{"_id":"61686d5c6078474cd378c4bf","slug":"didn-t-give-up-even-in-adversity-set-the-foundation-for-the-family-baraut-news-mrt560683826","type":"story","status":"publish","title_hn":"विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं मानी हार, परिवार की नैय्या लगाई पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं मानी हार, परिवार की नैय्या लगाई पार
विज्ञापन
हाथों से बनाए बैगों के साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाए।
- फोटो : BARAUT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। ग्रामीण परिवेश में पैदा हुई महिलाओं का जज्बा भी कुछ कम नहीं। अब वे परिवार और सामाजिक जिम्मेदारी का खूब ख्याल रखती हैं। कुछ ऐसी महिलाएं भी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनी। पेश है जिले की ऐसी महिलाओं पर आधारित रिपोर्ट...
पति के देहांत के बाद परिवार को संभाला
खड़खड़ी गांव की सुमन के पिता का कई साल पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। विपरीत स्थिति में भी सुमन ने हार नहीं मानी। अब सुमन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांव मेें अचार बनाने का काम करती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री व अन्य जनप्रतिनिधि भी सुमन के बनाए गए अचार की सराहना कर चुके है। सुमन का कहना है कि वह घर का काम निपटाने के बाद दिन में 4-5 घंटे अचार बनाने का काम करती है। मेहनत के दम पर हर माह ठीक-ठाक आमदनी कर लेती हैं।
पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उठा रही जिम्मेदारी
हसनपुर जिवाना गांव की सुधा रानी के परिवार की हालत बहुत दयनीय है। सुधा के पति मेहनत-मजदूरी करते है। कठिन परिश्रम के बाद भी परिवार का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। सुमन ने पति के साथ कंधे से कंधा मिलकर कुछ दिन मजदूरी की। अब सुधा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर एलईडी बल्ब बनाकर परिवार का गुजारा कर रही है। उनका मानना है कि सही दिशा में किया गया प्रयास कभी बेकार नहीं जाता।
विज्ञापन
खुद बनीं आत्मनिर्भर, दूसरों को भी कर रही प्रेरित
बिजरौल गांव की आशा व समिता भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर परिवार का खर्च चला रही है। दोनों कपड़े के बैग बनाती है और क्षेत्र में सप्लाई करती है। इससे वे खुद को आत्मनिर्भर बनी, अन्य अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक कर रही है। बीडीओ राहुल वर्मा और ब्लाक मिशन मैनेजर मनोज कुमार का कहना है कि ये सभी महिलाएं अन्य महिलाओं के लिए प्ररेणा स्त्रोत बनी हुई है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। ग्रामीण परिवेश में पैदा हुई महिलाओं का जज्बा भी कुछ कम नहीं। अब वे परिवार और सामाजिक जिम्मेदारी का खूब ख्याल रखती हैं। कुछ ऐसी महिलाएं भी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनी। पेश है जिले की ऐसी महिलाओं पर आधारित रिपोर्ट...
पति के देहांत के बाद परिवार को संभाला
खड़खड़ी गांव की सुमन के पिता का कई साल पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। विपरीत स्थिति में भी सुमन ने हार नहीं मानी। अब सुमन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांव मेें अचार बनाने का काम करती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री व अन्य जनप्रतिनिधि भी सुमन के बनाए गए अचार की सराहना कर चुके है। सुमन का कहना है कि वह घर का काम निपटाने के बाद दिन में 4-5 घंटे अचार बनाने का काम करती है। मेहनत के दम पर हर माह ठीक-ठाक आमदनी कर लेती हैं।
विज्ञापन
पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उठा रही जिम्मेदारी
हसनपुर जिवाना गांव की सुधा रानी के परिवार की हालत बहुत दयनीय है। सुधा के पति मेहनत-मजदूरी करते है। कठिन परिश्रम के बाद भी परिवार का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। सुमन ने पति के साथ कंधे से कंधा मिलकर कुछ दिन मजदूरी की। अब सुधा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर एलईडी बल्ब बनाकर परिवार का गुजारा कर रही है। उनका मानना है कि सही दिशा में किया गया प्रयास कभी बेकार नहीं जाता।
विज्ञापन
खुद बनीं आत्मनिर्भर, दूसरों को भी कर रही प्रेरित
बिजरौल गांव की आशा व समिता भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर परिवार का खर्च चला रही है। दोनों कपड़े के बैग बनाती है और क्षेत्र में सप्लाई करती है। इससे वे खुद को आत्मनिर्भर बनी, अन्य अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक कर रही है। बीडीओ राहुल वर्मा और ब्लाक मिशन मैनेजर मनोज कुमार का कहना है कि ये सभी महिलाएं अन्य महिलाओं के लिए प्ररेणा स्त्रोत बनी हुई है।