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आखिर सरकार भूल क्यों जाती है बेटों की शहादत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Wed, 26 Jul 2017 01:22 AM IST
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बिनौली में शहीद पदम सिंह की तस्वीर के साथ मां शकुंतला देवी, पत्नी मुकेश और बेटा अक्षय धामा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भारत भूमि पर नापाक कदम रखने वाले दुश्मनों को कारगिल की लड़ाई में जवानों ने अपना बलिदान देकर खदेड़ दिया था। बलिदानी शौर्य गाथा के पन्नों पर बेटों की अमिट कहानी लिखी है।
बागपत के चार बेटों ने भी इस लड़ाई में भारत माता के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए। सरकारें आई और चली गईं। घोषणाएं भी हुई। कोई वादा पूरा किया तो कोई आज भी अधूरा है । शहीदों के परिवारों का दर्द है कि सरकार शहादत को क्यों भूल जाती है।
जिनके लाल चले गए, उनका क्या है हाल है, इसकी चिंता किसी को नहीं है। जिवाना गुलियान के जितेंद्र सिंह, बावली के अनिल कुमार, खेकड़ा के लास नायक राजेंद्र सिंह और बिनौली गांव के हवलदार पदम सिंह का बलिदान अमर है। देश के लिए उनकी शहदत भुलाई नहीं जा सकती।
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शहीद की मां को नहीं मिल रही पेंशन
कारगिल की चोटी पर खेकड़ा के लास नायक राजेंद्र सिंह ने भी प्राण गवाएं थे। उनका बेटा बीटेक कर रहा है। मां शकुंतला देवी कहती हैं कि किससे क्या शिकायत करें, कोई समाधान नहीं निकलता। प्रशासन की ओर से जो सहयोग मिलना चाहिए था वो नहीं मिल रहा है।
पिछले छह माह से पेंशन तक नहीं आई है। जमीन देने की घोषणा हुई थी, उसका भी कुछ पता नहीं है। पाकिस्तान अब हमारे देश में ही आतंकवादी पैदा कर रहा है। समय रहते इसका काबू नहीं पाया तो देश को बड़ा नुकसान होगा।
शिकायत नहीं, सीमा की रक्षा करे सरकार
बिनौली गांव के शहीद हवलदार पदम सिंह के पुत्र अक्षय धामा ने कहा सरकार से जो लाभ मिला है, उससे वह संतुष्ट है, कोई भी मांग नहीं करते हैं। यह जरूर कहना है देश की सीमा पर आज घटनाएं हो रही है, इस मामले में सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। सैनिक तो शहीद हो ही रहे हैं, अब तो भोले-भाले यात्रियों को भी जान गवानी पड़ रही है। पाकिस्तान को इसका जवाब देना होगा, तभी वह घिनौनी हरकतों से बाज आएगा।
शहीद के मां-बाप की भी हो विशेष पेंशन
जिवाना गुलियान निवासी शहीद सिपाही जितेंद्र सिंह की मां परम कौर ने कहा सरकार से जो सहायता मिली, उसको बेटे की पत्नी लेकर चली जो हरियाणा में रह रही है। उन्हें शासन और प्रशासन से कोई लाभ नहीं मिला। वहीं उन्होंने कहा जो देश में आतंकी घटनाएं हो रही है, उससे प्रधानमंत्री को सख्ती से निपटना चाहिए।
इसके लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री को मामले से सख्ती से निपटना चाहिए, तभी इन हरकतों पर काबू पाया जा सकेगा। यही नहीं शहीद के माता-पिता को विशेष पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
राजनीति के सामने हार जाती है सेना
बावली गांव के अनिल कुमार ने कारगिल में शहादत दी थी। शहीद के पिता सुलतान सिंह कहते है नेताओं ने देश को बर्बाद कर दिया है। सीमा पर आए दिन भारतीय सैनिक शहीद हो रहे हैं। पाकिस्तान को उसकी भाषा में समझाना होगा, तभी वह अपनी हरकतों से बाज आएगा।
कश्मीर में ऐसे नेताओं पर भी लगाम लगाई जानी चाहिए, जो देश के युवाओं को आतंकवादी बना रहे हैं। कश्मीर के भोले-भाले लड़कों को लालच देकर आतंक की दलदल में धकेलने का काम चल रहा है।
