अमर उजाला पड़ताल: सरकार के 47 करोड़ रुपये बर्बाद, फिर भी नहीं हुआ समस्या का समाधान, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
सरकार के 47 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए लेकिन, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। पढ़िए अमर उजाला की यह रिपोर्ट।
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विस्तार
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड क्षेत्र में 680 बिजलीघरों पर बैंक कैपेसिटर खराब पड़े हैं। इन खराब पड़े कैपेसिटर बैंक पर सात साल पहले करीब 47 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। सरकार का यह पैसा भी बर्बाद हो गया और इनका कोई लाभ नहीं हुआ।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014-2015 में बिजली की सप्लाई में लो वोल्टेज की समस्या के समाधान, लाइन लॉस कम कर बिजली बचाने और बिजलीघरों की मशीनें लंबे समय तक काम करें, इस मकसद से इन्हें लगवाया था। कुछ माह चलने के बाद इनमें तकनीकी खराबी आई और ये बंद होते चले गए। पीवीवीएनएल के अंतर्गत आने वाले मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बिजनौर और अमरोहा जिलों में 830 बिजलीघरों पर इन्हें लगाया गया था। फिलहाल 150 बिजलीघरों पर ही ये चालू हैं।
एक कैपेसिटर बैंक पर खर्च हुए थे छह से सात लाख
एक बिजलीघर पर कैपेसिटर बैंक लगाने के लिए छह से सात लाख रुपये खर्च किए थे। कुछ को छोड़कर ज्यादातर बिजलीघरों पर दो-दो कैपेसिटर बैंक लगाए थे। यानी एक बिजलीघर पर तकरीबन 14 लाख रुपये कैपेसिटर बैंक लगाने में खर्च किए थे। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना सहित अन्य योजनाओं से इनपर धनराशि खर्च की गई थी।
इस तरह करता है काम
कैपेसिटर बैंक लगे होने से एक ट्रांसफार्मर से निकलने वाली बिजली सभी घरों में बराबर पहुंचाती है। यदि कैपेसिटर बैंक नहीं लगा है तो ट्रांसफार्मर के निकट के घरों में बिजली का पूरा लोड आता है, लेकिन जैसे-जैसे घरों में बिजली का इस्तेमाल बढ़ता है, दूसरे घरों में वोल्टेज की दिक्कत आ जाती है। यानी इसकी मदद से वोल्टेज को नियंत्रित रखा जा सकता है। इससे लाइन लॉस को काफी हद तक कम किया जा सकता है और घरेलू उपकरणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
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अप्रैल से सितंबर माह में पड़ती है अधिक जरूरत
एसडीओ प्रवेश गिरि ने बताया कि ज्यादातर मामलों में विद्युत ट्रांसफार्मर लो-वोल्टेज या हाई-वोल्टेज के चलते फूंक जाते हैं। अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में बिजली की जरूरत बढ़ने से लोड बढ़ जाता है। ऐसे में कैपेसिटर बैंक बिजलीघरों से घरों में बराबर बिजली पहुंचाने का काम करता है।
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यह बात सही है कि जिन बिजलीघरों पर कैपेसिटर बैंक लगाए गए थे, सभी बंद पड़े हैं। तकनीकी खराबी आने के कारण न तो उन्हें ठीक करने के लिए कोई मैकेनिक मिला और न ही मरम्मत का सामान। न ही कोई ऐसी एजेंसी मिली, जिससे कैपेसिटर बैंक को ठीक कराया जा सके। - रणविजय सिंह, अधीक्षण अभियंता
कुछ माह तक उक्त कैपेसिटर बैंक चालू रहे, लेकिन फिर बंद हो गए थे। सभी अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंताओं सहित सहायक अभियंताओं को कैपेसिटर बैंक को चालू करने के निर्देश दिए गए थे, यदि ऐसा नहीं हुआ है तो मामला गंभीर है और विभाग का भी नुकसान है। इसे दिखवाया जाएगा। - राजीव कुमार, चीफ इंजीनियर, मेरठ जोन
पश्चिमांचल के छह जोन व बिजलीघरों की संख्या
जोन बिजलीघर
नोएडा 94
गाजियाबाद 146
बुलंदशहर 177
सहारनपुर 352
मेरठ 229
मुरादाबाद 332