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Baghpat News: मोबाइल के नजदीक आकर जिंदगी से दूर हो रहे बच्चे
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-दिनभर मोबाइल में गेम खेलने वाले बच्चों की बिगड़ रही मानसिक हालत
-परिजनों के रोकने पर आत्महत्या तक का कदम उठा रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। घर के आंगन में खेलता कूदता बचपन अब मोबाइल में सिमट रहा है और मोबाइल के नजदीक आने से बच्चे अपनी जिंदगी से दूर हो रहे हैं। जिले में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें बच्चों को मोबाइल में गेम खेलने व रील देखने की लत लगने से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। परिवार वाले उनको रोकते हैं तो वे आत्महत्या तक का कदम उठा रहे हैं।
गेम खेलने वाले किशोर ने फांसी लगाकर जान दी
पाली गांव के पास अस्पताल के निर्माणाधीन भवन में काम कर रहे मध्य प्रदेश के मजदूर मुकेश के बेटे रंजीत (15) ने बृहस्पतिवार की सुबह झुग्गी में फांसी लगाकर जान दे दी। पिता मुकेश ने बताया कि रंजीत दिन में कई घंटे ऑनलाइन बीजीएमआई गेम खेलता रहता था। इसके लिए मना करने पर परिवार वालों से नाराज हो जाता था। परिवार वालों ने गेम की वजह से आत्महत्या करना बताया।
ऑनलाइन गेम खेलने के लिए रातभर घर नहीं गया किशोर
नवंबर 2025 में बड़ौत के पठानकोट मोहल्ले से एक किशोर लापता हो गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की तो मोबाइल बंद मिला। इसके बाद अगले दिन सुबह एक मदरसे से उसे बरामद किया। पूछताछ में किशोर से ऑनलाइन गेम फायर फाइटर खेलने के लिए घर से रातभर लापता होने के बारे में बताया।
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मानसिक स्थिति बिगड़ने पर खेल के किरदारों की तरह करने लगा हरकत
मई 2025 में टीकरी कस्बे में एक किशोर की मानसिक स्थिति बीजीएमआई गेम खेलने के कारण बिगड़ गई। 18-18 घंटे तक मोबाइल पर गेम खेलने से किशोर ने अजीब हरकतें करनी शुरू कर दीं। खुद को गेम का खिलाड़ी और कोड नंबर के रूप में पहचानने लगा। इसके बाद दूसरे लोगों को भी अपना नाम फाइटर बताते हुए खेल के किरदारों की तरह हरकत करने लगा। परिवार वाले किशोर को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सकों ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में रेफर किया।
ब्लू व्हेल गेम में फंसकर छात्र ने दी जान
वर्ष 2017 में ब्लू व्हेल गेम के टास्क में फंसकर शिकोहपुर गांव के बीटेक के छात्र ने दिल्ली के द्वारिकापुरी में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। छात्र दिल्ली के कॉलेज में बीटेक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। इससे पहले सितंबर 2021 में ब्लू व्हेल गेम के जाल में फंसे ककड़ीपुर के छात्र ने एलम में ट्रेन से कटकर जान दे दी थी।
बच्चों पर रखें ध्यान, बाहरी खेल खिलाएं : डॉ. अजय
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार कहते हैं कि आज के दौर में कुछ अभिभावक अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों को मोबाइल देकर बैठा देते हैं। इससे बच्चों को मोबाइल की लत लग जाती है। ऐसे में मोबाइल वापस लेने पर बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, जो सेहत और जिंदगी के लिए काफी खतरनाक साबित होता है। लगातार गेम खेलने पर उनकी मानसिक हालत भी बिगड़ने लगती है। अभिभावकों को भी बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है और बच्चों को ऑनलाइन गेम खिलाने के बजाय बाहरी खेल खिलाएं।
शिकायत करने पर बैन कराए जा सकते हैं गेम : एसपी
एसपी सूरज कुमार राय का कहना है कि कुछ ऐसे गेम आ रहे हैं, जिनके सहारे ठगी का प्रयास किया जाता है। उनकी शिकायत पुलिस में करने पर उनको बैन कराया जाता है। इसके अलावा बच्चों को मोबाइल गेम की लत न लगे, इसके लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं। अभिभावक भी बच्चों को मोबाइल ज्यादा न दें और उनको मोबाइल से केवल पढ़ाई तक सीमित रखें।
