खेती से जुड़े हरबीर, नौशाद, शकील, ओमपाल समेत अन्य किसानों का कहना है कि गन्ना, गेहूं, सब्जी आदि की खेती को छोड़कर कई साल पहले गेंदे के फूलों की खेती शुरू की। गेंदे की एक बीघा फसल में 10 से 12 हजार रुपये की लागत आती है और लागत से तीन से चार गुना तक का मुनाफा मिल जाता है। तीन माह में फसल तैयार हो जाती है। बताया कि एक बीघा में करीब एक क्विंटल फूलों की पैदावार होती है।
बाजार में सहालग से पहले गेंदे के फूल 40 रुपये किलो तक बिक रहे थे और अब दाम बढ़कर 60 रुपये किलो तक हो गए हैं। फूलों की खेती करने से पहले अधिकतर किसान सब्जी की खेती करते थे, जिसमें लागत ज्यादा और कमाई कम होती थी। इस कारण सब्जी की खेती को छोड़ फूलों की खेती शुरू कर दी। वहीं जिला उद्यान अधिकारी निधि सिंह ने बताया कि जिले में करीब 180 हेक्टयेर भूमि पर गेंदे की खेती की जाती है। इनमें बिनौली, बरनावा, रटौल क्षेत्र में ज्यादा किसान खेती करते हैं।
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-मंडप, घर, गाड़ी सजाने के लिए बढ़ी फूलों की मांग
सहालग के सीजन में मंडप, घर, गाड़ियां आदि सजाने के लिए गेंदे की फूलों की मांग बढ़ी है। इस कारण कारोबार ने गति पकड़ी और दाम में वृद्धि हो गई है। अन्य दिनों में बाजार में फूलों की सामान्य मांग रहती है, जिससे करोबार कुछ ठंडा रहता है। यहां से फूल स्थानीय बाजार व दिल्ली की मंडी में भेजा जाता है। शाम को फूल तोड़ा जाता है और सुबह को बेच दिया जाता है।
ये बोले किसान
गेंदे की खेती करने से पहले सब्जी की खेती करते थे, मगर उसमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता था। इसलिए फूलों की खेती शुरू की है, जिसमें लाभ काफी मिल रहा है। -आदेश कश्यप
गेंदे की खेती में लागत से करीब तीन से चार गुना लाभ होता है। वर्ष में दो बार खेती कर पैदावार लेते हैं। शादी के सीजन में फूलों की मांग ज्यादा रहती है। -इमरान अंसारी
फूलों की खेती के लिए दिन के मुकाबले रात में ज्यादा निगरानी करनी पड़ती है, क्योंकि बाजार में फूलों की मांग बढ़ने पर फसल चोरी होने का अधिक डर रहता है। इसमें बीमारी लगने का डर कम रहता है। -सलीम सलमानी
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-जिले में 180 हेक्टेयर भूमि पर होती है गेंदे की खेती, लागत से चार गुना तक मिल रहा मुनाफा
फोटो संख्या 6
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत/बिनौली। फूलों की खेती से किसानों की जिंदगी में महक बढ़ने लगी है। सहालग के सीजन में फूलों का कारोबार बढ़ रहा है और इसका सीधा फायदा फूलों की खेती करने वाले किसानों को मिल रहा है। किसानों को लागत से करीब तीन से चार गुना तक मुनाफा मिल रहा है और इस खेती में रोग लगने का भी ज्यादा खतरा नहीं है।
गेंदे की खेती से जुड़े हरबीर, नौशाद, शकील, ओमपाल समेत अन्य किसानों का कहना है कि गन्ना, गेहूं, सब्जी आदि की खेती को छोड़कर कई साल पहले गेंदे के फूलों की खेती शुरू की। गेंदे की एक बीघा फसल में 10 से 12 हजार रुपये की लागत आती है और लागत से तीन से चार गुना तक का मुनाफा मिल जाता है। तीन माह में फसल तैयार हो जाती है। बताया कि एक बीघा में करीब एक क्विंटल फूलों की पैदावार होती है।
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बाजार में सहालग से पहले गेंदे के फूल 40 रुपये किलो तक बिक रहे थे और अब दाम बढ़कर 60 रुपये किलो तक हो गए हैं। फूलों की खेती करने से पहले अधिकतर किसान सब्जी की खेती करते थे, जिसमें लागत ज्यादा और कमाई कम होती थी। इस कारण सब्जी की खेती को छोड़ फूलों की खेती शुरू कर दी। वहीं जिला उद्यान अधिकारी निधि सिंह ने बताया कि जिले में करीब 180 हेक्टयेर भूमि पर गेंदे की खेती की जाती है। इनमें बिनौली, बरनावा, रटौल क्षेत्र में ज्यादा किसान खेती करते हैं।
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-मंडप, घर, गाड़ी सजाने के लिए बढ़ी फूलों की मांग
सहालग के सीजन में मंडप, घर, गाड़ियां आदि सजाने के लिए गेंदे की फूलों की मांग बढ़ी है। इस कारण कारोबार ने गति पकड़ी और दाम में वृद्धि हो गई है। अन्य दिनों में बाजार में फूलों की सामान्य मांग रहती है, जिससे करोबार कुछ ठंडा रहता है। यहां से फूल स्थानीय बाजार व दिल्ली की मंडी में भेजा जाता है। शाम को फूल तोड़ा जाता है और सुबह को बेच दिया जाता है।
ये बोले किसान
गेंदे की खेती करने से पहले सब्जी की खेती करते थे, मगर उसमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता था। इसलिए फूलों की खेती शुरू की है, जिसमें लाभ काफी मिल रहा है। -आदेश कश्यप
गेंदे की खेती में लागत से करीब तीन से चार गुना लाभ होता है। वर्ष में दो बार खेती कर पैदावार लेते हैं। शादी के सीजन में फूलों की मांग ज्यादा रहती है। -इमरान अंसारी
फूलों की खेती के लिए दिन के मुकाबले रात में ज्यादा निगरानी करनी पड़ती है, क्योंकि बाजार में फूलों की मांग बढ़ने पर फसल चोरी होने का अधिक डर रहता है। इसमें बीमारी लगने का डर कम रहता है। -सलीम सलमानी