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Baghpat News: आठ होम्योपैथिक अस्पताल, पांच चिकित्सक और फार्मासिस्ट भी नहीं
Sun, 23 Jun 2024 04:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sun, 23 Jun 2024 04:45 AM IST
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बागपत। जिले के होम्योपैथिक अस्पतालों में चिकित्सक और फार्मासिस्ट की कमी है। पांच चिकित्सकों पर आठ अस्पतालों की जिम्मेदारी है। जिला मुख्यालय पर जिला होम्योपैथिक अधिकारी ही चिकित्सक की जिम्मेदारी संभालती है।
जिले में आठ होम्योपैथिक अस्पताल हैं। इनमें बागपत जिला मुख्यालय के अलावा खेकड़ा, बालैनी, जिला अस्पताल, बाम, डौला, बड़ौत सीएचसी, निबाली में होम्योपैथिक अस्पताल हैं। अस्पताल में एक-एक चिकित्सक और जिला स्तर पर दो चिकित्सक के पद हैं। इनके अलावा सभी अस्पताल में एक-एक फार्मासिस्ट का पद स्वीकृत है। जिले के आठ अस्पताल में पांच चिकित्सक तैनात हैं, जबकि फार्मासिस्ट के सभी पद खाली हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों काे इलाज के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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एक चिकित्सक की तीन-तीन दिन की ड्यूटी
विभाग की ओर से अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए तीन-तीन दिन के लिए चिकित्सकों को नियुक्त किए गए। चिकित्सक सप्ताह में तीन दिन से अस्पताल और तीन दिन दूसरे अस्पताल में मरीजों की जांच करते हैं।
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एक महीने में 9885 मरीजों ने कराया इलाज
अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के बावजूद मई में 9885 मरीजों ने ओपीडी में अपना इलाज कराया है। इनमें 4321 नए मरीज और 5264 ऐसे मरीजों ने अपनी जांच कराई है, जिनका पहले से इलाज चल रहा था।
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-अस्पताल में एक दिन चिकित्सक मिलते हैं और एक दिन अस्पताल बंद रहता है। इससे दवा लेने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। - अमित गुप्ता
-अस्पताल में नियमित चिकित्सक न बैठने के कारण कस्बे के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। - अखिलेश कौशिक
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वर्जन - चिकित्सकों की कमी के कारण सभी अस्पताल में नियमित ओपीडी नहीं हो रही है। एक-एक चिकित्सक दो अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। - डॉ. ऊषा वर्मा, जिला होम्योपैथिक अधिकारी
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जिले में आठ होम्योपैथिक अस्पताल हैं। इनमें बागपत जिला मुख्यालय के अलावा खेकड़ा, बालैनी, जिला अस्पताल, बाम, डौला, बड़ौत सीएचसी, निबाली में होम्योपैथिक अस्पताल हैं। अस्पताल में एक-एक चिकित्सक और जिला स्तर पर दो चिकित्सक के पद हैं। इनके अलावा सभी अस्पताल में एक-एक फार्मासिस्ट का पद स्वीकृत है। जिले के आठ अस्पताल में पांच चिकित्सक तैनात हैं, जबकि फार्मासिस्ट के सभी पद खाली हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों काे इलाज के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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एक चिकित्सक की तीन-तीन दिन की ड्यूटी
विभाग की ओर से अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए तीन-तीन दिन के लिए चिकित्सकों को नियुक्त किए गए। चिकित्सक सप्ताह में तीन दिन से अस्पताल और तीन दिन दूसरे अस्पताल में मरीजों की जांच करते हैं।
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एक महीने में 9885 मरीजों ने कराया इलाज
अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के बावजूद मई में 9885 मरीजों ने ओपीडी में अपना इलाज कराया है। इनमें 4321 नए मरीज और 5264 ऐसे मरीजों ने अपनी जांच कराई है, जिनका पहले से इलाज चल रहा था।
-अस्पताल में एक दिन चिकित्सक मिलते हैं और एक दिन अस्पताल बंद रहता है। इससे दवा लेने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। - अमित गुप्ता
-अस्पताल में नियमित चिकित्सक न बैठने के कारण कस्बे के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। - अखिलेश कौशिक
वर्जन - चिकित्सकों की कमी के कारण सभी अस्पताल में नियमित ओपीडी नहीं हो रही है। एक-एक चिकित्सक दो अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। - डॉ. ऊषा वर्मा, जिला होम्योपैथिक अधिकारी