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आखिर किसानों की मांग के सामने झुका प्रशासन
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:06 AM IST
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बागपत में पेरिफेरल हाईवे में अधिग्रहण की गई भूमि के बढ़े हुए मुआवजे की मांग को लेकर गांव सरफाबाद में धरना दे रहे किसानों की मांग के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना ही पड़ा। किसानों की पांच में से चार मांगों को मान लिया गया। यहीं नहीं मुआवजे के लिए भी आश्वासन दिया कि कोर्ट से जो भी मुआवजा तय होगा, हाईवे अथॉरिटी से दिलाया जाएगा। आर्बिटेशन में मामला आया तो किसानों की बात मानी जाएगी। इस पर किसानों ने सहमति तो जताई, लेकिन धरना जारी रखने का निर्णय लिया।
शनिवार को जिलाधिकारी अजयदीप सिंह की अध्यक्षता में पेरिफेरल पर धरना दे रहे किसानों आैर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसमें किसानों ने मुआवजे को लेकर जमकर हंगामा किया। किसानों ने कहा कि उनकी जमीन चली गई, पूरा मुआवजा भी नहीं दिया गया है। डीएम ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से वार्ता के बाद किसानों की सर्विस रोड की मांग मान ली। काठा गांव की भूमि के लिए हरियाणा और यूपी सरकार के बीच फंसे पेंच का निस्तारण करते हुए अपने यहां से ही मुआवजा दिलाने की बात भी मान ली।
किसानों की 100 मीटर से अधिक भूमि सड़क के लिए न लेने के निर्देश दिए। हाईवे पर आ रहे ट्यूबवेल के शिफ्टिंग का खर्च दिए जाने की भी किसानों की बात स्वीकार की। उन्होंने बाग के काटे गए पेड़ों की कीमत का फिर से सर्वे कर मुआवजा तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि कोर्ट जो भी मुआवजा तय करेगी वह दिलाया जाएगा। इस पर किसानों ने मुआवजा मिलने तक धरना समाप्त न करने का ऐलान किया। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशीष जैन, प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष जैन, एसडीएम मनोज कुमार के अलावा किसान कृष्णपाल सिंह, देवेंद्र त्यागी, वीरेंद्र त्यागी, सुखवीर सिंह, राजेश यादव, धर्मपाल, राजपाल रहे।
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उधर, गांव सरफाबाद में शनिवार को 40वें दिन भी किसान ठंड में भी धरने पर डटे रहे। किसानों का कहना था कि जब तक संशोधित नई दरों का शेष मुआवजा नहीं मिला तब तक धरना जारी रहेगा। शनिवार को धरने में राजेश यादव, धर्मपाल सिंह, चमनलाल शर्मा, सुखबीर चौधरी, राजकुमार, राहुल धामा आदि किसान मौजूद रहे।
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शनिवार को जिलाधिकारी अजयदीप सिंह की अध्यक्षता में पेरिफेरल पर धरना दे रहे किसानों आैर राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसमें किसानों ने मुआवजे को लेकर जमकर हंगामा किया। किसानों ने कहा कि उनकी जमीन चली गई, पूरा मुआवजा भी नहीं दिया गया है। डीएम ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से वार्ता के बाद किसानों की सर्विस रोड की मांग मान ली। काठा गांव की भूमि के लिए हरियाणा और यूपी सरकार के बीच फंसे पेंच का निस्तारण करते हुए अपने यहां से ही मुआवजा दिलाने की बात भी मान ली।
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किसानों की 100 मीटर से अधिक भूमि सड़क के लिए न लेने के निर्देश दिए। हाईवे पर आ रहे ट्यूबवेल के शिफ्टिंग का खर्च दिए जाने की भी किसानों की बात स्वीकार की। उन्होंने बाग के काटे गए पेड़ों की कीमत का फिर से सर्वे कर मुआवजा तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि कोर्ट जो भी मुआवजा तय करेगी वह दिलाया जाएगा। इस पर किसानों ने मुआवजा मिलने तक धरना समाप्त न करने का ऐलान किया। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आशीष जैन, प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष जैन, एसडीएम मनोज कुमार के अलावा किसान कृष्णपाल सिंह, देवेंद्र त्यागी, वीरेंद्र त्यागी, सुखवीर सिंह, राजेश यादव, धर्मपाल, राजपाल रहे।
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उधर, गांव सरफाबाद में शनिवार को 40वें दिन भी किसान ठंड में भी धरने पर डटे रहे। किसानों का कहना था कि जब तक संशोधित नई दरों का शेष मुआवजा नहीं मिला तब तक धरना जारी रहेगा। शनिवार को धरने में राजेश यादव, धर्मपाल सिंह, चमनलाल शर्मा, सुखबीर चौधरी, राजकुमार, राहुल धामा आदि किसान मौजूद रहे।