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पूजा कर उत्तम शौच धर्म को अंगीकार किया
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बड़ौत में चल रहे दशलक्षण पर्व पर पूजा करती श्रद्घालु।
- फोटो : BARAUT
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बड़ौत (बागपत)। पंडित डॉ. श्रीयांश जैन ने कहा कि आज का दिन हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण है। क्रोध मान माया और लोभ अभाव होना ही उत्तम शौच धर्म कहलाता है। व्यक्ति का पाप में लिप्त न होना, आत्मा के परिणामों में निर्मलता होना ही उत्तम शौच धर्म है। अशुभ कर्मों से मलिन आत्मा को शुद्ध करने के लिए मिट्टी अग्नि जल समर्थ नहीं है। इसके लिए ज्ञान, तप, ध्यान धर्म रूपी जल से आत्मा का प्रक्षालन कर शुद्ध किया जा सकता है।
यह संदेश उन्होंने कस्बा स्थित एक कार्यक्रम में दिया। उन्होंने कहा कि पहले दिन हम सभी ने क्रोध को उत्तम क्षमा धर्म से परास्त किया। दूसरे दिन मां कषाय को उत्तम मार्दव धर्म से पराजित किया। तीसरे दिन यानी कल हम सभी ने माया कषाय को उत्तम आर्जव धर्म से नष्ट करने का प्रयास किया। बुधवार को हम लोभ कषाय को उत्तम शौच धर्म से पराजित करेंगे। क्योकि तीन कषाय नष्ट होने पर चौथी कषाय अपने आप ही चली जाने को तैयार हो जाती है। लोभ के अभाव में शौच धर्म प्रगट होता है।
दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने घरों में ही पूजा-अर्चना करके उत्तम शौच धर्म को अंगीकार किया। सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक किया गया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन सुनील जैन, मौजूद रहे। उधर श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड पर सादगी के साथ दशलक्षण महापर्व के चतुर्थ दिन उत्तम शौच धर्म को अंगीकार किया गया। इसमें सतेन्द्र जैन, अनिल जैन, नेमचंद जैन आदिश जैन मौजूद रहे।
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यह संदेश उन्होंने कस्बा स्थित एक कार्यक्रम में दिया। उन्होंने कहा कि पहले दिन हम सभी ने क्रोध को उत्तम क्षमा धर्म से परास्त किया। दूसरे दिन मां कषाय को उत्तम मार्दव धर्म से पराजित किया। तीसरे दिन यानी कल हम सभी ने माया कषाय को उत्तम आर्जव धर्म से नष्ट करने का प्रयास किया। बुधवार को हम लोभ कषाय को उत्तम शौच धर्म से पराजित करेंगे। क्योकि तीन कषाय नष्ट होने पर चौथी कषाय अपने आप ही चली जाने को तैयार हो जाती है। लोभ के अभाव में शौच धर्म प्रगट होता है।
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दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने घरों में ही पूजा-अर्चना करके उत्तम शौच धर्म को अंगीकार किया। सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक किया गया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन सुनील जैन, मौजूद रहे। उधर श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड पर सादगी के साथ दशलक्षण महापर्व के चतुर्थ दिन उत्तम शौच धर्म को अंगीकार किया गया। इसमें सतेन्द्र जैन, अनिल जैन, नेमचंद जैन आदिश जैन मौजूद रहे।

ड़ौत में चल रहे दशलक्षण पर्व के चौथे दिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करता श्रद्वालु।- फोटो : BARAUT
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