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चिलचिलाती धूप व गर्मी में बैठकर पढ़ने को मजबूर है बच्चे
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बरनावा के कम्पोजिट विद्यालय में बाहर दरों पर बैठकर पढ़ते बच्चें
- फोटो : BAGHPAT
चिलचिलाती धूप व गर्मी में बैठकर पढ़ने को मजबूर है बच्चे
बिनौली(बागपत)। बरनावा के जर्जर हो चुकी स्कूल के पांच कमरों की एक इमारत को प्रशासन ने हादसे की आशंका के चलते गिरवा तो दिया, लेकिन अब तक उसके स्थान पर दूसरे भवन का निर्माण कराने के बारे में कोई सुध नहीं ली। छात्र-छात्राओं को भीषण गर्मी में खुले में दरे बिछाकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि जो कमरे हैं उनमें एक-एक कमरे में दो-दो कक्षाआें के बच्चों को इस उमस भरी गर्मी में बैठाया जा रहा है।
एक ओर जहां सरकार बच्चों को शिक्षित करने के लिए नई-नई योजनाएं शुरू कर रही है, वहीं बागपत में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की सूरत अलग है। विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक बच्चों के नामांकन किए जा रहे है, मगर छात्रों को बैठने के कमरे नहीं हैं। बरनावा के कंपोजिट विद्यालय में कमरों की कमी के कारण स्कूल के छात्र-छात्राएं चिलचिलाती धूप और गर्मी में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर है। विद्यालय में सिर्फ चार कमरे हैं और 547 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। कमरों की कमी के कारण शिक्षक एक कमरे में दो कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को बैठाकर पढ़ा रहे हैं, जबकि अन्य छात्रों को स्कूल के मैदान में दरे पर बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। स्कूल में तीन शिक्षक, नौ शिक्षिका, तीन अनुदेशक व दो शिक्षामित्र सहित 17 शिक्षकों का स्टॉफ भी है।
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जर्जर हो गया था भवन चार कमरों में चलती है कक्षा
विद्यालय की बिल्डिंग पुरानी होने के कारण जर्जर हो गई थी। विभाग की ओर से जर्जर भवन की नीलामी कराकर ध्वस्त करा दिया है, जिससे कमरों की कमी हो गई है। इसके अलावा विद्यालय में पुताई का कार्य चल रहा है। बिजली न आने पर गर्मी के कारण बच्चों को बाहर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। - प्रधानाध्यापक, ऋषिपाल सिंह
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शासन को भेजा जा चुका है पत्र
खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. बिजेंद्र का ने बताया कि ध्वस्त कराए गए भवनों के स्थानों पर दूसरे कक्षों का निर्माण कराने के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। रिमाइंडर भी भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस पर कार्यवाही शुरू होगी।
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बिनौली(बागपत)। बरनावा के जर्जर हो चुकी स्कूल के पांच कमरों की एक इमारत को प्रशासन ने हादसे की आशंका के चलते गिरवा तो दिया, लेकिन अब तक उसके स्थान पर दूसरे भवन का निर्माण कराने के बारे में कोई सुध नहीं ली। छात्र-छात्राओं को भीषण गर्मी में खुले में दरे बिछाकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि जो कमरे हैं उनमें एक-एक कमरे में दो-दो कक्षाआें के बच्चों को इस उमस भरी गर्मी में बैठाया जा रहा है।
एक ओर जहां सरकार बच्चों को शिक्षित करने के लिए नई-नई योजनाएं शुरू कर रही है, वहीं बागपत में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की सूरत अलग है। विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक बच्चों के नामांकन किए जा रहे है, मगर छात्रों को बैठने के कमरे नहीं हैं। बरनावा के कंपोजिट विद्यालय में कमरों की कमी के कारण स्कूल के छात्र-छात्राएं चिलचिलाती धूप और गर्मी में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर है। विद्यालय में सिर्फ चार कमरे हैं और 547 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। कमरों की कमी के कारण शिक्षक एक कमरे में दो कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को बैठाकर पढ़ा रहे हैं, जबकि अन्य छात्रों को स्कूल के मैदान में दरे पर बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। स्कूल में तीन शिक्षक, नौ शिक्षिका, तीन अनुदेशक व दो शिक्षामित्र सहित 17 शिक्षकों का स्टॉफ भी है।
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जर्जर हो गया था भवन चार कमरों में चलती है कक्षा
विद्यालय की बिल्डिंग पुरानी होने के कारण जर्जर हो गई थी। विभाग की ओर से जर्जर भवन की नीलामी कराकर ध्वस्त करा दिया है, जिससे कमरों की कमी हो गई है। इसके अलावा विद्यालय में पुताई का कार्य चल रहा है। बिजली न आने पर गर्मी के कारण बच्चों को बाहर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। - प्रधानाध्यापक, ऋषिपाल सिंह
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शासन को भेजा जा चुका है पत्र
खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. बिजेंद्र का ने बताया कि ध्वस्त कराए गए भवनों के स्थानों पर दूसरे कक्षों का निर्माण कराने के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। रिमाइंडर भी भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस पर कार्यवाही शुरू होगी।