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विवादित जमीन पर तनातनी
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 06 Nov 2015 12:17 AM IST
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बागपत के पुराना कस्बे में शेख बाहुद्दीन की मजार के पास कब्रिस्तान और एसपीआरसी डिग्री कॉलेज की विवादित जमीन की पैमाईश करने गई पुलिस-प्रशासन की टीम के सामने दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। इस दौरान उनकी आपस में नोकझोंक हुई। बाद में कड़ी सुरक्षा में एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी में जमीन की पैमाईश हुई।
एसडीएम राकेश कुमार, तहसीलदार अशोक कुमार चौधरी, लेखपालों और पुलिस-पीएसी के साथ जमीन की पैमाईश करने के लिए पहुंचे। पैमाईश के दौरान दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। उनकी आपस में काफी कहासुनी हुई। एसडीएम ने उन्हें किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया।
पैमाईश के दौरान कॉलेज प्रबंधक नीरज चौहान, सत्यपाल प्रधान, श्रीनिवास चौहान, प्रकाश राणा, योगेंद्र उर्फ डब्बू चौहान, हाफी इरफान पठान, मजीद, समंदी, हाजी यूसुफ, हाजी नबाव, पप्पू आदि मौजूद रहे। कॉलेज की प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष मास्टर रघुवीर सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 1993-1994 में एलएमसी की साढ़े छह बीघा जमीन कालेज को दी गई थी, तभी से जमीन खाली पड़ी हुई है।
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इस जमीन को जवाहरपुर मेवला गांव के किसान और पुराना कस्बा के विशेष समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि में मिला लिया है। एक माह पूर्व विशेष समुदाय के लोग जमीन की चहारदीवारी कर रहे थे। पता चलने पर उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया था। डीएम से जमीन की पैमाईश कराने की मांग की थी।
जवाहरपुर मेवला का किसान पैमाइश कराने और खेत में गई जमीन को देने के लिए तैयार था। उधर, सल्लू ने कहा कि कब्रिस्तान का 92 बीघा का रकबा है। इसमें कालेज की एक फुट भी जमीन नहीं है। यहां पर वर्ष 1986 में चकबंदी हुई थी। सरकारी रिकार्ड में कॉलेज की जमीन वर्ष 2009 में दर्ज हुई है।
एसडीएम राकेश कुमार ने कहा कि कॉलेज और कब्रिस्तान की भूमि की पैमाईश शांतिपूर्ण तरीके से हो गई है। जमीन की निशानदेही कराकर खंभे लगवा दिए गए हैं।
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एसडीएम राकेश कुमार, तहसीलदार अशोक कुमार चौधरी, लेखपालों और पुलिस-पीएसी के साथ जमीन की पैमाईश करने के लिए पहुंचे। पैमाईश के दौरान दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। उनकी आपस में काफी कहासुनी हुई। एसडीएम ने उन्हें किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया।
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पैमाईश के दौरान कॉलेज प्रबंधक नीरज चौहान, सत्यपाल प्रधान, श्रीनिवास चौहान, प्रकाश राणा, योगेंद्र उर्फ डब्बू चौहान, हाफी इरफान पठान, मजीद, समंदी, हाजी यूसुफ, हाजी नबाव, पप्पू आदि मौजूद रहे। कॉलेज की प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष मास्टर रघुवीर सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 1993-1994 में एलएमसी की साढ़े छह बीघा जमीन कालेज को दी गई थी, तभी से जमीन खाली पड़ी हुई है।
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इस जमीन को जवाहरपुर मेवला गांव के किसान और पुराना कस्बा के विशेष समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि में मिला लिया है। एक माह पूर्व विशेष समुदाय के लोग जमीन की चहारदीवारी कर रहे थे। पता चलने पर उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया था। डीएम से जमीन की पैमाईश कराने की मांग की थी।
जवाहरपुर मेवला का किसान पैमाइश कराने और खेत में गई जमीन को देने के लिए तैयार था। उधर, सल्लू ने कहा कि कब्रिस्तान का 92 बीघा का रकबा है। इसमें कालेज की एक फुट भी जमीन नहीं है। यहां पर वर्ष 1986 में चकबंदी हुई थी। सरकारी रिकार्ड में कॉलेज की जमीन वर्ष 2009 में दर्ज हुई है।
एसडीएम राकेश कुमार ने कहा कि कॉलेज और कब्रिस्तान की भूमि की पैमाईश शांतिपूर्ण तरीके से हो गई है। जमीन की निशानदेही कराकर खंभे लगवा दिए गए हैं।