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हाईवे पर होगा सत्यपाल सिंह की पहला इम्तिहान
Baghpat
Updated Wed, 28 May 2014 05:34 AM IST
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बागपत। बागपत से सांसद बने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर डॉ. सत्यपाल सिंह की पहली परीक्षा दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर होगी। उन्होंने इस सड़क की हालत सुधारने को अपनी पहली प्राथमिकता में लिया है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि इस पर काम कब शुरू करा पाते हैं। इसके लिए जरूरी है हरे पेड़ काटे जाने की एनओसी। इसकी फाइल केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में है। सत्यपाल सिंह को एनओसी की फाइल पर दस्तखत कराने हैं। इसके बाद बागपत की उम्मीदों का यह रास्ता बनना शुरू हो जाएगा।
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का यह प्रोजेक्ट पूर्ववर्ती मायावती सरकार के समय का है। 1780 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का पीपीपी मॉडल पर ठेका सेवकराम इंजीनियरिंग वर्क्स (एसईडब्लू) को दिया गया था। लेकिन चूक यह हुई कि हरे पेड़ काटे जाने की एनओसी से पहले पुलिया और नाले बनाने का काम शुरू हो गया। तब किसी को नहीं पता था कि हाईवे किनारे के पेड़ काटे जाने की एनओसी मिलना इतना मुश्किल होगा।
इसके बाद यूपी में सरकार सपा की आई। अनुमति केंद्र को देनी थी जबकि औपचारिकताएं प्रदेश सरकार को पूरी करनी थी। दोनों ने ही देरी पर देरी की। पहले महीनों तक फाइल केंद्र में अटकी रही। फिर प्रारंभिक एनओसी के साथ प्रदेश को भेजी गई, तो यहां महीने लग गए।
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अब तमाम औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फाइल फिर से केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास जा चुकी है। सांसद सत्यपाल सिंह को सिर्फ इतना काम कराना है कि एनओसी जारी हो जाए। इसके बाद फोर लेन बनना शुरू हो जाएगा। देखना यह है कि सांसद इसके लिए कितनी गंभीरता से प्रयास करते हैं और उनका रिजल्ट कितने दिनों में निकलता है। फिलहाल हाईवे की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है।
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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का यह प्रोजेक्ट पूर्ववर्ती मायावती सरकार के समय का है। 1780 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का पीपीपी मॉडल पर ठेका सेवकराम इंजीनियरिंग वर्क्स (एसईडब्लू) को दिया गया था। लेकिन चूक यह हुई कि हरे पेड़ काटे जाने की एनओसी से पहले पुलिया और नाले बनाने का काम शुरू हो गया। तब किसी को नहीं पता था कि हाईवे किनारे के पेड़ काटे जाने की एनओसी मिलना इतना मुश्किल होगा।
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इसके बाद यूपी में सरकार सपा की आई। अनुमति केंद्र को देनी थी जबकि औपचारिकताएं प्रदेश सरकार को पूरी करनी थी। दोनों ने ही देरी पर देरी की। पहले महीनों तक फाइल केंद्र में अटकी रही। फिर प्रारंभिक एनओसी के साथ प्रदेश को भेजी गई, तो यहां महीने लग गए।
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अब तमाम औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फाइल फिर से केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास जा चुकी है। सांसद सत्यपाल सिंह को सिर्फ इतना काम कराना है कि एनओसी जारी हो जाए। इसके बाद फोर लेन बनना शुरू हो जाएगा। देखना यह है कि सांसद इसके लिए कितनी गंभीरता से प्रयास करते हैं और उनका रिजल्ट कितने दिनों में निकलता है। फिलहाल हाईवे की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है।