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खेती के लिए बल्लियों के पुल से कृष्णा नदी पा कर रहे किसान
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रहतना के किसानों की कृष्णा नदी पार करीब 600 से 700 बीघा जमीन
दूसरा रास्ता छह किलोमीटर लंबा, समय की बर्बादी से नहीं करते इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। ग्राम रहतना के किसानों की कृष्णा नदी पार कर करीब 600 से 700 बीघा जमीन है। गांव में पुल न होने के कारण लोग बल्लियों का पुल बनाकर खेतों पर जाने के लिए विवश है। कई बार बल्लियों के पुल से गिरने से किसानों की मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों ने समस्या का समाधान कराने के लिए नदी पर पुल बनवाने की मांग की है।
गांव निवासी राजपाल का कहना है कि नदी पर पुल न होने के कारण लोगों को खेतों में जाने के लिए छह किमी का सफर तय कर रंछाड़ पुल से होकर जाना पड़ता है। इससे काफी समय की बर्बादी होती है। रोहताश व लक्ष्मीचंद का कहना है कि बल्लियों से नदी पार करने में कई बार दुर्घटनाएं भी घट चुकी है। कई ग्रामीणों की नदी में डूबने से मौत भी हो चुकी है। तेजपाल, भोपाल, इकबाल व सुरेंद्र का कहना है कि गांव में पुल के अभाव में खेतों पर जाने के लिए बहुत परेशानी होती है। विधायक सहेंद्र सिंह से नदी पर पुल बनवाने की मांग की गई थी। विधायक ने पुल का निर्माण कराने का आश्वासन दिया है।
दूसरा रास्ता छह किलोमीटर लंबा
वर्तमान में किसानों को अपने खेतो और बिनौली जाने के लिए रंछाड गांव के पुल से होकर जाना पड़ता है। रंछाड का पुल गांव से छह किलोमीटर की दूरी पर है।
नदी पर एक छोटे पुल का निर्माण होना बहुत जरूरी है। पुल का निर्माण होने से लोगों का सफर कम और आसान हो जाएगा। इसके अलावा पुल का निर्माण होने से बिनौली जाना भी लोगों के लिए आसान होगा। - मंजू देवी, ग्राम प्रधान।
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दूसरा रास्ता छह किलोमीटर लंबा, समय की बर्बादी से नहीं करते इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। ग्राम रहतना के किसानों की कृष्णा नदी पार कर करीब 600 से 700 बीघा जमीन है। गांव में पुल न होने के कारण लोग बल्लियों का पुल बनाकर खेतों पर जाने के लिए विवश है। कई बार बल्लियों के पुल से गिरने से किसानों की मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों ने समस्या का समाधान कराने के लिए नदी पर पुल बनवाने की मांग की है।
गांव निवासी राजपाल का कहना है कि नदी पर पुल न होने के कारण लोगों को खेतों में जाने के लिए छह किमी का सफर तय कर रंछाड़ पुल से होकर जाना पड़ता है। इससे काफी समय की बर्बादी होती है। रोहताश व लक्ष्मीचंद का कहना है कि बल्लियों से नदी पार करने में कई बार दुर्घटनाएं भी घट चुकी है। कई ग्रामीणों की नदी में डूबने से मौत भी हो चुकी है। तेजपाल, भोपाल, इकबाल व सुरेंद्र का कहना है कि गांव में पुल के अभाव में खेतों पर जाने के लिए बहुत परेशानी होती है। विधायक सहेंद्र सिंह से नदी पर पुल बनवाने की मांग की गई थी। विधायक ने पुल का निर्माण कराने का आश्वासन दिया है।
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दूसरा रास्ता छह किलोमीटर लंबा
वर्तमान में किसानों को अपने खेतो और बिनौली जाने के लिए रंछाड गांव के पुल से होकर जाना पड़ता है। रंछाड का पुल गांव से छह किलोमीटर की दूरी पर है।
नदी पर एक छोटे पुल का निर्माण होना बहुत जरूरी है। पुल का निर्माण होने से लोगों का सफर कम और आसान हो जाएगा। इसके अलावा पुल का निर्माण होने से बिनौली जाना भी लोगों के लिए आसान होगा। - मंजू देवी, ग्राम प्रधान।
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