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काठा में यमुना के गड्ढे में एक ओर समा गई जान
Updated Sun, 01 Oct 2017 01:43 AM IST
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बागपत। काठा नाव हादसे को लोग अभी तक भूला भी नहीं पाए थे, शनिवार को उसी स्थान पर एक ओर जान चली गई। यमुना में बने गहरे गड्ढे में डूबने से पूर्व प्रधान के बेटे की मौत हो गई। घटना से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।
काठा गांव निवासी पूर्व प्रधान चौधरी सरदार सिंह के बेटे चौधरी नरेंद्र सिंह अपने पुत्र विपिन के साथ दशहरा के अवसर पर मूर्ति विसर्जित करने के लिए भैंसा-बुग्गी पर सवार होकर यमुना में गए थे। माता की मूर्ति विसर्जित करने के बाद नरेंद्र सिंह अपने भैंसें को यमुना में नहलाने लगे । इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और यमुना के गहरे गड्ढे में डूब गए। अपने पिता को डूबता देखकर विपिन ने शोर मचा दिया। मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए। इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस गोताखोरों को लेकर वहां पर पहुंच गई। गोताखोर इरफान, नौशाद और हुसन शरीफ ने बड़ी मशक्कत कर यमुना से नरेंद्र का शव निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। खेकड़ा एसडीएम अजय कुमार उपाध्याय ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। उनका कहना है कि नरेंद्र की पानी में डूबने से मौत हुई है। पीड़ित परिवार की नियमानुसार मद्द की जाएगी।
परिवार में मचा कोहराम
बागपत। नरेंद्र के दो बेटे नीरज और विपिन है। घटना से परिवार में कोहराम मचा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।
बेटे की यमुना में डूबने से हो चुकी है मौत
बागपत। ग्रामीणों का कहना है कि नरेंद्र के बेटे रवि की तीन साल पहले यमुना में डूबने से ही मौत हो गई थी। इस घटना से हर किसी की आंखें नम हो रही है।
हादसे के बाद भी प्रशासन
नहीं है जरा भी गंभीर
बागपत। काठा में नाव के यमुना में डूबने से 14 महिला और पांच पुरुषों की जान चली गई थी। इसको लेकर भारी बवाल हुआ । इसके बाद भी प्रशासन जरा भी गंभीर नहीं है। अभी तक प्रशासन ने घटनास्थल के पास सावधानी बोर्ड तक नहीं लगवाया है।
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प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में काफी रोष
बागपत। नाव हादसे के 16वें दिन दोबारा हादसा होने से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ रोष है। उनका कहना है कि प्रशासन ने न यमुना पर गोताखोर तैनात किया है और न ही अन्य सुविधा उपलब्ध कराई है। यदि वहां पर गोताखोर होता तो नरेंद्र की जान बच जाती।
कंधे पर उठाकर ले गए शव को परिजन
बागपत। यमुना से शव निकलने के बाद खुद ही परिजन उसको अपने कंधे पर उठाकर काफी दूर तक लेकर गए। अपनी ही गाड़ी से उसको पोस्टमार्टम के लेकर पहुंचे। प्रशासन ने कोई वाहन की व्यवस्था नहीं की।
यमुना में जारी है अवैध
खनन, प्रशासन बेखबर
बागपत। अवैध खनन होने के कारण ही यमुना में गहरे गड्ढे हैं। इसी में नाव के डूबने से 19 सवारियों की जान गई। इस कारण अब किसान की जान गई है। इतना कुछ होने के बाद भी यमुना का अवैध खनन जारी है। वहां पर गड्ढे बन रहे हैं। प्रशासन इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं है।
...पापा नहीं पकड़ पाए बांस,
आंखों के सामने चली गई जान
