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दांव पर बागपत के दिग्गजों की साख
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 11 Mar 2017 12:26 AM IST
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चुनाव नतीजे
- फोटो : SELF
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बागपत। जनता फैसला कर चुकी है। अब ईवीएम से नतीजे निकलेंगे। इसमें कई दिग्गजों की साख भी दांव पर लगी है। सबसे ज्यादा चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायक साहब सिंह, बड़ौत पालिकाध्यक्ष केपी मलिक, पूर्व जिपं अध्यक्ष योगेश धामा और पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद की प्रतिष्ठा का भी सवाल है।
विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार बेहद खास होने जा रहे हैं। बात छपरौली से शुरू करते हैं। यहां दांव पर रालोद के प्रत्याशी सहेंद्र सिंह रमाला की प्रतिष्ठा लगी है। असल में इस वीआईपी सीट पर रालोद ने कभी चुनाव नहीं हारा। ऐसे में सहेंद्र रमाला के चुनाव पर सबकी नजर है। बड़ौत विधानसभा में रालोद के उम्मीदवार पूर्व विधायक साहब सिंह, भाजपा प्रत्याशी एवं बड़ौत पालिकाध्यक्ष केपी मलिक, बसपा के वर्तमान विधायक लोकेश दीक्षित की साख भी दांव पर है। यहां की जीत हार से भविष्य की राजनीति भी तय होगी। बागपत विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद के बेटे अहमद हमीद ने बसपा से चुनाव लड़ा। इस सीट पर नवाब कोकब अहमद ने पांच बार चुनाव जीता है, ऐसे में खुद उनकी प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। रालोद से चुनाव लड़े पूर्व विधायक एवं मंत्री करतार सिंह भड़ाना के प्रदर्शन पर सबकी नजर है। यही नहीं भाजपा प्रत्याशी योगेश धामा पर भी सबकी निगाह है। जिला पंचायत की राजनीति में पिछले करीब डेढ़ दशक से अपराजेय रहे योगेश धामा ने पहली बार रालोद छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ा। ऐेसे में यह चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण है। जनता का फैसला जब ईवीएम से निकलेगा तो देखने वाली बात यह होगी कि इन दिग्गजों की साख का क्या होगा।
इन्हें भी देना होगा जवाब
नतीजे विधानसभा चुनाव लड़ने वाले कई प्रत्याशी और चुनाव लड़ाने वाले कई नेताओं की साख का भी सवाल है। भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह ने यहां तीनों प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी एवं सपा प्रत्याशी शोकेंद्र तोमर, मनोज चौधरी को भी रिपोर्ट कार्ड देना होगा। रालोद जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह ने बागपत सीट पर चुनाव लड़वाया, ऐसे में यहां के नतीजों पर भी हाईकमान उनसे जानकारी ले सकता है।
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विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार बेहद खास होने जा रहे हैं। बात छपरौली से शुरू करते हैं। यहां दांव पर रालोद के प्रत्याशी सहेंद्र सिंह रमाला की प्रतिष्ठा लगी है। असल में इस वीआईपी सीट पर रालोद ने कभी चुनाव नहीं हारा। ऐसे में सहेंद्र रमाला के चुनाव पर सबकी नजर है। बड़ौत विधानसभा में रालोद के उम्मीदवार पूर्व विधायक साहब सिंह, भाजपा प्रत्याशी एवं बड़ौत पालिकाध्यक्ष केपी मलिक, बसपा के वर्तमान विधायक लोकेश दीक्षित की साख भी दांव पर है। यहां की जीत हार से भविष्य की राजनीति भी तय होगी। बागपत विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद के बेटे अहमद हमीद ने बसपा से चुनाव लड़ा। इस सीट पर नवाब कोकब अहमद ने पांच बार चुनाव जीता है, ऐसे में खुद उनकी प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। रालोद से चुनाव लड़े पूर्व विधायक एवं मंत्री करतार सिंह भड़ाना के प्रदर्शन पर सबकी नजर है। यही नहीं भाजपा प्रत्याशी योगेश धामा पर भी सबकी निगाह है। जिला पंचायत की राजनीति में पिछले करीब डेढ़ दशक से अपराजेय रहे योगेश धामा ने पहली बार रालोद छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ा। ऐेसे में यह चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण है। जनता का फैसला जब ईवीएम से निकलेगा तो देखने वाली बात यह होगी कि इन दिग्गजों की साख का क्या होगा।
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इन्हें भी देना होगा जवाब
नतीजे विधानसभा चुनाव लड़ने वाले कई प्रत्याशी और चुनाव लड़ाने वाले कई नेताओं की साख का भी सवाल है। भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह ने यहां तीनों प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी एवं सपा प्रत्याशी शोकेंद्र तोमर, मनोज चौधरी को भी रिपोर्ट कार्ड देना होगा। रालोद जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह ने बागपत सीट पर चुनाव लड़वाया, ऐसे में यहां के नतीजों पर भी हाईकमान उनसे जानकारी ले सकता है।
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