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खाद्य पदार्थों के सभी 129 नमूने फेल, जहर खा रहा शहर

Fri, 10 Jan 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 11:54 PM IST
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खाद्य पदार्थों के सभी 129 नमूने फेल, जहर खा रहा शहर
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बागपत। मिलावटखोर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध, मावा और मिठाई के सैंपलों की जांच में उनकी पोल खुली। सबसे ज्यादा मावा के नमूने फेल हुए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि विभाग ने साल 2019 में जांच के लिए 172 नमूने लखनऊ लैब भेजे थे, जिनमें से 129 की रिपोर्ट आई है। सभी नमूने जांच में फेल पाए गए। सबसे ज्यादा 60 नमूने मावा के फेल आए हैं। 43 नमूनों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है।
चितरंजन कुमार ने बताया जो नमूने फेल आए हैं, उनमें से 14 के खिलाफ एसीजेएम और 63 के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दायर कराया गया है। बाकी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि गन्ने का नया सीजन शुरू होते ही सबसे ज्यादा शिकायतें मिलावटी गुड़ की आई हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने गुड़ के 18 नमूने जांच के लिए भेजे हैं।
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दिल्ली सप्लाई किया जाता है मावा
रोजाना जिले से बड़ी मात्रा में मावा दिल्ली सप्लाई किया जाता है। त्योहार नजदीक आने पर मांग बढ़ जाती है। दूध से पूर्ति नहीं होने के कारण पाउडर, आलू और केमिकल का प्रयोग कर मिलावट का खेल किया जाता है।
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इस तरह बनाते हैं मावा
मिल्क पाउडर को गरम पानी मिलाकर उबालते हैं। चिकनाई के लिए रिफाइंड मिलाते हैं। सर्फ, आलू और अन्य केमिकल मिलाते हैं। जिले में चौगामा क्षेत्र में मावा बनाने का काम कई गांवों में होता है। इनमें धनौरा सिल्वरनगर, पलड़ा, मिलाना, दाहा, झूंडपुर, ट्योढ़ी, अमीनगर सराय, खपराना, चौबली, बरनावा, बिनौली, ओड्ढापुर, जागोस, बड़ौत, फौलादनगर आदि गांव शामिल हैं।
इन बीमारियों का खतरा
सीएचसी बागपत के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत बताते हैं कि मिलावटी मावा खाने से सबसे ज्यादा पेट की बीमारियों का खतरा रहता है। किडनी और लीवर डैमेज हो सकते हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी चितरंजन कुमार का कहना है कि समय-समय पर सैंपलिंग की जाती है। मिलावट रोकने के लिए जनवरी में छापा मारने का प्लान तैयार किया है।
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