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जनपद की 60 ग्राम पंचायतों में नहीं गठित हुईं समितियां
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बड़ौत। शासन का गांवों में विकास कार्य कराने से पहले ग्राम पंचायतों में सक्रिय समितियों के गठन पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन पंचायत चुनाव के लगभग दो माह बाद भी जिले की 245 ग्राम पंचायतों में से लगभग 60 ग्राम पंचायतों में अभी तक समितियों का गठन नहीं हो सका है। उधर, समितियों का गठन नहीं होने से गांवों के विकास के लिए तैयार की जाने वाली कार्य योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।
ग्राम पंचायतों का विकास कार्य छह समितियों के माध्यम से ही आगे बढ़ता है। हर समिति के काम और अधिकार तय हैं, लेकिन मासिक बैठक नहीं होने, सदस्यों की निष्क्रियता तथा प्रधानों व पंचायत सचिवों की सदस्यों को नजरंदाज कर काम करने की कार्यप्रणाली से ये सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाती हैं। सरकार इस बार कार्यकाल के प्रारंभ से ही समितियों की भूमिका को प्रभावी बनाने की योजना पर काम कर रही है।
शासन का गांवों में विकास कार्य कराने से पहले ग्राम पंचायतों में सक्रिय समितियों के गठन का पूरा जोर है, लेकिन पंचायत चुनाव के लगभग दो माह बाद भी जिले की 245 ग्राम पंचायतों में से 60 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में अभी तक समितियों का गठन नहीं हो सका है। इस कारण इन ग्राम पंचायतों में लगभग पांच करोड़ रुपये से होने वाला विकास कार्य ठप पड़ा है। इसके पीछे गंवई सियासत को जिम्मेदार माना जा रहा है। ऐसे में समितियां गठित करने के लिए ग्राम प्रधान और सचिवों को पसीना बहाना पड़ रहा है।
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इस तरह होगा समितियों का गठन
ग्राम पंचायत का प्रधान नियोजन एवं विकास समिति, प्रशासनिक समिति तथा शिक्षा समिति का सभापति होगा। निर्माण कार्य समिति, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति तथा जल प्रबंधन समिति के सभापति का चुनाव ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा। सभी समितियों में सभापति के अलावा छह निर्वाचित सदस्य होंगे। इनमें एक महिला और एक अनुसूचित जाति/जनजाति और एक पिछड़े वर्ग का सदस्य होगा। समिति के सदस्यों का चुनाव ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा। समिति की बैठक के लिए चार सदस्यों का कोरम होगा। समिति की बैठक माह में कम से कम एक बार अवश्य होगी। समितियों का सचिव ग्राम पंचायत विकास अधिकारी होगा।
यह हैं ग्राम पंचायतों की छह प्रमुख समितियां
प्रशासनिक समिति - ग्राम पंचायतों के नियंत्रण में कार्यरत कर्मिकों से संबंधित सभी विषय। राशन की दुकानों से संबंधित समस्त कार्य।
नियोजन एवं विकास समिति - ग्राम पंचायत की योजना बनाना, कृषि पशुपालन तथा गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
शिक्षा समिति - प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा व साक्षरता से संबंधित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
निर्माण कार्य समिति - समस्त प्रकार के स्थायी व अस्थायी निर्माण कार्यों तथा अनुरक्षण के कार्यों पर प्रभावी नियंत्रण तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने से संबंधित समस्त कार्य।
स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति - चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से संबंधित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
जल प्रबंधन समिति - नलकूपों का संचालन व रख रखाव। पीने के पानी से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन।
जल्द समितियों का गठन कराया जाएगा
डीपीआरओ कुमार अमेंद्र ने बताया कि इस संबंध में बीडीओ, एडीओ पंचायत समेत सचिवों को निर्देशित किया जा चुका है। सभी को समितियों के गठन कराने में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है। जल्द से जल्द समितियों का गठन कराया जाएगा।
सरकार का समितियों के गठन पर जोर
