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सचिवालय तक पहुंच बनाकर शिक्षामित्र ने किया करोड़ों का खेल
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बागपत। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) की परीक्षा में उत्तीर्ण कराने के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल किया गया। अभ्यर्थियों से वायदा किया कि उत्तर पुस्तिकाएं बदलकर उन्हें उत्तीर्ण करा दिया जाएगा। फतेहपुर के शिक्षामित्र बालकृष्ण मिश्रा ने गिरोह में कानपुर, मेरठ, बागपत और सोनीपत के सदस्य शामिल किए। शिक्षामित्र की पहुंच लखनऊ में सचिवालय तक है। एसटीएफ इसकी छानबीन करने में जुटी हुई है।
एसटीएफ के सीओ बृजेश सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी बालकृष्ण मिश्रा ही हैं। अब तक 11 सदस्य चिन्हित किए हैं, इनमें दो सॉल्वर हैं। बालकृष्ण की तलाश में दबिश दी जा रही है। असल में गिरोह के बाकी सदस्यों का काम नौकरी की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के कागज, चेक या नगदी को बालकृष्ण तक पहुंचाने की है। इसके बाद सचिवालय में पहुंच का दावा करने वाले शिक्षामित्र का खेल शुरू होता है। दावा किया गया कि उत्तर पुस्तिकाएं बदलकर उत्तीर्ण कराया जाएगा। इसकी कीमत करीब 12 लाख रुपये तय की । अकेले बागपत से ही करीब 70 अभ्यर्थी गिरोह के संपर्क में हैं। आठ प्रवेशपत्र मिलने से आशंका है कि अभी तक आठ अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कराने का ठेका दिया।
परीक्षा के बाद सक्रिय हुआ गैंग
बागपत। इसी माह की 23 दिसंबर को आगरा में वीडीओ की परीक्षा हुई। परीक्षा में अच्छा स्कोर नहीं कर पाने वाले अभ्यर्थियों की नब्ज टटोलकर उनसे ठेेके लेने के लिए गिरोह सक्रिय हो गया। इसमें आम लोगों के बीच के सदस्यों को ही शामिल किया । बालकृष्ण ने मेरठ, बागपत, सोनीपत, कानपुर के युवकों को गैंग में शामिल कर ठेके दिए , इनकी प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन इसी बीच एसटीएफ ने छापा मारकर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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दिल्ली में बैठकर युवाओं से ऐंठते थे रुपये
बड़ौत। नौकरी के नाम पर युवकों से रुपये ऐंठने वाले गिरोह का सरगना फतेहपुर का बाल कृष्ण मिश्रा और जितेंद्र कानपुर है, जिन्होंने अपना नेटवर्क पूरे उत्तर प्रदेश में फैलाया हुआ है। हर क्षेत्र के लिए अलग टीम बनाई गई । पकड़े गए युवक भी इस गिरोह के सदस्य है, जो युवकों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते हैं और स्वयं भी कमीशन लेते हैं।
पहले भी पकडे़ जा चुके हैं कई माफिया
बड़ौत। जेवी इंटर कॉलेज में गत कई माह पूर्व ही टीईटी और लेखपाल परीक्षा के दौरान भी कई माफिया दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े। पकड़े गए माफिया ने बताया कि उन्होंने परीक्षा में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पांच से छह लाख रुपये तक वसूले। इसमें हरियाणा के एक शिक्षा माफिया का भी नाम प्रकाश मेें आया।
अरविंद राणा से तलाशा जा रहा गिरोह का लिंक
बड़ौत। मूल रूप से शामली के रहने वाले और बड़ौत में रह कर कभी कोचिंग सेंटर चलाने वाले अरविंद राणा से भी वीडीओ की भर्ती का ठेका लेने वाले गिरोह का लिंक तलाशा जा रहा है। कई राज्य की भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा में अरविंद राणा का नाम सामने आ चुका है। कुछ माह पूर्व अरविंद राणा ने बिजरौल रोड पर कोचिंग सेंटर भी खोला, लेकिन जब कई माफिया पकडे़ गए तो वह सेंटर बंद कर गायब हो गया।
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एसटीएफ के सीओ बृजेश सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी बालकृष्ण मिश्रा ही हैं। अब तक 11 सदस्य चिन्हित किए हैं, इनमें दो सॉल्वर हैं। बालकृष्ण की तलाश में दबिश दी जा रही है। असल में गिरोह के बाकी सदस्यों का काम नौकरी की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के कागज, चेक या नगदी को बालकृष्ण तक पहुंचाने की है। इसके बाद सचिवालय में पहुंच का दावा करने वाले शिक्षामित्र का खेल शुरू होता है। दावा किया गया कि उत्तर पुस्तिकाएं बदलकर उत्तीर्ण कराया जाएगा। इसकी कीमत करीब 12 लाख रुपये तय की । अकेले बागपत से ही करीब 70 अभ्यर्थी गिरोह के संपर्क में हैं। आठ प्रवेशपत्र मिलने से आशंका है कि अभी तक आठ अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कराने का ठेका दिया।
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परीक्षा के बाद सक्रिय हुआ गैंग
बागपत। इसी माह की 23 दिसंबर को आगरा में वीडीओ की परीक्षा हुई। परीक्षा में अच्छा स्कोर नहीं कर पाने वाले अभ्यर्थियों की नब्ज टटोलकर उनसे ठेेके लेने के लिए गिरोह सक्रिय हो गया। इसमें आम लोगों के बीच के सदस्यों को ही शामिल किया । बालकृष्ण ने मेरठ, बागपत, सोनीपत, कानपुर के युवकों को गैंग में शामिल कर ठेके दिए , इनकी प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन इसी बीच एसटीएफ ने छापा मारकर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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दिल्ली में बैठकर युवाओं से ऐंठते थे रुपये
बड़ौत। नौकरी के नाम पर युवकों से रुपये ऐंठने वाले गिरोह का सरगना फतेहपुर का बाल कृष्ण मिश्रा और जितेंद्र कानपुर है, जिन्होंने अपना नेटवर्क पूरे उत्तर प्रदेश में फैलाया हुआ है। हर क्षेत्र के लिए अलग टीम बनाई गई । पकड़े गए युवक भी इस गिरोह के सदस्य है, जो युवकों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते हैं और स्वयं भी कमीशन लेते हैं।
पहले भी पकडे़ जा चुके हैं कई माफिया
बड़ौत। जेवी इंटर कॉलेज में गत कई माह पूर्व ही टीईटी और लेखपाल परीक्षा के दौरान भी कई माफिया दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े। पकड़े गए माफिया ने बताया कि उन्होंने परीक्षा में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पांच से छह लाख रुपये तक वसूले। इसमें हरियाणा के एक शिक्षा माफिया का भी नाम प्रकाश मेें आया।
अरविंद राणा से तलाशा जा रहा गिरोह का लिंक
बड़ौत। मूल रूप से शामली के रहने वाले और बड़ौत में रह कर कभी कोचिंग सेंटर चलाने वाले अरविंद राणा से भी वीडीओ की भर्ती का ठेका लेने वाले गिरोह का लिंक तलाशा जा रहा है। कई राज्य की भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा में अरविंद राणा का नाम सामने आ चुका है। कुछ माह पूर्व अरविंद राणा ने बिजरौल रोड पर कोचिंग सेंटर भी खोला, लेकिन जब कई माफिया पकडे़ गए तो वह सेंटर बंद कर गायब हो गया।