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सात साल बाद भी आवंटन के इंतजार में एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब
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नांगल कुरडी गांव स्थित सहाधन सहकारी समिति परिसर में बनी मंडी समिति की दुकानें
- फोटो : BAGHPAT
सात साल बाद भी आवंटन के इंतजार में एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब
कृषि उत्पादन मंडी और सहकारिता विभाग ने जिले में बनवाई थीं दुकानें
किसानों को गांव के नजदीक ही बाजार उपलब्ध कराने की थी मंशा
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। किसानों को अपने गांव के नजदीक बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि उत्पादन मंडी समिति (एपीएमसी) और सहकारिता विभाग की ओर से तैयार कराए गए एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब (एएमएच) की दुकानें आवंटन का इंतजार कर रही हैं। खेकड़ा मंडी समिति ने छह और बड़ौत मंडी समिति ने जिले में तीन गांवों में दुकानों का निर्माण कराया था, लेकिन सात साल बाद भी 20 से अधिक दुकानों का आवंटन लटका हुआ है। जिस कारण किसानों के लिए तैयार की गई योजना धरातल पर उतरने से पहले ही धराशायी हो गई है।
सहकारी विभाग की जमीन और मंडी का बजट
मार्केटिंग हब बनाने के लिए सहकारिता विभाग की समितियों और गोदामों की खाली पड़ी जमीन का प्रयोग किया गया था। निर्माण पर बजट मंडी समिति ने खर्च किया था। एक दुकान पर करीब सवा दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। दुकानों पर स्वामित्व सहकारी विभाग का रहना था, जबकि किराया मंडी समिति को जाना था। इसके अलावा मंडी शुल्क की निश्चित धनराशि भी सहकारिता विभाग को मिलनी थी।
समितियां कर रही भवनों का प्रयोग
छपरौली क्षेत्र के नांगल कुर्डी गांव में सात साल पहले दुकानें बनकर तैयारी हुई थीं, लेकिन अभी तक आवंटन नहीं हुआ है। रमाला गांव में भी दुकानों का आवंटन नहीं हो सका। दोनों जगह समिति की जमीन पर निर्माण हुआ है। समिति ही रखरखाव भी कर रही है।
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क्या था उद्देश्य
एएमएच बनाने का उद्देश्य किसानों को अपने गांव में ही बाजार उपलब्ध कराने का था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आवंटन उन लोगों को किया जाना है, जो कृषि संबंधी दुकानें चलाएं। कई गांवों में ग्राहक तलाशना भी आसान नहीं रहा।
इन गांव में बनाए थे मार्केटिंग हब
नांगल कुर्डी, रमाला, मवी कलां, बालैनी, सिंघावली अहीर, ललियाना, सिंगौली तगा, मुकारी, खैला में हब बनाए गए थे। मुकारी, रमाला, नांगला कुर्डी और ललियाना में आवंटन नहीं हो सका है। साल 2013 में स्कीम लागू की गई, हर जगह अलग-अलग समय पर निर्माण हुआ।
जल्द शुरू होगी आवंटन की प्रक्रिया : देवेंद्र सिंह
एआर कोऑपरेटिव देवेंद्र सिंह का कहना है कि जिन दुकानों का आवंटन नहीं हुआ है, उनकी प्रक्रिया शीघ्र शुरू होगी। विभाग से भी इस बाबत निर्देश मिल गए हैं। दुकानों की स्थिति सही है और संबंधित समितियां देखरेख कर रही हैं।
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कृषि उत्पादन मंडी और सहकारिता विभाग ने जिले में बनवाई थीं दुकानें
किसानों को गांव के नजदीक ही बाजार उपलब्ध कराने की थी मंशा
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। किसानों को अपने गांव के नजदीक बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि उत्पादन मंडी समिति (एपीएमसी) और सहकारिता विभाग की ओर से तैयार कराए गए एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब (एएमएच) की दुकानें आवंटन का इंतजार कर रही हैं। खेकड़ा मंडी समिति ने छह और बड़ौत मंडी समिति ने जिले में तीन गांवों में दुकानों का निर्माण कराया था, लेकिन सात साल बाद भी 20 से अधिक दुकानों का आवंटन लटका हुआ है। जिस कारण किसानों के लिए तैयार की गई योजना धरातल पर उतरने से पहले ही धराशायी हो गई है।
सहकारी विभाग की जमीन और मंडी का बजट
मार्केटिंग हब बनाने के लिए सहकारिता विभाग की समितियों और गोदामों की खाली पड़ी जमीन का प्रयोग किया गया था। निर्माण पर बजट मंडी समिति ने खर्च किया था। एक दुकान पर करीब सवा दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। दुकानों पर स्वामित्व सहकारी विभाग का रहना था, जबकि किराया मंडी समिति को जाना था। इसके अलावा मंडी शुल्क की निश्चित धनराशि भी सहकारिता विभाग को मिलनी थी।
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समितियां कर रही भवनों का प्रयोग
छपरौली क्षेत्र के नांगल कुर्डी गांव में सात साल पहले दुकानें बनकर तैयारी हुई थीं, लेकिन अभी तक आवंटन नहीं हुआ है। रमाला गांव में भी दुकानों का आवंटन नहीं हो सका। दोनों जगह समिति की जमीन पर निर्माण हुआ है। समिति ही रखरखाव भी कर रही है।
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क्या था उद्देश्य
एएमएच बनाने का उद्देश्य किसानों को अपने गांव में ही बाजार उपलब्ध कराने का था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आवंटन उन लोगों को किया जाना है, जो कृषि संबंधी दुकानें चलाएं। कई गांवों में ग्राहक तलाशना भी आसान नहीं रहा।
इन गांव में बनाए थे मार्केटिंग हब
नांगल कुर्डी, रमाला, मवी कलां, बालैनी, सिंघावली अहीर, ललियाना, सिंगौली तगा, मुकारी, खैला में हब बनाए गए थे। मुकारी, रमाला, नांगला कुर्डी और ललियाना में आवंटन नहीं हो सका है। साल 2013 में स्कीम लागू की गई, हर जगह अलग-अलग समय पर निर्माण हुआ।
जल्द शुरू होगी आवंटन की प्रक्रिया : देवेंद्र सिंह
एआर कोऑपरेटिव देवेंद्र सिंह का कहना है कि जिन दुकानों का आवंटन नहीं हुआ है, उनकी प्रक्रिया शीघ्र शुरू होगी। विभाग से भी इस बाबत निर्देश मिल गए हैं। दुकानों की स्थिति सही है और संबंधित समितियां देखरेख कर रही हैं।