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गलतियों का अहसास कर क्षमा याचना करना ही क्षमावाणी

Wed, 16 Feb 2022 10:17 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 10:17 PM IST
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Apologizing is the only way to apologize after realizing the mistakes
बरनावा के श्री चंद्रप्रभु मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु - फोटो : BARAUT
संवाद न्यूज एजेंसी
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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व माघ माह के उपलक्ष्य में चल रहे दशलक्षण पर्व के समापन पर क्षमावाणी पर्व मनाया गया। श्रद्धालुओं ने दस श्रीफल समर्पित कर भगवान चंद्रप्रभु की पूजा-अर्चना की।

पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि दिगंबर जैन समाज का क्षमावाणी विशेष पर्व है। यह वर्ष भर में तीन बार आता है। इस पर्व पर सभी छोटे बड़े का भेद छोड़कर प्रेमपूर्वक एक दूसरे से गले मिलते है। साथ ही विगत वर्षों में जाने अनजाने में कदाचित हुई गलतियों क्षमा याचना है। इस पर्व को वात्सल्य प्रभावना पर्व भी कहते है। बीते वर्ष में परोक्ष या अपरोक्ष रूप से किसी की वाणी या व्यवहार द्वारा किसी के मन को कोई ठेस पहुंची हो तो कृपया क्षमा करें। उन्होंने कहा कि गुस्सा और मतभेद बारिश की तरह होना चाहिए, जो बरसकर खत्म हो जाए। प्रेम हवा की तरह होना चाहिए, जो खामोश हो किंतु आसपास ही रहे। उदार हृदय के अनुरूप हम आपस में परस्पर एक दूसरे से क्षमा याचना कर अपने जीवन को समुज्ज्वल बना सकते है। पूजा-अर्चना में सरिता जैन, सीता जैन, राकेश जैन, लोकेश जैन, महेश जैन आदि उपस्थित रहे।
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