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साइकिल की सवारी, पर्यावरण बचाने की अलख, निरपुड़ा की बहू की यही पहचान

Wed, 18 Nov 2020 10:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Nov 2020 10:57 PM IST
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Cycle ride, saving environment, same identity of Nirpura's daughter-in-law
साइकिल पर सवार होकर पर्यावरण बचाने की अलख जगा रही 60 वर्षीय कमलेश राणा
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कहना, साइकिल को अपनाना होगा, तभी प्रकृति को बचाया जा सकता है
साइकिलिंग के शौक ने कमलेश राणा को दिलाया बीमारियों से छुटकारा
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। प्रदूषित होते पर्यावरण को बचाने के लिए निरपुड़ा की बहू कमलेश राणा लोगों को फिर से साइकिल का सफर अपनाने के लिए जागरूक कर रही है। वह खुद रोजाना 15 से 20 किलोमीटर साइकिल चलाती हैं। साइकिलिंग के शौक ने उनकी पहचान बदल दी और बीमारियां से भी छुटकारा दिलाया। वह हरियाणा सरकार के नशामुक्ति अभियान का हिस्सा रहीं। साइकिल से रोहतक से निरपुड़ा पहुंची कमलेश ने बताया कि साइकिल को अपनाना होगा, तभी प्रकृति को बचाया जा सकता है। सफर के दौरान वह लोगों पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित करती हैं।
मुजफ्फरनगर की बेटी और निरपुड़ा की बहू
कमलेश राणा (62) मुजफ्फरनगर के सौरम गांव की बेटी है। उनकी शादी जिले के निरपुड़ा गांव के डॉ ओमवीर सिंह के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद डॉ ओमवीर सिंह हरियाणा के रोहतक के सेक्टर चार में शिफ्ट हो गए थे। वह रोहतक के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर थे, लेकिन हार्ट अटैक से छह अगस्त 2017 को उनका निधन हो गया। हाईस्कूल पास कमलेश राणा ने परिवार को संभाला। बेटा रोनित राणा चीन की एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। बेटी पुष्पा राणा रोहतक के जाट कॉलेज में एलएलबी द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
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साइकिल पर सवार हुई तो चमक उठा नाम
कमलेश रोहतक में पति के साथ रह रही थी। इसी दौरान बचपन के साइकिल चलाने के शौक को उसने आगे बढ़ाने की ठानी। रोहतक में अभ्यास शुरू किया। इसके बाद साल 2005 में भिवानी की साइकिल रेस में प्रथम, बंगलुरु में 2006 में पांच किमी साइकिल रेस और 800 मीटर रेस में प्रथम रहीं। साल 2007 में रोहतक में हुई 1500 मीटर रेस में द्वितीय रही। मलेशिया में 2010 में संपन्न हुई महिला साइकिल रेस में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा 2016-2017 में पंजाब में एक महीने के लिए आयोजित हुई साइकिल रेस में 3600 किलोमीटर साइकिल चलाकर कमलेश राणा ने स्वर्ण पदक जीता। दो साल पहले हरियाणा सरकार के नशामुक्त अभियान के अंतर्गत कमलेश राणा ने 100 किलोमीटर साइकिल चलाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
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फिट रहने के लिए रोजाना चलाएं 20 से 25 किलोमीटर साइकिल
फिट रहने के लिए कमलेश राणा रोजाना साइकिल से तकरीबन 20 से 25 किमी का सफर तय करती है। वह बताती है कि फिट रहने के लिए साइकिल का इस्तेमाल जरूरी है।
साइकिल चलाने से साइटिका हो गई दूर
कमलेश राणा साइटिका बीमारी से लंबे समय से परेशान थी, 2003 में आपरेशन होने के बाद भी छह माह तक उनके पैर में दर्द था। वह बताती हैं कि बीमारी के चलते उनका काम प्रभावित हो रहा था। इलाज कराने के लिए कई अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन ठीक नहीं हुआ। दवाई चलती रही। इसके अलावा शुगर, कॉलेस्ट्रॉल, बीपी की समस्या थी। साइकिल चलाने शुरू किया तो साइटिका व अन्य बीमारियां कब दूर हो गई, पता ही नहीं चला।
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