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बाल श्रम निषेध दिवस : खेलने-कूदने के दिनों में नौनिहाल होटल-ढाबों में मांझ रहे बर्तन
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बाल श्रम निषेध दिवस
बड़ौत। बच्चों से काम करवाना गैर-कानूनी है। काम करवाने वालों को सजा का प्रावधान है। लेकिन नगर ही नहीं देहात क्षेत्रों में स्थित दुकानों, ईट भट्ठों सहित अन्य प्रतिष्ठानों पर बहुत से बच्चे आपको काम करते नजर आएंगे। जबकि जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजों में बाल श्रम मुक्त जिले का दावा करते हैं। सरकारी बैठकों में बाल श्रम निषेध का ढोल पीटते हैं। बीते सालों की तरह शनिवार को बाल श्रम निषेध दिवस पर भी विचार गोष्ठी की जाएगी। बाल श्रम रोकने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाए जाएंगे। लेकिन हकीकत में जिम्मेदार अफसरों को इससे कोई लेना नहीं है। पढ़ने-लिखने और खेलने-कूदने के दिनों में बच्चों के हाथों में भीख का कटोरा और जूठे बर्तन हैं। पंचरों की दुकानों पर अधिकतर नाबालिग बच्चे नजर आते हैं।
चाय के गिलास साफ करना हो गयी आम बात
बड़ौत। चाय के गिलास साफ करना। मेज से समोसे की प्लेट उठाकर कपड़ा मारना। दुकान में पोंछा लगाने से जूठे बर्तन मांझना, 13 साल के नगर निवासी किशोर के लिए आम बात हो गई है। वह रोज दुकान मालिक की डांट सुनता है, लेकिन कभी ऊफ तक नहीं करता है। करता है तो सिर्फ काम।
ये बोले एसडीएम
श्रम विभाग के साथ समय-समय पर अभियान चलाकर बच्चों को मुक्त कराया जाता है। जिन लोगों के यहां पर छोटे बच्चे काम करते है, उन्हें भी मानवता दिखानी चाहिए, ताकि बच्चे पढ़-लिख सके। - दुर्गेश मिश्र, एसडीएम।
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बड़ौत। बच्चों से काम करवाना गैर-कानूनी है। काम करवाने वालों को सजा का प्रावधान है। लेकिन नगर ही नहीं देहात क्षेत्रों में स्थित दुकानों, ईट भट्ठों सहित अन्य प्रतिष्ठानों पर बहुत से बच्चे आपको काम करते नजर आएंगे। जबकि जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजों में बाल श्रम मुक्त जिले का दावा करते हैं। सरकारी बैठकों में बाल श्रम निषेध का ढोल पीटते हैं। बीते सालों की तरह शनिवार को बाल श्रम निषेध दिवस पर भी विचार गोष्ठी की जाएगी। बाल श्रम रोकने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाए जाएंगे। लेकिन हकीकत में जिम्मेदार अफसरों को इससे कोई लेना नहीं है। पढ़ने-लिखने और खेलने-कूदने के दिनों में बच्चों के हाथों में भीख का कटोरा और जूठे बर्तन हैं। पंचरों की दुकानों पर अधिकतर नाबालिग बच्चे नजर आते हैं।
चाय के गिलास साफ करना हो गयी आम बात
बड़ौत। चाय के गिलास साफ करना। मेज से समोसे की प्लेट उठाकर कपड़ा मारना। दुकान में पोंछा लगाने से जूठे बर्तन मांझना, 13 साल के नगर निवासी किशोर के लिए आम बात हो गई है। वह रोज दुकान मालिक की डांट सुनता है, लेकिन कभी ऊफ तक नहीं करता है। करता है तो सिर्फ काम।
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ये बोले एसडीएम
श्रम विभाग के साथ समय-समय पर अभियान चलाकर बच्चों को मुक्त कराया जाता है। जिन लोगों के यहां पर छोटे बच्चे काम करते है, उन्हें भी मानवता दिखानी चाहिए, ताकि बच्चे पढ़-लिख सके। - दुर्गेश मिश्र, एसडीएम।
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