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Baghpat News: पैर दबाने से लेकर छाले पड़ने पर दवाई लगाकर करते हैं कांवड़ियों की मरहम पट्टी
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बागपत। कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे किनारे बड़ौत से गौरीपुर तक कांवड़ियों की सेवा के लिए कई शिविर लगाए जाते हैं। इनमें ट्योढ़ी व गौरीपुर में लगने वाले शिविर कुछ अलग होते हैं। इनमें हिंदू मुस्लिम सभी कांवड़ियों की सेवा करते हुए दिखाई देते हैं।
वह भी कोई एक-दो नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार कांवड़ियों की सेवा के लिए पहुंच जाता है। वे कांवड़ियों को पानी, जूस पिलाते हैं तो खाना भी खिलाते हैं। थकान होने पर उनके पैर भी दबाते हैं और पैर में छाले पड़ने पर दवाई लगाकर पट्टी बांधते हैं। इनके अलावा भी कोई काम होता है तो उसको करने के लिए आगे रहते हैं।कांवडि़ए आने लगे तो दोनों शिविर लगाने की तैयारी भी होने लगी है।
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मैं पिछले 23 साल से शिवभक्तों व कावडिय़ों की सेवा कर रहा हूं। शिविर लगता है तो यहां दवाई लेकर आता हूं। कांवडिय़ों के पैरों में दवाई लगाता हूं तो उनके पैर दबाता भी हूं। अब गौरीपुर में शिविर लगना शुरू हो गया है, मगर मेरी सेवा पहले ही शुरू हो गई।
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-बाबू खान, कोर्ट रोड बागपत
गौरीपुर में हम सभी मिलकर शिविर लगवाते हैं और उसमें सभी मिलकर कावडिय़ों की सेवा करते हैं। बागपत के कई मुस्लिम समाज के लोग भी सेवा करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें एक की ड्यूटी कांवडिय़ों को समस्या होने पर दवाई लगाने व पट्टी करने पर होती है तो कोई पानी पिलाता है और कोई खाना खिलाता है।
-अंशुधर भारद्वाज, बागपत
हमारे गांव ट्योढ़ी में पिछले 26 वर्षों से हिंदू व मुस्लिम मिलकर कांवडिय़ों की सेवा करते हैं। शिविर में जाकर जिस तरह की सेवा का मौका मिलता है, वही की जाती है। कांवडिय़ों की कांवड़ भी उठाते हैं। शिविर लगाना फिर से शुरू कर दिया है और इस बार भी कांवडिय़ों की सेवा की जाएगी। -नजीर अहमद, ट्योढ़ी
ट्योढ़ी में लगने वाले शिविर में हिंदू-मुस्लिम मिलकर कावडिय़ों की सेवा करते हैं। सभी के सहयोग से शिविर लगता है। इस बार भी शिविर लगाकर सभी मिलकर सेवा करेंगे।
-सचिन शर्मा, प्रधान ट्योढ़ी
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वह भी कोई एक-दो नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार कांवड़ियों की सेवा के लिए पहुंच जाता है। वे कांवड़ियों को पानी, जूस पिलाते हैं तो खाना भी खिलाते हैं। थकान होने पर उनके पैर भी दबाते हैं और पैर में छाले पड़ने पर दवाई लगाकर पट्टी बांधते हैं। इनके अलावा भी कोई काम होता है तो उसको करने के लिए आगे रहते हैं।कांवडि़ए आने लगे तो दोनों शिविर लगाने की तैयारी भी होने लगी है।
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मैं पिछले 23 साल से शिवभक्तों व कावडिय़ों की सेवा कर रहा हूं। शिविर लगता है तो यहां दवाई लेकर आता हूं। कांवडिय़ों के पैरों में दवाई लगाता हूं तो उनके पैर दबाता भी हूं। अब गौरीपुर में शिविर लगना शुरू हो गया है, मगर मेरी सेवा पहले ही शुरू हो गई।
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-बाबू खान, कोर्ट रोड बागपत
गौरीपुर में हम सभी मिलकर शिविर लगवाते हैं और उसमें सभी मिलकर कावडिय़ों की सेवा करते हैं। बागपत के कई मुस्लिम समाज के लोग भी सेवा करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें एक की ड्यूटी कांवडिय़ों को समस्या होने पर दवाई लगाने व पट्टी करने पर होती है तो कोई पानी पिलाता है और कोई खाना खिलाता है।
-अंशुधर भारद्वाज, बागपत
हमारे गांव ट्योढ़ी में पिछले 26 वर्षों से हिंदू व मुस्लिम मिलकर कांवडिय़ों की सेवा करते हैं। शिविर में जाकर जिस तरह की सेवा का मौका मिलता है, वही की जाती है। कांवडिय़ों की कांवड़ भी उठाते हैं। शिविर लगाना फिर से शुरू कर दिया है और इस बार भी कांवडिय़ों की सेवा की जाएगी। -नजीर अहमद, ट्योढ़ी
ट्योढ़ी में लगने वाले शिविर में हिंदू-मुस्लिम मिलकर कावडिय़ों की सेवा करते हैं। सभी के सहयोग से शिविर लगता है। इस बार भी शिविर लगाकर सभी मिलकर सेवा करेंगे।
-सचिन शर्मा, प्रधान ट्योढ़ी