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Baghpat News: बालूशाही व छुआरे के लड्डू को दिलाया जाएगा जीआई टैग
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- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए उठाया कदम, बागपत की अर्थ व्यवस्था बेहतर होगी
- कलक्ट्रेट सभागार में बैठक में डीएम ने जीआई टैग दिलाने के लिए प्रक्रिया तेज करने के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कलक्ट्रेट सभागार में बुधवार को डीएम अस्मिता लाल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। वहां छुआरे के लड्डू व बालूशाही को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। इनको जीआई टैग मिलने से काफी फायदा मिलेगा।
डीएम ने कहा कि अग्रवाल मंडी टटीरी की बालूशाही कई दशक पुरानी है और बालूशाही को खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग बागपत पहुंचते हैं। यहां की बालूशाही को विदेशों तक में पसंद किया जाता है। निरपुड़ा का छुआरे का लड्डू भी काफी पुराना है और इसकी सर्दी में अधिक मांग बढ़ जाती है। विदेशों में लड्डू को पहुंचाया जाता है। उन्होंने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि इनका उत्पाद बढ़ सके और बागपत की अर्थ व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। कहा कि बालूशाही व छुआरे का लड्डू बागपत की पहचान है और इसका हमें प्रचार-प्रसार करना चाहिए। उन्होंने इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है। वहीं बागपत के चावल के लिए हर ब्लॉक में क्लस्टर बनाए जाने के निर्देश, ताकि किसानों को संगठित कर उत्पादन व गुणवत्ता को बढ़ावा मिल सके। बैठक में परियोजना निदेशक राहुल वर्मा, जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव आदि मौजूद रहे।
-- इन्हें मिला जीआई टैग
जिले के तीन उत्पाद को अभी तक जीआई टैग मिल चुका है। इनमें गुड़, घरेलू साज-सज्जा और रटौल का आम शामिल है। जीआई टैग मिलने के बाद इनका उत्पाद में बढ़ोत्तरी हुई है और विदेशों तक आपूर्ति की जाती है।
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- कलक्ट्रेट सभागार में बैठक में डीएम ने जीआई टैग दिलाने के लिए प्रक्रिया तेज करने के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कलक्ट्रेट सभागार में बुधवार को डीएम अस्मिता लाल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। वहां छुआरे के लड्डू व बालूशाही को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। इनको जीआई टैग मिलने से काफी फायदा मिलेगा।
डीएम ने कहा कि अग्रवाल मंडी टटीरी की बालूशाही कई दशक पुरानी है और बालूशाही को खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग बागपत पहुंचते हैं। यहां की बालूशाही को विदेशों तक में पसंद किया जाता है। निरपुड़ा का छुआरे का लड्डू भी काफी पुराना है और इसकी सर्दी में अधिक मांग बढ़ जाती है। विदेशों में लड्डू को पहुंचाया जाता है। उन्होंने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि इनका उत्पाद बढ़ सके और बागपत की अर्थ व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। कहा कि बालूशाही व छुआरे का लड्डू बागपत की पहचान है और इसका हमें प्रचार-प्रसार करना चाहिए। उन्होंने इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है। वहीं बागपत के चावल के लिए हर ब्लॉक में क्लस्टर बनाए जाने के निर्देश, ताकि किसानों को संगठित कर उत्पादन व गुणवत्ता को बढ़ावा मिल सके। बैठक में परियोजना निदेशक राहुल वर्मा, जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव आदि मौजूद रहे।
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जिले के तीन उत्पाद को अभी तक जीआई टैग मिल चुका है। इनमें गुड़, घरेलू साज-सज्जा और रटौल का आम शामिल है। जीआई टैग मिलने के बाद इनका उत्पाद में बढ़ोत्तरी हुई है और विदेशों तक आपूर्ति की जाती है।
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