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हत्यारोपी मिंटू, अजेंद्र को क्लीनचिट
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Wed, 10 Feb 2016 12:43 AM IST
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आरएसएस के जिला सहकार्यवाह एवं प्रॉपर्टी डीलर हितेंद्र चौहान की हत्या के मामले में कोतवाली पुलिस ने आखिरकार दो आरोपियों को क्लीनचिट दे ही दी। पुलिस ने सीबीसीआईडी की विवेचना को ही सही माना है। सीबीसीआईडी इन आरोपियों को पहले ही केस का नाम निकाल चुकी थी।
बागपत के चौहनान मोहल्ला निवासी हितेंद्र चौहान की 17 जनवरी 2014 को पुराना कस्बा के सुभाष गेट के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतक के पिता लख्मीचंद ने सिसाना गांव के महिपाल उर्फ घोटी, प्रदीप उर्फ पप्पू, काठा निवासी छोटेलाल शर्मा, मेरठ के टेहरकी निवासी अजेंद्र उर्फ मोधू और एक अज्ञात पर प्रॉपर्टी विवाद में हितेंद्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
घटना के दो दिन बाद ही मृतक के परिजनों ने पांचवें अज्ञात आरोपी का नाम यशवीर उर्फ मिंटू बता दिया था। कोतवाली पुलिस ने यशवीर का नाम केस में शामिल कर लिया था। कोतवाली पुलिस ने आरोपी प्रदीप और महिपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इनके अलावा आरोपी छोटेलाल शर्मा के मकान की कुर्की कर दी थी।
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अन्य दो आरोपियों के मकानों की कुर्की नहीं हो पाई थी। जबकि कोर्ट से कुर्की के आदेश हो चुके थे। इसी दौरान आरोपियों की शिकायत पर केस की विवेचना सीबीसीआईडी मेरठ ट्रांसफर हो गई थी। सीबीसीआईडी ने जांच के आधार पर आरोपी यशवीर उर्फ मिंटू और अजेंद्र को क्लीनचिट दे दी थी।
अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ बागपत कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। मृतक के परिजन इसके खिलाफ हाईकोर्ट गए थे। उन्होंने केस की विवेचना बागपत कोतवाली पुलिस से कराने की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर बागपत पुलिस ने केस की विवेचना शुरू कर दी थी।
पुलिस को आरोपी मिंटू और अजेंद्र के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले। इसी के चलते पुलिस ने दोनों आरोपियों को क्लीनचिट दे दी है। जबकि दोनों आरोपियों को सीबीसीआईडी पहले ही क्लीनचिट दे चुकी है।
कोतवाली प्रभारी रनवीर सिंह यादव का कहना है कि विवेचना के दौरान आरोपी मिंटू और अजेंद्र की भूमिका हितेंद्र की हत्या में नहीं पाई गई है। सीबीसीआईडी की विवेचना को सही मानते हुए दस्तावेज कोर्ट में दाखिल कर दिए गए है।
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बागपत के चौहनान मोहल्ला निवासी हितेंद्र चौहान की 17 जनवरी 2014 को पुराना कस्बा के सुभाष गेट के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतक के पिता लख्मीचंद ने सिसाना गांव के महिपाल उर्फ घोटी, प्रदीप उर्फ पप्पू, काठा निवासी छोटेलाल शर्मा, मेरठ के टेहरकी निवासी अजेंद्र उर्फ मोधू और एक अज्ञात पर प्रॉपर्टी विवाद में हितेंद्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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घटना के दो दिन बाद ही मृतक के परिजनों ने पांचवें अज्ञात आरोपी का नाम यशवीर उर्फ मिंटू बता दिया था। कोतवाली पुलिस ने यशवीर का नाम केस में शामिल कर लिया था। कोतवाली पुलिस ने आरोपी प्रदीप और महिपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इनके अलावा आरोपी छोटेलाल शर्मा के मकान की कुर्की कर दी थी।
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अन्य दो आरोपियों के मकानों की कुर्की नहीं हो पाई थी। जबकि कोर्ट से कुर्की के आदेश हो चुके थे। इसी दौरान आरोपियों की शिकायत पर केस की विवेचना सीबीसीआईडी मेरठ ट्रांसफर हो गई थी। सीबीसीआईडी ने जांच के आधार पर आरोपी यशवीर उर्फ मिंटू और अजेंद्र को क्लीनचिट दे दी थी।
अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ बागपत कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। मृतक के परिजन इसके खिलाफ हाईकोर्ट गए थे। उन्होंने केस की विवेचना बागपत कोतवाली पुलिस से कराने की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर बागपत पुलिस ने केस की विवेचना शुरू कर दी थी।
पुलिस को आरोपी मिंटू और अजेंद्र के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले। इसी के चलते पुलिस ने दोनों आरोपियों को क्लीनचिट दे दी है। जबकि दोनों आरोपियों को सीबीसीआईडी पहले ही क्लीनचिट दे चुकी है।
कोतवाली प्रभारी रनवीर सिंह यादव का कहना है कि विवेचना के दौरान आरोपी मिंटू और अजेंद्र की भूमिका हितेंद्र की हत्या में नहीं पाई गई है। सीबीसीआईडी की विवेचना को सही मानते हुए दस्तावेज कोर्ट में दाखिल कर दिए गए है।