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Baghpat News: हर चौथी महिला एनिमिया की शिकार, मिल रही खून की कमी
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बागपत। जिले में हर चौथी महिला एनिमिया की शिकार है और उनमें खून की कमी मिल रही है। इससे महिलाओं में कमजोरी आती है और बीमारी फैलने का खतरा रहता है। सबसे अधिक खून की कमी किशोरी व गर्भवती महिलाओें में हो रही है। जिले में एक माह में दो हजार महिलाओं की जांच में 600 से अधिक महिला पीड़ित मिली हैं। चिकित्सक उन्हें खानपान में सुधार करने की सलाह दे रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में नगर, ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं। अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं में हर चौथी महिला एनीमिया पीड़ित पाई गई है। एक महीने में दो हजार महिलाओं की जांच की गई, जिनमें 600 से अधिक महिला व किशोरी एनीमिया की शिकार मिलीं। इनमें 150 से अधिक महिलाएं मॉडरेट एनीमिया से पीड़ित पाई गई हैं। इनके हीमोग्लोबिन का स्तर छह से नौ ग्राम प्रति डेसी लीटर के बीच है। इनमें हिमोग्लोबिन का स्तर सात से नौ ग्राम मिला। इनमें भी 45 महिलाओं में हिमोग्लोविन का स्तर पांच से सात ग्राम प्रति डेसीलीटर मिला। डिप्टी सीएमओ डॉ. विभाष राजपूत के अनुसार खून की कमी को पूरा करने के लिए गोलियां दी जाती हैं। अत्यधिक कमी से जूझ रही महिलाओं को आयरन की कमी पाए जाने पर आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन भी दिया जाता है। वहीं इसके लिए खानपान में सुधार करना होगा।
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महावारी शुरू होते ही एनीमिया की चपेट में आ जाती हैं किशोरियां
डिप्टी सीएमओ डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि माहवारी शुरू होने के बाद किशोरियां एनिमिया की चपेट में आ जाती हैं। इससे बचने के लिए उन्हें गुड़, चौराई, पालक, अनार, चुकंदर आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा प्रचुर मात्रा में आयरन पाये जाने वाले खाद्य पदार्थों का भी सेवन करना चाहिए। किशोरवस्था से ही इस बारे में खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।
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जिला महिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में नगर, ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं। अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं में हर चौथी महिला एनीमिया पीड़ित पाई गई है। एक महीने में दो हजार महिलाओं की जांच की गई, जिनमें 600 से अधिक महिला व किशोरी एनीमिया की शिकार मिलीं। इनमें 150 से अधिक महिलाएं मॉडरेट एनीमिया से पीड़ित पाई गई हैं। इनके हीमोग्लोबिन का स्तर छह से नौ ग्राम प्रति डेसी लीटर के बीच है। इनमें हिमोग्लोबिन का स्तर सात से नौ ग्राम मिला। इनमें भी 45 महिलाओं में हिमोग्लोविन का स्तर पांच से सात ग्राम प्रति डेसीलीटर मिला। डिप्टी सीएमओ डॉ. विभाष राजपूत के अनुसार खून की कमी को पूरा करने के लिए गोलियां दी जाती हैं। अत्यधिक कमी से जूझ रही महिलाओं को आयरन की कमी पाए जाने पर आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन भी दिया जाता है। वहीं इसके लिए खानपान में सुधार करना होगा।
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महावारी शुरू होते ही एनीमिया की चपेट में आ जाती हैं किशोरियां
डिप्टी सीएमओ डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि माहवारी शुरू होने के बाद किशोरियां एनिमिया की चपेट में आ जाती हैं। इससे बचने के लिए उन्हें गुड़, चौराई, पालक, अनार, चुकंदर आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा प्रचुर मात्रा में आयरन पाये जाने वाले खाद्य पदार्थों का भी सेवन करना चाहिए। किशोरवस्था से ही इस बारे में खास ख्याल रखने की जरूरत होती है।
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