{"_id":"60bfac2c8ebc3ed22d0f6af5","slug":"banyan-tree-savitri-amavasya-tomorrow-baraut-news-mrt541766131","type":"story","status":"publish","title_hn":"वट वृक्ष सावित्री अमावस्या कल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वट वृक्ष सावित्री अमावस्या कल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को है। इस दिन सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। वट सावित्री व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए एक बड़ा व्रत माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वट सावित्री व्रत 10 जून दिन बृहस्पतिवार को रखा जाएगा।
शास्त्रों के अनुसार, वटवृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में शिव का वास माना गया है। वट वृक्ष यानि बरगद का पेड़ देव वृक्ष माना जाता है। देवी सावित्री भी इस वृक्ष में निवास करती हैं। मान्यता है वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। तब से ये व्रत ‘वट सावित्री’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं वटवृक्ष की पूजा करती हैं। वृक्ष की परिक्रमा करते समय इस पर 108 बार कच्चा सूत लपेटा जाता है। महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। सावित्री की कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पति के संकट दूर होते हैं। मां दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित आकाश भारद्वाज ने बताया कि कोरोना काल में बरगद के पेड़ की पूजा सावधानी से करनी है। सभी महिलाएं पेड़ को छूएंगी। ऐसे में घर ही पूजा की जाए, बेहतर रहेगा।
अमावस्या तिथि प्रारंभ- 9 जून दोपहर 01:57 से
अमावस्या तिथि समाप्त- 10 जून शाम 04:22 तक
विज्ञापन
शास्त्रों के अनुसार, वटवृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में शिव का वास माना गया है। वट वृक्ष यानि बरगद का पेड़ देव वृक्ष माना जाता है। देवी सावित्री भी इस वृक्ष में निवास करती हैं। मान्यता है वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। तब से ये व्रत ‘वट सावित्री’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं वटवृक्ष की पूजा करती हैं। वृक्ष की परिक्रमा करते समय इस पर 108 बार कच्चा सूत लपेटा जाता है। महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। सावित्री की कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पति के संकट दूर होते हैं। मां दुर्गा मंदिर के पुजारी पंडित आकाश भारद्वाज ने बताया कि कोरोना काल में बरगद के पेड़ की पूजा सावधानी से करनी है। सभी महिलाएं पेड़ को छूएंगी। ऐसे में घर ही पूजा की जाए, बेहतर रहेगा।
विज्ञापन
अमावस्या तिथि प्रारंभ- 9 जून दोपहर 01:57 से
अमावस्या तिथि समाप्त- 10 जून शाम 04:22 तक