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टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की मुहिम का दिख रहा असर
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वर्ष 2019 से 2021 तक गोद लिए 298 में से 240 बच्चे दे चुके हैं मात
प्रवीण शर्मा
बागपत। जिले में टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की मुहिम का असर दिख रहा है। वर्ष 2019 से शुरू हुए अभियान में अब तक 240 बच्चे टीबी को मात दे चुके हैं। अब जिले में टीबी के 911 केस एक्टिव है। टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण अभियान अंतर्गत प्रतिमाह पांच सौ रुपये का भुगतान किया जाता है। अगस्त 2019 में राज्यपाल आनंदीबेन ने टीबी के मरीजों को गोद लेने की मुहिम शुरू की थी। जिले में अगस्त 2019 से 31 मार्च 2021 तक अधिकारियों व सामाजिक संस्थाओं ने 298 टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लिया था। इनमें से 240 बच्चों ने टीबी को मात दे दी है। 58 बच्चों का उपचार अभी चल रहा है। मरीजों को दवा पहुंचाने के लिए मरीज के ठीक होने पर आशा को एक हजार रुपये प्रति मरीज के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
टीबी के 911 सक्रिय मरीज
जिले में अब टीबी के 911 सक्रिय मरीज हैं। इनमें से वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए अभियान में जिले में 82 नए मरीज मिले हैं। इनका स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार कराया जा रहा है। आशाओं के माध्यम से मरीजों के घर पर नि:शुल्क दवा पहुंचाई जा रही है। इसके अतिरिक्त टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा रही है।
पोषण के लिए उपलब्ध कराई जाती है किट
योजना अंतर्गत गोद लिए बच्चों को एक किलो मूंगफली, एक किलो भुना चना, एक किलो गुड़, एक किलो सत्तू, एक किलो तिल/गजक और एक किलो न्यूट्रिशन सप्लीमेंट(हॉर्लिक्स, बॉर्नवीटा, कॉम्पलान) का वितरण किया जाता है।
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-जिले में तीन साल में गोद लिए गए 298 में से 240 बच्चों ने टीबी को मात दी है। मरीज के ठीक होने पर आशा को दवा पहुंचाने के लिए एक हजार रुपये प्रोत्साहन के रूप में भुगतान किया जाता है। एक वर्ष से टीबी के मरीजों के उपचार पर 60 लाख रुपये खर्च किया गया है।-डॉ. यशवीर सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी
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प्रवीण शर्मा
बागपत। जिले में टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की मुहिम का असर दिख रहा है। वर्ष 2019 से शुरू हुए अभियान में अब तक 240 बच्चे टीबी को मात दे चुके हैं। अब जिले में टीबी के 911 केस एक्टिव है। टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण अभियान अंतर्गत प्रतिमाह पांच सौ रुपये का भुगतान किया जाता है। अगस्त 2019 में राज्यपाल आनंदीबेन ने टीबी के मरीजों को गोद लेने की मुहिम शुरू की थी। जिले में अगस्त 2019 से 31 मार्च 2021 तक अधिकारियों व सामाजिक संस्थाओं ने 298 टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लिया था। इनमें से 240 बच्चों ने टीबी को मात दे दी है। 58 बच्चों का उपचार अभी चल रहा है। मरीजों को दवा पहुंचाने के लिए मरीज के ठीक होने पर आशा को एक हजार रुपये प्रति मरीज के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
टीबी के 911 सक्रिय मरीज
जिले में अब टीबी के 911 सक्रिय मरीज हैं। इनमें से वित्तीय वर्ष में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए अभियान में जिले में 82 नए मरीज मिले हैं। इनका स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार कराया जा रहा है। आशाओं के माध्यम से मरीजों के घर पर नि:शुल्क दवा पहुंचाई जा रही है। इसके अतिरिक्त टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा रही है।
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पोषण के लिए उपलब्ध कराई जाती है किट
योजना अंतर्गत गोद लिए बच्चों को एक किलो मूंगफली, एक किलो भुना चना, एक किलो गुड़, एक किलो सत्तू, एक किलो तिल/गजक और एक किलो न्यूट्रिशन सप्लीमेंट(हॉर्लिक्स, बॉर्नवीटा, कॉम्पलान) का वितरण किया जाता है।
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-जिले में तीन साल में गोद लिए गए 298 में से 240 बच्चों ने टीबी को मात दी है। मरीज के ठीक होने पर आशा को दवा पहुंचाने के लिए एक हजार रुपये प्रोत्साहन के रूप में भुगतान किया जाता है। एक वर्ष से टीबी के मरीजों के उपचार पर 60 लाख रुपये खर्च किया गया है।-डॉ. यशवीर सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी