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गूंगाखेड़ी के सामुदायिक शौचालय का विवाद बढ़ा
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बड़ौत। गूंगाखेड़ी गांव में सामुदायिक शौचालय को लेकर विवाद बढ़ गया है। गांव में संचालित स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और नवनिर्वाचित प्रधान आमने-सामने आ गए है। समूह की महिलाएं ग्राम प्रधान पर छह माह से सामुदायिक शौचालय की देखरेख करने का भुगतान न देने का आरोप लगा रही है। उधर, नवनिर्वाचित प्रधान का कहना है कि उन्हें शपथ लिए मात्र एक माह का समय बीता है, ऐसी स्थिति में बिना जांच पड़ताल भुगतान नहीं करूंगा। विवाद बढ़ने पर बीडीओ ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
वर्ष 2020 में गूंगाखेडी गांव मेें सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य पूरा हो गया था। ऑनलाइन प्रक्रिया न होने के कारण गांव में संचालित आरती समूह की महिलाओं से शपथ पत्र पर बांड भरवा लिया था। छह माह तक आरती समूह की महिलाओं ने सामुदायिक शौचालय की देखरेख की, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। भुगतान के लिए नवनिर्वाचित प्रधान से कहा जाता तो वे मना कर देते। आरोप है कि प्रधान गांव में संचालित एक अन्य समूह को शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपना चाहते है। महिलाओं ने बीडीओ राहुल वर्मा से शिकायत कर मानदेय दिलाने की मांग की है।
उनके कार्यकाल से पूर्व सामुदायिक शौचालय की जिम्मेदारी आरती समूह को सौंपी गई थी। मुझे शपथ लिए मात्र एक माह ही हुआ है। ऐसी स्थिति में बिना जांच-पड़ताल कैसे मानदेय का भुगतान कर दूं। जो महिला गांव में काम करेगी, उसी को ही सामुदायिक शौचालय की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। - भूपेंद्र, ग्राम प्रधान।
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यह सरकारी काम है। छह माह से जो समूह सामुदायिक शौचालय की देखरेख का रहा है, मानदेय मिलने का हक उन्हीं का है। शिकायत प्राप्त हुई है, जांच कर समाधान निकाला जाएगा। - राहुल वर्मा, बीडीओ।
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वर्ष 2020 में गूंगाखेडी गांव मेें सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य पूरा हो गया था। ऑनलाइन प्रक्रिया न होने के कारण गांव में संचालित आरती समूह की महिलाओं से शपथ पत्र पर बांड भरवा लिया था। छह माह तक आरती समूह की महिलाओं ने सामुदायिक शौचालय की देखरेख की, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। भुगतान के लिए नवनिर्वाचित प्रधान से कहा जाता तो वे मना कर देते। आरोप है कि प्रधान गांव में संचालित एक अन्य समूह को शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपना चाहते है। महिलाओं ने बीडीओ राहुल वर्मा से शिकायत कर मानदेय दिलाने की मांग की है।
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उनके कार्यकाल से पूर्व सामुदायिक शौचालय की जिम्मेदारी आरती समूह को सौंपी गई थी। मुझे शपथ लिए मात्र एक माह ही हुआ है। ऐसी स्थिति में बिना जांच-पड़ताल कैसे मानदेय का भुगतान कर दूं। जो महिला गांव में काम करेगी, उसी को ही सामुदायिक शौचालय की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। - भूपेंद्र, ग्राम प्रधान।
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यह सरकारी काम है। छह माह से जो समूह सामुदायिक शौचालय की देखरेख का रहा है, मानदेय मिलने का हक उन्हीं का है। शिकायत प्राप्त हुई है, जांच कर समाधान निकाला जाएगा। - राहुल वर्मा, बीडीओ।