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पुत्र वियोग मे दशरथ ने त्यागे प्राण, श्रीराम की खडाऊ लेकर अयोध्या लौट आए भरत
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बागपत में रामलीला मंचन करते कलाकार
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत। श्री रघुवर रामलीला समिति ठाकुरद्वारा मंदिर के तत्वावधान में जारी रामलीला में सुमंत विलाप, दशरथ मरण और राम-भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया गया। श्रीराम के वनवास चले जाने पर राजा दशरथ की मृत्यु हो जाती है। भरत माताओं को सेना के साथ भगवान श्रीराम को लेने वन पहुंचते हैं। उनसे अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। श्रीराम पिता के वचनों को पूरा करने के कारण अयोध्या लौटने से इनकार कर देते हैं।
भगवान श्रीराम सीता और लक्ष्मण के साथ सुमंत को सोते हुए छोड़कर चले जाते हैं। सुबह होने पर सुमंत श्रीराम, लक्ष्मण व सीता को न पाकर रोते बिलखते हुए जंगल में खोजते हैं। अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। भरत और शत्रुघ्न को उनके मामा के यहां अयोध्या में बुलाया जाता है। पूरी अयोध्या नगरी में सन्नाटा पसर जाता है। भरत माता कैकेयी के पास पहुंचते हैं और पिता राजा दशरथ के बारे में पूछते हैं। वह श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास की जानकारी पाकर क्रोधित हो जाते हैं। वह श्रीराम के अयोध्या नहीं आने तक अयोध्या का जल भी ग्रहण नहीं करने की कसम खाते हैं।
इसके पश्चात भरत अपने राज दरबारियों और तीनों माताओं को साथ लेकर श्रीराम को खोजने के लिए वन जाते हैं। श्रीराम, लक्ष्मण व सीता से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। श्रीराम द्वारा इनकार करने पर भरत श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आते हैं। मंचन में संदीप गुप्ता, आशीष रोहिल्ला, काकू, नीरज बावरिया, चक्षु कश्यप, शिवम गुप्ता, नीरज शर्मा, कर्मवीर चौहान, सुजीत लखेरा, आशु वर्मा, सोनू शर्मा, इलू फौजदार, संजय रोहिल्ला, महेश चंद शर्मा, मोनू रोहतास गुप्ता, मोंटी चौहान, कमल वशिष्ठ, अमित अग्रवाल, रमेश वर्मा, सुरेश वर्मा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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राम-भरत मिलाप प्रसंग का मंचन देख भर आई आंखें
चांदीनगर। रटौल गांव स्थित शिव मंदिर में श्री आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में रविवार को राम-केवट संवाद और राम-भरत विलाप प्रसंग का मंचन किया गया। राम-भरत मिलाप प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
सुमंत भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण को रथ में बैठाकर गंगा के समीप पहुंचते हैं। जहां उनकी भेंट निषादराज से होती है। उधर, राजा दशरथ पुत्र वियोग में प्राण त्याग देते हैं। भरत वन पहुंचकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। श्रीराम पिता के वचनों को पूरा करने के लिए अयोध्या लौटने से इनकार कर देते हैं। भरत बडे़ भाई श्रीराम की खड़ाऊ सिर पर रखकर अयोध्या की ओर रवाना होते हैं। मंचन में देवेंद्र अरोरा, ब्रजलाल गांधी, महेंद्र शर्मा, शिवकुमार, अनुज, लीलू, मानसिंह, संजय अरोरा व पंडित कुश प्रसाद शास्त्री समेत काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
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भगवान श्रीराम सीता और लक्ष्मण के साथ सुमंत को सोते हुए छोड़कर चले जाते हैं। सुबह होने पर सुमंत श्रीराम, लक्ष्मण व सीता को न पाकर रोते बिलखते हुए जंगल में खोजते हैं। अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। भरत और शत्रुघ्न को उनके मामा के यहां अयोध्या में बुलाया जाता है। पूरी अयोध्या नगरी में सन्नाटा पसर जाता है। भरत माता कैकेयी के पास पहुंचते हैं और पिता राजा दशरथ के बारे में पूछते हैं। वह श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास की जानकारी पाकर क्रोधित हो जाते हैं। वह श्रीराम के अयोध्या नहीं आने तक अयोध्या का जल भी ग्रहण नहीं करने की कसम खाते हैं।
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इसके पश्चात भरत अपने राज दरबारियों और तीनों माताओं को साथ लेकर श्रीराम को खोजने के लिए वन जाते हैं। श्रीराम, लक्ष्मण व सीता से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। श्रीराम द्वारा इनकार करने पर भरत श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौट आते हैं। मंचन में संदीप गुप्ता, आशीष रोहिल्ला, काकू, नीरज बावरिया, चक्षु कश्यप, शिवम गुप्ता, नीरज शर्मा, कर्मवीर चौहान, सुजीत लखेरा, आशु वर्मा, सोनू शर्मा, इलू फौजदार, संजय रोहिल्ला, महेश चंद शर्मा, मोनू रोहतास गुप्ता, मोंटी चौहान, कमल वशिष्ठ, अमित अग्रवाल, रमेश वर्मा, सुरेश वर्मा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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राम-भरत मिलाप प्रसंग का मंचन देख भर आई आंखें
चांदीनगर। रटौल गांव स्थित शिव मंदिर में श्री आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में रविवार को राम-केवट संवाद और राम-भरत विलाप प्रसंग का मंचन किया गया। राम-भरत मिलाप प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
सुमंत भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण को रथ में बैठाकर गंगा के समीप पहुंचते हैं। जहां उनकी भेंट निषादराज से होती है। उधर, राजा दशरथ पुत्र वियोग में प्राण त्याग देते हैं। भरत वन पहुंचकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। श्रीराम पिता के वचनों को पूरा करने के लिए अयोध्या लौटने से इनकार कर देते हैं। भरत बडे़ भाई श्रीराम की खड़ाऊ सिर पर रखकर अयोध्या की ओर रवाना होते हैं। मंचन में देवेंद्र अरोरा, ब्रजलाल गांधी, महेंद्र शर्मा, शिवकुमार, अनुज, लीलू, मानसिंह, संजय अरोरा व पंडित कुश प्रसाद शास्त्री समेत काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।