धनराशि ही नहीं
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने कहा लखनऊ से अभी पेंशन के लिए धनराशि नहीं मिली है। जैसे ही धनराशि आ जाएगी, वैसे ही सभी को कॉल करके बुलवाकर पेंशन दे दी जाएगी।
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बागपत के चार बेटों ने भी इस लड़ाई में भारत माता के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए। सरकारें आई और चली गईं। घोषणाएं भी हुई। कोई वादा पूरा किया तो कोई आज भी अधूरा है । शहीदों के परिवारों का दर्द है कि सरकार शहादत को क्यों भूल जाती है।
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जिनके लाल चले गए, उनका क्या है हाल है, इसकी चिंता किसी को नहीं है। जिवाना गुलियान के जितेंद्र सिंह, बावली के अनिल कुमार, खेकड़ा के लास नायक राजेंद्र सिंह और बिनौली गांव के हवलदार पदम सिंह का बलिदान अमर है। देश के लिए उनकी शहदत भुलाई नहीं जा सकती।
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शहीद की मां को नहीं मिल रही पेंशन
कारगिल की चोटी पर खेकड़ा के लास नायक राजेंद्र सिंह ने भी प्राण गवाएं थे। उनका बेटा बीटेक कर रहा है। मां शकुंतला देवी कहती हैं कि किससे क्या शिकायत करें, कोई समाधान नहीं निकलता। प्रशासन की ओर से जो सहयोग मिलना चाहिए था वो नहीं मिल रहा है।
पिछले छह माह से पेंशन तक नहीं आई है। जमीन देने की घोषणा हुई थी, उसका भी कुछ पता नहीं है। पाकिस्तान अब हमारे देश में ही आतंकवादी पैदा कर रहा है। समय रहते इसका काबू नहीं पाया तो देश को बड़ा नुकसान होगा।
शिकायत नहीं, सीमा की रक्षा करे सरकार
बिनौली गांव के शहीद हवलदार पदम सिंह के पुत्र अक्षय धामा ने कहा सरकार से जो लाभ मिला है, उससे वह संतुष्ट है, कोई भी मांग नहीं करते हैं। यह जरूर कहना है देश की सीमा पर आज घटनाएं हो रही है, इस मामले में सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए। सैनिक तो शहीद हो ही रहे हैं, अब तो भोले-भाले यात्रियों को भी जान गवानी पड़ रही है। पाकिस्तान को इसका जवाब देना होगा, तभी वह घिनौनी हरकतों से बाज आएगा।
शहीद के मां-बाप की भी हो विशेष पेंशन
जिवाना गुलियान निवासी शहीद सिपाही जितेंद्र सिंह की मां परम कौर ने कहा सरकार से जो सहायता मिली, उसको बेटे की पत्नी लेकर चली जो हरियाणा में रह रही है। उन्हें शासन और प्रशासन से कोई लाभ नहीं मिला। वहीं उन्होंने कहा जो देश में आतंकी घटनाएं हो रही है, उससे प्रधानमंत्री को सख्ती से निपटना चाहिए।
इसके लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री को मामले से सख्ती से निपटना चाहिए, तभी इन हरकतों पर काबू पाया जा सकेगा। यही नहीं शहीद के माता-पिता को विशेष पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
राजनीति के सामने हार जाती है सेना
बावली गांव के अनिल कुमार ने कारगिल में शहादत दी थी। शहीद के पिता सुलतान सिंह कहते है नेताओं ने देश को बर्बाद कर दिया है। सीमा पर आए दिन भारतीय सैनिक शहीद हो रहे हैं। पाकिस्तान को उसकी भाषा में समझाना होगा, तभी वह अपनी हरकतों से बाज आएगा।
कश्मीर में ऐसे नेताओं पर भी लगाम लगाई जानी चाहिए, जो देश के युवाओं को आतंकवादी बना रहे हैं। कश्मीर के भोले-भाले लड़कों को लालच देकर आतंक की दलदल में धकेलने का काम चल रहा है।
धनराशि ही नहीं
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने कहा लखनऊ से अभी पेंशन के लिए धनराशि नहीं मिली है। जैसे ही धनराशि आ जाएगी, वैसे ही सभी को कॉल करके बुलवाकर पेंशन दे दी जाएगी।