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यमुना में उफान, खादर में बह गई किसानों की फसलें
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हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 11 हजार क्यूसेक पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/छपरौली। हथिनीकुंड बैराज से यमुना में 11 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यमुना में जलस्तर बढ़ने छपरौली क्षेत्र के यमुना खादर में किसानों की फसलें पानी में डूब गई है। प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण की सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
यमुना नदी में पिछले पांच दिनों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। पांच दिन में 64 हजार क्यूसेक पानी हथिनीकुंड से छोड़ा जा चुका है। बृहस्पतिवार को हथनीकुंड से 11 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो शुक्रवार तक बागपत पहुंच जाएगा। यमुना खतरे के निशान के नजदीक बह रही है। यमुना का जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। यमुना खादर में खेती करने वाले किसानों की फसलेें पानी के साथ बह गई है। छपरौली क्षेत्र के टांडा, कूड़ी, नांगल, छपरौली, बदरखा, ककौर, शबगा और जागोस के किसान ओमवीर सिंह, राजेंद्र, नरेश कुमार, सुरेश पाल, बृजपाल शर्मा, राजीव शर्मा, राजकुमार और गौरव चौधरी का कहना है कि यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खेतों में कटान शुरू हो गया है, जिससे फसल बर्बाद होने की आशंका है। बाढ़ नियंत्रण के नोडल अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि फिलहाल यमुना खतरे के निशान से नीचे बह रही है। जिले में अभी बाढ़ की कोई संभावना नही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/छपरौली। हथिनीकुंड बैराज से यमुना में 11 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यमुना में जलस्तर बढ़ने छपरौली क्षेत्र के यमुना खादर में किसानों की फसलें पानी में डूब गई है। प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण की सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
यमुना नदी में पिछले पांच दिनों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। पांच दिन में 64 हजार क्यूसेक पानी हथिनीकुंड से छोड़ा जा चुका है। बृहस्पतिवार को हथनीकुंड से 11 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो शुक्रवार तक बागपत पहुंच जाएगा। यमुना खतरे के निशान के नजदीक बह रही है। यमुना का जलस्तर बढ़ने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। यमुना खादर में खेती करने वाले किसानों की फसलेें पानी के साथ बह गई है। छपरौली क्षेत्र के टांडा, कूड़ी, नांगल, छपरौली, बदरखा, ककौर, शबगा और जागोस के किसान ओमवीर सिंह, राजेंद्र, नरेश कुमार, सुरेश पाल, बृजपाल शर्मा, राजीव शर्मा, राजकुमार और गौरव चौधरी का कहना है कि यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खेतों में कटान शुरू हो गया है, जिससे फसल बर्बाद होने की आशंका है। बाढ़ नियंत्रण के नोडल अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि फिलहाल यमुना खतरे के निशान से नीचे बह रही है। जिले में अभी बाढ़ की कोई संभावना नही है।
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