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Baghpat News: 80 साल पहले चंदे से बने स्कूल से निकली शिक्षा की रोशनी पर विलय का ग्रहण
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रटौल। ढिकौली गांव का प्राथमिक विद्यालय नंबर एक कोई आम स्कूल नहीं, बल्कि 20 हजार लोगों की भावनाएं इस स्कूल से जुड़ी हैं। यह वही शिक्षा का मंदिर है, जिसकी नींव 80 साल पहले ग्रामीणों के खून पसीने की कमाई के चंदे से रखी गई। इसने देश को ब्रिगेडियर, कर्नल समेत 300 सैनिक, कमिश्नर, चिकित्सक एवं अन्य अफसर दिए लेकिन अब स्कूल विलय के आदेश से इसका वजूद मिटता दिख रहा है।
देश की आजादी से पहले ढिकौली गांव में कोई स्कूल नहीं था। तब ग्रामीणों को स्कूल नहीं होने की बात मन ही मन खटकती लेकिन किससे कहते। तब अंग्रेजों की सरकार थी। ऐसे में ग्रामीणों ने खुद स्कूल की स्थापना कराने की ठानी और चार बीघा जमीन पर वर्ष 1945 में इसकी नींव रखी। उस दौर में ग्रामीणों ने चंदे में एक-एक रुपये के साथ अनाज तक दिया। स्कूल शुरू हुआ और ग्रामीणों के बच्चों को शिक्षा मिलने से उनका सपना पूरा होने लगा।
देश आजाद हुआ तो इस स्कूल को भी प्राथमिक विद्यालय नंबर एक का टैग मिल गया। अब इस प्राथमिक विद्यालय में 40 बच्चे होने के कारण इसका संविलियन विद्यालय में विलय होने से 20 हजार ग्रामीण आहत हैं। इनके लिए यह केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की निशानी है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को एक किलोमीटर दूर कंपोजिट विद्यालय में जाना पड़ेगा। उन्होंने डीएम और मुख्यमंत्री से विद्यालय का विलय नहीं करने की मांग की है।
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देश को दिए 300 सैनिक और तमाम अफसर
इस प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में पढ़कर देवेंद्र सिंह ढाका एसडीएम बने और कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त हुए। सुरेंद्र सिंह ढाका मेजर जनरल, रणबीर सिंह ढाका बिग्रेडियर, सतेंद्र ढाका, बलवान सिंह ढाका कर्नल बने। ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में पढ़कर देश की सेना में करीब 300 युवा भर्ती हुए। कदम सिंह कृषि विभाग में उप निदेशक, सहदेव सिंह एमबीबीएस चिकित्सक व एमडी, बिरम सिंह ढाका ऊर्जा निगम में अधीक्षण अभियंता व चंद्रपाल ढाका डिग्री कॉलेज में प्राचार्य बने। यहां पढ़ने वालों ने खेलों में भी कई बार लोहा मनवाया।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर एक के विलय से ग्रामीण काफी दुखी हैं। पूर्वजों ने अनाज व एक-एक रुपया इकट्ठा करके विद्यालय बनवाया था। यहां से पढ़ने वालों ने सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा की। विद्यालय का विलय कर सरकार हमारे पूर्वजों का वजूद खत्म करना चाहती है।
-रामबीर सिंह ढाका, पूर्व एसडीओ
प्रदेश सरकार विद्यालय का विलय कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। इस तरह से विद्यालय का विलय नहीं किया जाना चाहिए। हम इसके लिए अधिकारियों के पास गए थे। स्कूल को खुलवाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। यह हमारे पूर्वजों की निशानी है। -संदीप ढाका, प्रधान
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सरकार के आदेशों के अनुसार स्कूल का विलय किया गया है। इसमें बच्चों की संख्या 50 से ज्यादा होती तो शासन को रिपोर्ट भेजकर बातचीत की जाती। इसमें हमारे स्तर से अभी कुछ नहीं किया जा सकता है।
-गीता चौधरी, बीएसए
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देश की आजादी से पहले ढिकौली गांव में कोई स्कूल नहीं था। तब ग्रामीणों को स्कूल नहीं होने की बात मन ही मन खटकती लेकिन किससे कहते। तब अंग्रेजों की सरकार थी। ऐसे में ग्रामीणों ने खुद स्कूल की स्थापना कराने की ठानी और चार बीघा जमीन पर वर्ष 1945 में इसकी नींव रखी। उस दौर में ग्रामीणों ने चंदे में एक-एक रुपये के साथ अनाज तक दिया। स्कूल शुरू हुआ और ग्रामीणों के बच्चों को शिक्षा मिलने से उनका सपना पूरा होने लगा।
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देश आजाद हुआ तो इस स्कूल को भी प्राथमिक विद्यालय नंबर एक का टैग मिल गया। अब इस प्राथमिक विद्यालय में 40 बच्चे होने के कारण इसका संविलियन विद्यालय में विलय होने से 20 हजार ग्रामीण आहत हैं। इनके लिए यह केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की निशानी है। यहां पढ़ने वाले बच्चों को एक किलोमीटर दूर कंपोजिट विद्यालय में जाना पड़ेगा। उन्होंने डीएम और मुख्यमंत्री से विद्यालय का विलय नहीं करने की मांग की है।
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देश को दिए 300 सैनिक और तमाम अफसर
इस प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में पढ़कर देवेंद्र सिंह ढाका एसडीएम बने और कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त हुए। सुरेंद्र सिंह ढाका मेजर जनरल, रणबीर सिंह ढाका बिग्रेडियर, सतेंद्र ढाका, बलवान सिंह ढाका कर्नल बने। ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में पढ़कर देश की सेना में करीब 300 युवा भर्ती हुए। कदम सिंह कृषि विभाग में उप निदेशक, सहदेव सिंह एमबीबीएस चिकित्सक व एमडी, बिरम सिंह ढाका ऊर्जा निगम में अधीक्षण अभियंता व चंद्रपाल ढाका डिग्री कॉलेज में प्राचार्य बने। यहां पढ़ने वालों ने खेलों में भी कई बार लोहा मनवाया।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक के विलय से ग्रामीण काफी दुखी हैं। पूर्वजों ने अनाज व एक-एक रुपया इकट्ठा करके विद्यालय बनवाया था। यहां से पढ़ने वालों ने सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा की। विद्यालय का विलय कर सरकार हमारे पूर्वजों का वजूद खत्म करना चाहती है।
-रामबीर सिंह ढाका, पूर्व एसडीओ
प्रदेश सरकार विद्यालय का विलय कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। इस तरह से विद्यालय का विलय नहीं किया जाना चाहिए। हम इसके लिए अधिकारियों के पास गए थे। स्कूल को खुलवाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। यह हमारे पूर्वजों की निशानी है। -संदीप ढाका, प्रधान
सरकार के आदेशों के अनुसार स्कूल का विलय किया गया है। इसमें बच्चों की संख्या 50 से ज्यादा होती तो शासन को रिपोर्ट भेजकर बातचीत की जाती। इसमें हमारे स्तर से अभी कुछ नहीं किया जा सकता है।
-गीता चौधरी, बीएसए