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सट्टेबाजी के कर्ज ने कराया ड्रामा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:16 AM IST
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बागपत में ढ़िकौली गांव से सिपाही रविंद्र ढाका के अपहरण के ड्रामे का बृहस्पतिवार को सनसनीखेज खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक सिपाही सट्टा खेलता है। सट्टा का उस पर काफी कर्ज हो गया था। साथ ही दरोगा बनने के लिए उसे किसी व्यक्ति को रिश्वत देनी थी। इसी वजह से उसने परिजनों से रुपये वसूलने के लिए अपने अपहरण का नाटक रचा था। आरोपी सिपाही और इस ड्रामे में उसके साथी सिम विक्रेता अबरार को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
एएसपी विद्या सागर मिश्र ने पत्रकार वार्ता में बताया कि दिल्ली पुलिस के सिपाही रविंद्र का अपहरण नहीं हुआ था। वह काफी कर्ज में डूबा हुआ है। काफी समय पूर्व उसने बैंक से करीब साढ़े पांच लाख रुपये का लोन लिया था। लोन को समय पर नहीं चुका पाया था। वह सट्टा भी खेलता था। हाल ही में सट्टे में 44 हजार 600 रुपये हार गया था। इसके अलावा उसने दरोगा की परीक्षा दी थी। भर्ती कराने के नाम पर उसे किसी को रिश्वत देनी थी।
इसके लिए उसे रुपये की जरूरत थी। इसी के लिए उसने अपने अपहरण का प्लान तैयार किया। इसके लिए उसने नरेला के मोबाइल सिम विक्रेता अबरार से दो सिम खरीदे थे। उसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट का ड्रामा किया। उसने अपनी आवाज बदलकर अपने परिजनों से फिरौती मांगी और अपने साथियों से भी फोन कराए। सर्विलांस से इसका खुलासा हुआ है।
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एएसपी का कहना है आरोपी सिपाही रविंद्र और सिम विक्रेता अबरार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उसके साथियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है। उधर, आरोपी सिपाही रविंद्र ढाका का कहना है कि उसका कार सवार चार लोगों ने अपहरण किया था। बदमाशों ने ही फिरौती मांगी थी। वह झूठ नहीं बोल रहा है। उस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत है।
यह था मामला
बागपत। ढ़िकौली निवासी रविंद्र ढाका की ड्यूटी दिल्ली के नरेला थाना क्षेत्र में बबलू खत्री की सुरक्षा में लगी हुई थी। वह अपने घर पर आया हुआ था। सोमवार की सुबह करीब दस बजे अपने मकान के पास से रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था। उसके परिजनों से उसी के मोबाइल से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। परिजनों ने पुलिस से शिकायत की थी। मंगलवार देर शाम वह नाटकीय ढंग से खेकड़ा स्टेशन के पास पहुंच गया था।
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एएसपी विद्या सागर मिश्र ने पत्रकार वार्ता में बताया कि दिल्ली पुलिस के सिपाही रविंद्र का अपहरण नहीं हुआ था। वह काफी कर्ज में डूबा हुआ है। काफी समय पूर्व उसने बैंक से करीब साढ़े पांच लाख रुपये का लोन लिया था। लोन को समय पर नहीं चुका पाया था। वह सट्टा भी खेलता था। हाल ही में सट्टे में 44 हजार 600 रुपये हार गया था। इसके अलावा उसने दरोगा की परीक्षा दी थी। भर्ती कराने के नाम पर उसे किसी को रिश्वत देनी थी।
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इसके लिए उसे रुपये की जरूरत थी। इसी के लिए उसने अपने अपहरण का प्लान तैयार किया। इसके लिए उसने नरेला के मोबाइल सिम विक्रेता अबरार से दो सिम खरीदे थे। उसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट का ड्रामा किया। उसने अपनी आवाज बदलकर अपने परिजनों से फिरौती मांगी और अपने साथियों से भी फोन कराए। सर्विलांस से इसका खुलासा हुआ है।
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एएसपी का कहना है आरोपी सिपाही रविंद्र और सिम विक्रेता अबरार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उसके साथियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है। उधर, आरोपी सिपाही रविंद्र ढाका का कहना है कि उसका कार सवार चार लोगों ने अपहरण किया था। बदमाशों ने ही फिरौती मांगी थी। वह झूठ नहीं बोल रहा है। उस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत है।
यह था मामला
बागपत। ढ़िकौली निवासी रविंद्र ढाका की ड्यूटी दिल्ली के नरेला थाना क्षेत्र में बबलू खत्री की सुरक्षा में लगी हुई थी। वह अपने घर पर आया हुआ था। सोमवार की सुबह करीब दस बजे अपने मकान के पास से रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था। उसके परिजनों से उसी के मोबाइल से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। परिजनों ने पुलिस से शिकायत की थी। मंगलवार देर शाम वह नाटकीय ढंग से खेकड़ा स्टेशन के पास पहुंच गया था।