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मन और इंद्रियों पर नियंत्रण ही सच्ची तपस्या : पंडित अंकित

Fri, 02 Oct 2026 02:05 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:05 AM IST
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Control over the mind and senses is the true penance: Pandit Ankit
-चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांति विधान में श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
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फोटो-एक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली। बरनावा के चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में बृहस्पतिवार को 41 दिवसीय शांति विधान के तहत पूजा-अर्चना की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान चंद्र प्रभु के चरणों में अर्घ्य समर्पित किए।

धर्मसभा में पंडित अंकित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक तपस्या इंद्रियों को विषयों से रोकने में है। मन की इच्छाओं पर नियंत्रण करना ही सच्चा तप है। शास्त्री ने स्पष्ट किया कि केवल कठिन शारीरिक क्रियाएं करना या पहाड़ों में साधना करना तप नहीं है। उनके अनुसार, मन में इच्छाएं और वासनाएं होने पर बाहरी तपस्या का उद्देश्य पूरा नहीं होता। उन्होंने जोर दिया कि सच्ची साधना वही है जिसमें व्यक्ति अपनी इंद्रियों और मन को वश में करना सीखे। यह 41 दिवसीय शांति विधान मंदिर में जारी रहेगा। विधान में दिनेश कुमार, संयम जैन, निशांत जैन, हेमचंद्र जैन, प्रवीण जैन, अनीता जैन, लक्ष्य जैन आदि उपस्थित रहे।
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