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ये बागपत के गांव गांगनौली का जंगल है या चंबल की घाटी
बागपत/ ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Wed, 12 Oct 2016 04:01 PM IST
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बागपत। गांव गांगनौली... एक दशक पहले तक गुमनाम सा गांव। कृष्णा नदी के किनारे खेती कर गुजर-बसर करने वाले लोग, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट बदली कि लोग इसे चंबल की घाटी जैसा बताने लगे हैं।
जंगल बीहड़ जैसा। प्रमोद राठी अपने गैंग के साथ हर वारदात के बाद यहीं छिपता रहा था। कभी पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकी। खून-खराबे में फिर से पांच लोग मारे गए। राठी गैंग का नया सरदार है प्रवीण। अब हालात ऐसे हैं कि किसान खेत में जाते सहमे रहते हैं। दरवाजे भी जरूरत पड़ने पर ही खुलते हैं।
यहां लोगों ने खामोशी ओढ़ ली है। कुछ बुजुर्ग हिम्मत कर कहते हैं हमारे गांव की पहचान ही बदल गई है। कभी लोगों को यहां का पता टीकरी और दोघट के पास पड़ने वाला गांव बताते थे, लेकिन अब तो बस नाम ही काफी है। एक तरफ बड़ौत - मुजफ्फरनगर मार्ग से पुसार गांव होते साढे़ छह किमी अंदर और दूसरी तरफ दिल्ली-कासिमपुर खेड़ी होते हुए सात किमी की दूरी। खून-खराबा थमा नहीं, जान का खतरा बरकरार है।
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राजेंद्र बोला, ऐसे कैसे होगी सुरक्षा? ः प्रमोद राठी गैंग से राजेंद्र के परिवार की रंजिश है। वारदात के बाद यहां भी सुरक्षा बढ़ा दी, लेकिन राजेंद्र कहता है कि उन्हें जान का खतरा है। बार-बार वह अधिकारियों को अपनी फरियाद सुना रहा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। इलाके में बदमाश घूम रहे हैं, इसकी सूचना पुलिस अधिकारियों को दी। वक्त पर काम नहीं किया और ये वारदात हो गई।
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जंगल बीहड़ जैसा। प्रमोद राठी अपने गैंग के साथ हर वारदात के बाद यहीं छिपता रहा था। कभी पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकी। खून-खराबे में फिर से पांच लोग मारे गए। राठी गैंग का नया सरदार है प्रवीण। अब हालात ऐसे हैं कि किसान खेत में जाते सहमे रहते हैं। दरवाजे भी जरूरत पड़ने पर ही खुलते हैं।
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यहां लोगों ने खामोशी ओढ़ ली है। कुछ बुजुर्ग हिम्मत कर कहते हैं हमारे गांव की पहचान ही बदल गई है। कभी लोगों को यहां का पता टीकरी और दोघट के पास पड़ने वाला गांव बताते थे, लेकिन अब तो बस नाम ही काफी है। एक तरफ बड़ौत - मुजफ्फरनगर मार्ग से पुसार गांव होते साढे़ छह किमी अंदर और दूसरी तरफ दिल्ली-कासिमपुर खेड़ी होते हुए सात किमी की दूरी। खून-खराबा थमा नहीं, जान का खतरा बरकरार है।
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राजेंद्र बोला, ऐसे कैसे होगी सुरक्षा? ः प्रमोद राठी गैंग से राजेंद्र के परिवार की रंजिश है। वारदात के बाद यहां भी सुरक्षा बढ़ा दी, लेकिन राजेंद्र कहता है कि उन्हें जान का खतरा है। बार-बार वह अधिकारियों को अपनी फरियाद सुना रहा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। इलाके में बदमाश घूम रहे हैं, इसकी सूचना पुलिस अधिकारियों को दी। वक्त पर काम नहीं किया और ये वारदात हो गई।