कार्यवाहक जिला विकास अधिकारी एवं डीसी एनआरएलएम ब्रजभूषण ने बताया कि गांवों में अधिक से अधिक विकास कार्य हो, इसके लिए सरकार द्वारा कार्यकाल के प्रारंभ मेें समितियों के गठन पर जोर है। जिस गांवों में समितियों का गठन नहीं हुआ, उन गांवों में जल्द समितियों का गठन कराने का प्रयास हो रहा है।
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ग्राम पंचायतों का विकास कार्य छह समितियों के माध्यम से ही आगे बढ़ता है। हर समिति के काम और अधिकार तय हैं, लेकिन मासिक बैठक नहीं होने, सदस्यों की निष्क्रियता तथा प्रधानों व पंचायत सचिवों की सदस्यों को नजरंदाज कर काम करने की कार्यप्रणाली से ये सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाती हैं। सरकार इस बार कार्यकाल के प्रारंभ से ही समितियों की भूमिका को प्रभावी बनाने की योजना पर काम कर रही है।
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शासन का गांवों में विकास कार्य कराने से पहले ग्राम पंचायतों में सक्रिय समितियों के गठन का पूरा जोर है, लेकिन पंचायत चुनाव के लगभग दो माह बाद भी जिले की 245 ग्राम पंचायतों में से 60 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में अभी तक समितियों का गठन नहीं हो सका है। इस कारण इन ग्राम पंचायतों में लगभग पांच करोड़ रुपये से होने वाला विकास कार्य ठप पड़ा है। इसके पीछे गंवई सियासत को जिम्मेदार माना जा रहा है। ऐसे में समितियां गठित करने के लिए ग्राम प्रधान और सचिवों को पसीना बहाना पड़ रहा है।
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इस तरह होगा समितियों का गठन
ग्राम पंचायत का प्रधान नियोजन एवं विकास समिति, प्रशासनिक समिति तथा शिक्षा समिति का सभापति होगा। निर्माण कार्य समिति, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति तथा जल प्रबंधन समिति के सभापति का चुनाव ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा। सभी समितियों में सभापति के अलावा छह निर्वाचित सदस्य होंगे। इनमें एक महिला और एक अनुसूचित जाति/जनजाति और एक पिछड़े वर्ग का सदस्य होगा। समिति के सदस्यों का चुनाव ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा अपने में से किया जाएगा। समिति की बैठक के लिए चार सदस्यों का कोरम होगा। समिति की बैठक माह में कम से कम एक बार अवश्य होगी। समितियों का सचिव ग्राम पंचायत विकास अधिकारी होगा।
यह हैं ग्राम पंचायतों की छह प्रमुख समितियां
प्रशासनिक समिति - ग्राम पंचायतों के नियंत्रण में कार्यरत कर्मिकों से संबंधित सभी विषय। राशन की दुकानों से संबंधित समस्त कार्य।
नियोजन एवं विकास समिति - ग्राम पंचायत की योजना बनाना, कृषि पशुपालन तथा गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
शिक्षा समिति - प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा व साक्षरता से संबंधित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
निर्माण कार्य समिति - समस्त प्रकार के स्थायी व अस्थायी निर्माण कार्यों तथा अनुरक्षण के कार्यों पर प्रभावी नियंत्रण तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने से संबंधित समस्त कार्य।
स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति - चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से संबंधित कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
जल प्रबंधन समिति - नलकूपों का संचालन व रख रखाव। पीने के पानी से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन।
जल्द समितियों का गठन कराया जाएगा
डीपीआरओ कुमार अमेंद्र ने बताया कि इस संबंध में बीडीओ, एडीओ पंचायत समेत सचिवों को निर्देशित किया जा चुका है। सभी को समितियों के गठन कराने में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है। जल्द से जल्द समितियों का गठन कराया जाएगा।
सरकार का समितियों के गठन पर जोर
कार्यवाहक जिला विकास अधिकारी एवं डीसी एनआरएलएम ब्रजभूषण ने बताया कि गांवों में अधिक से अधिक विकास कार्य हो, इसके लिए सरकार द्वारा कार्यकाल के प्रारंभ मेें समितियों के गठन पर जोर है। जिस गांवों में समितियों का गठन नहीं हुआ, उन गांवों में जल्द समितियों का गठन कराने का प्रयास हो रहा है।