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-परिजनों के रोकने पर आत्महत्या तक का कदम उठा रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। घर के आंगन में खेलता कूदता बचपन अब मोबाइल में सिमट रहा है और मोबाइल के नजदीक आने से बच्चे अपनी जिंदगी से दूर हो रहे हैं। जिले में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें बच्चों को मोबाइल में गेम खेलने व रील देखने की लत लगने से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। परिवार वाले उनको रोकते हैं तो वे आत्महत्या तक का कदम उठा रहे हैं।
गेम खेलने वाले किशोर ने फांसी लगाकर जान दी
पाली गांव के पास अस्पताल के निर्माणाधीन भवन में काम कर रहे मध्य प्रदेश के मजदूर मुकेश के बेटे रंजीत (15) ने बृहस्पतिवार की सुबह झुग्गी में फांसी लगाकर जान दे दी। पिता मुकेश ने बताया कि रंजीत दिन में कई घंटे ऑनलाइन बीजीएमआई गेम खेलता रहता था। इसके लिए मना करने पर परिवार वालों से नाराज हो जाता था। परिवार वालों ने गेम की वजह से आत्महत्या करना बताया।
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ऑनलाइन गेम खेलने के लिए रातभर घर नहीं गया किशोर
नवंबर 2025 में बड़ौत के पठानकोट मोहल्ले से एक किशोर लापता हो गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की तो मोबाइल बंद मिला। इसके बाद अगले दिन सुबह एक मदरसे से उसे बरामद किया। पूछताछ में किशोर से ऑनलाइन गेम फायर फाइटर खेलने के लिए घर से रातभर लापता होने के बारे में बताया।
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मानसिक स्थिति बिगड़ने पर खेल के किरदारों की तरह करने लगा हरकत
मई 2025 में टीकरी कस्बे में एक किशोर की मानसिक स्थिति बीजीएमआई गेम खेलने के कारण बिगड़ गई। 18-18 घंटे तक मोबाइल पर गेम खेलने से किशोर ने अजीब हरकतें करनी शुरू कर दीं। खुद को गेम का खिलाड़ी और कोड नंबर के रूप में पहचानने लगा। इसके बाद दूसरे लोगों को भी अपना नाम फाइटर बताते हुए खेल के किरदारों की तरह हरकत करने लगा। परिवार वाले किशोर को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सकों ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में रेफर किया।
ब्लू व्हेल गेम में फंसकर छात्र ने दी जान
वर्ष 2017 में ब्लू व्हेल गेम के टास्क में फंसकर शिकोहपुर गांव के बीटेक के छात्र ने दिल्ली के द्वारिकापुरी में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। छात्र दिल्ली के कॉलेज में बीटेक द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। इससे पहले सितंबर 2021 में ब्लू व्हेल गेम के जाल में फंसे ककड़ीपुर के छात्र ने एलम में ट्रेन से कटकर जान दे दी थी।
बच्चों पर रखें ध्यान, बाहरी खेल खिलाएं : डॉ. अजय
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अजय कुमार कहते हैं कि आज के दौर में कुछ अभिभावक अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों को मोबाइल देकर बैठा देते हैं। इससे बच्चों को मोबाइल की लत लग जाती है। ऐसे में मोबाइल वापस लेने पर बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं, जो सेहत और जिंदगी के लिए काफी खतरनाक साबित होता है। लगातार गेम खेलने पर उनकी मानसिक हालत भी बिगड़ने लगती है। अभिभावकों को भी बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है और बच्चों को ऑनलाइन गेम खिलाने के बजाय बाहरी खेल खिलाएं।
शिकायत करने पर बैन कराए जा सकते हैं गेम : एसपी
एसपी सूरज कुमार राय का कहना है कि कुछ ऐसे गेम आ रहे हैं, जिनके सहारे ठगी का प्रयास किया जाता है। उनकी शिकायत पुलिस में करने पर उनको बैन कराया जाता है। इसके अलावा बच्चों को मोबाइल गेम की लत न लगे, इसके लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं। अभिभावक भी बच्चों को मोबाइल ज्यादा न दें और उनको मोबाइल से केवल पढ़ाई तक सीमित रखें।