बागपत। पिता नरेंद्र को यमुना में डूबता देखकर विपिन ने शोर मचा दिया। उसने अपने पिता से कहा पापा जी जल्दी बांस पकड़ लो, जो यमुना में लगा हुआ है, लेकिन नरेंद्र उसको नहीं पकड़ पाए। विपिन की आंखों के सामने ही उसके पिता डूब गए।
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काठा गांव निवासी पूर्व प्रधान चौधरी सरदार सिंह के बेटे चौधरी नरेंद्र सिंह अपने पुत्र विपिन के साथ दशहरा के अवसर पर मूर्ति विसर्जित करने के लिए भैंसा-बुग्गी पर सवार होकर यमुना में गए थे। माता की मूर्ति विसर्जित करने के बाद नरेंद्र सिंह अपने भैंसें को यमुना में नहलाने लगे । इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और यमुना के गहरे गड्ढे में डूब गए। अपने पिता को डूबता देखकर विपिन ने शोर मचा दिया। मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए। इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस गोताखोरों को लेकर वहां पर पहुंच गई। गोताखोर इरफान, नौशाद और हुसन शरीफ ने बड़ी मशक्कत कर यमुना से नरेंद्र का शव निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। खेकड़ा एसडीएम अजय कुमार उपाध्याय ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। उनका कहना है कि नरेंद्र की पानी में डूबने से मौत हुई है। पीड़ित परिवार की नियमानुसार मद्द की जाएगी।
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परिवार में मचा कोहराम
बागपत। नरेंद्र के दो बेटे नीरज और विपिन है। घटना से परिवार में कोहराम मचा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है।
बेटे की यमुना में डूबने से हो चुकी है मौत
बागपत। ग्रामीणों का कहना है कि नरेंद्र के बेटे रवि की तीन साल पहले यमुना में डूबने से ही मौत हो गई थी। इस घटना से हर किसी की आंखें नम हो रही है।
हादसे के बाद भी प्रशासन
नहीं है जरा भी गंभीर
बागपत। काठा में नाव के यमुना में डूबने से 14 महिला और पांच पुरुषों की जान चली गई थी। इसको लेकर भारी बवाल हुआ । इसके बाद भी प्रशासन जरा भी गंभीर नहीं है। अभी तक प्रशासन ने घटनास्थल के पास सावधानी बोर्ड तक नहीं लगवाया है।
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प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में काफी रोष
बागपत। नाव हादसे के 16वें दिन दोबारा हादसा होने से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ रोष है। उनका कहना है कि प्रशासन ने न यमुना पर गोताखोर तैनात किया है और न ही अन्य सुविधा उपलब्ध कराई है। यदि वहां पर गोताखोर होता तो नरेंद्र की जान बच जाती।
कंधे पर उठाकर ले गए शव को परिजन
बागपत। यमुना से शव निकलने के बाद खुद ही परिजन उसको अपने कंधे पर उठाकर काफी दूर तक लेकर गए। अपनी ही गाड़ी से उसको पोस्टमार्टम के लेकर पहुंचे। प्रशासन ने कोई वाहन की व्यवस्था नहीं की।
यमुना में जारी है अवैध
खनन, प्रशासन बेखबर
बागपत। अवैध खनन होने के कारण ही यमुना में गहरे गड्ढे हैं। इसी में नाव के डूबने से 19 सवारियों की जान गई। इस कारण अब किसान की जान गई है। इतना कुछ होने के बाद भी यमुना का अवैध खनन जारी है। वहां पर गड्ढे बन रहे हैं। प्रशासन इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं है।
...पापा नहीं पकड़ पाए बांस,
आंखों के सामने चली गई जान
बागपत। पिता नरेंद्र को यमुना में डूबता देखकर विपिन ने शोर मचा दिया। उसने अपने पिता से कहा पापा जी जल्दी बांस पकड़ लो, जो यमुना में लगा हुआ है, लेकिन नरेंद्र उसको नहीं पकड़ पाए। विपिन की आंखों के सामने ही उसके पिता डूब गए।