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बजरंगी को ले जाना था पुलिस लाइन, ले गए बागपत जेल
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:24 AM IST
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बागपत। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को आखिर किस की अनुमति से बागपत जेल ले जाया गया। जबकि उसे या तो पुलिस लाइन या फिर संबंधित थाने में ले जाने का प्लान था। पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर यह बड़ा सवाल है।
डॉन मुन्ना बजरंगी के अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि वारदात के लिए बागपत जेल को इसलिए चुना गया कि न तो यहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे है और न ही जैमर। बागपत जेल में बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के उसे दाखिल कराया। जबकि उसे पुलिस लाइन लेकर आना था। झांसी जेल से रविवार की सुबह साढ़े आठ बजे लेकर चले और रात नौ बजे बागपत जेल लेकर पहुंचे। पुलिस को अगर उसे सीधे कोर्ट में पेश करना था तो उन्हें रविवार को शाम को पुलिस लाइन लेकर चलना था। सोमवार की सुबह सीधे कोर्ट लेकर पहुंचते। जेल में ले जाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। इससे साफ हो गया है कि उसकी हत्या योजना बनाकर की गई है। इसमें सरकार के कई बड़े नेताओं का भी हाथ है।
बीमार को क्यों लेकर आए पेशी पर
बागपत। अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि मुन्ना बजरंगी ने झांसी जेल से बागपत में अर्जी दाखिल की थी कि वह पेशी पर नहीं आ सकता, क्योंकि वह बीमार है। उसका वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी बयान दर्ज कराए जा सकते थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बागपत ने भी स्वस्थ होने पर पेश करने को कहा था, लेकिन उसे जबरन बागपत लाया गया। पत्नी ने भी कुछ दिन पहले ही मुन्ना बजरंगी की हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी।
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सीएमओ रही मौजूद, तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
बागपत। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के शव का पोस्टमार्टम सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा की देखरेख में डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. सत्यप्रकाश और डॉ. अशोक लाठियान के पैनल ने किया। बॉडी का एक्स-रे कराया तो शरीर में सिर्फ एक गोली फंसी हुई मिली। इसके अलावा शरीर में कई गोली नहीं मिली।
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डॉन मुन्ना बजरंगी के अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि वारदात के लिए बागपत जेल को इसलिए चुना गया कि न तो यहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे है और न ही जैमर। बागपत जेल में बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के उसे दाखिल कराया। जबकि उसे पुलिस लाइन लेकर आना था। झांसी जेल से रविवार की सुबह साढ़े आठ बजे लेकर चले और रात नौ बजे बागपत जेल लेकर पहुंचे। पुलिस को अगर उसे सीधे कोर्ट में पेश करना था तो उन्हें रविवार को शाम को पुलिस लाइन लेकर चलना था। सोमवार की सुबह सीधे कोर्ट लेकर पहुंचते। जेल में ले जाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। इससे साफ हो गया है कि उसकी हत्या योजना बनाकर की गई है। इसमें सरकार के कई बड़े नेताओं का भी हाथ है।
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बीमार को क्यों लेकर आए पेशी पर
बागपत। अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि मुन्ना बजरंगी ने झांसी जेल से बागपत में अर्जी दाखिल की थी कि वह पेशी पर नहीं आ सकता, क्योंकि वह बीमार है। उसका वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी बयान दर्ज कराए जा सकते थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बागपत ने भी स्वस्थ होने पर पेश करने को कहा था, लेकिन उसे जबरन बागपत लाया गया। पत्नी ने भी कुछ दिन पहले ही मुन्ना बजरंगी की हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी।
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सीएमओ रही मौजूद, तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
बागपत। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के शव का पोस्टमार्टम सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा की देखरेख में डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. सत्यप्रकाश और डॉ. अशोक लाठियान के पैनल ने किया। बॉडी का एक्स-रे कराया तो शरीर में सिर्फ एक गोली फंसी हुई मिली। इसके अलावा शरीर में कई गोली नहीं मिली।