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एएचटीयू ने दो बाल श्रमिकों को कराया रेस्कयू
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बाल कल्याण समिति ने परिजनों के सुपुर्द किया
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। एएचटीयू टीम ने सीओ खेकड़ा मंगल सिंह रावत के निर्देशन में मंगलवार को नो चाइल्ड लेबर अभियान चलाया। टीम ने दिल्ली सहारनपुर हाईवे से सिसाना गांव के पास से दो बाल श्रमिकों को छुड़ाया। दोनों को न्यायालय बाल कल्याण समिति बागपत के समक्ष पेश किया गया, जहां से काउंसलिंग के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट राजीव यादव ने बताया कि टीम ने मंगलवार को दो बालक श्रमिकों को छुड़ाया। दोनों बाल श्रमिक साजू पुत्र नूरहसन निवासी मोहल्ला ईदगाह कस्बा बागपत की दुकान साजू पंक्चर सेंटर पर हेल्पर का कार्य कर रहे थे। एएचटीयू प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह सिद्धू, नवोदय लोक चेतना समिति के सचिव, आरक्षी प्रवीण कुमार ने दोनों बाल श्रमिकों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने काउसंलिंग के बाद दोनों बाल श्रमिकों को उनके परिजनों के सौंप दिया।
खाने के लिए तीन रोटी, पांच रुपये मेहताना
बागपत। बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट राजीव यादव ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों बाल श्रमिकों ने बताया है कि उन्हें पंक्चर की दुकान पर खाने में तीन रोटियां मिलती थी। शाम को पांच रुपये दिए जाते थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। एएचटीयू टीम ने सीओ खेकड़ा मंगल सिंह रावत के निर्देशन में मंगलवार को नो चाइल्ड लेबर अभियान चलाया। टीम ने दिल्ली सहारनपुर हाईवे से सिसाना गांव के पास से दो बाल श्रमिकों को छुड़ाया। दोनों को न्यायालय बाल कल्याण समिति बागपत के समक्ष पेश किया गया, जहां से काउंसलिंग के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट राजीव यादव ने बताया कि टीम ने मंगलवार को दो बालक श्रमिकों को छुड़ाया। दोनों बाल श्रमिक साजू पुत्र नूरहसन निवासी मोहल्ला ईदगाह कस्बा बागपत की दुकान साजू पंक्चर सेंटर पर हेल्पर का कार्य कर रहे थे। एएचटीयू प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह सिद्धू, नवोदय लोक चेतना समिति के सचिव, आरक्षी प्रवीण कुमार ने दोनों बाल श्रमिकों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने काउसंलिंग के बाद दोनों बाल श्रमिकों को उनके परिजनों के सौंप दिया।
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खाने के लिए तीन रोटी, पांच रुपये मेहताना
बागपत। बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट राजीव यादव ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों बाल श्रमिकों ने बताया है कि उन्हें पंक्चर की दुकान पर खाने में तीन रोटियां मिलती थी। शाम को पांच रुपये दिए जाते थे।
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