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साफ बच गए सत्यपाल सिंह के हमलावर
Baghpat
Updated Mon, 14 Apr 2014 05:30 AM IST
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बागपत। दस अप्रैल को मतदान के दौरान लोयन गांव में भाजपा प्रत्याशी डाक्टर सत्यपाल सिंह पर हुए हमले के मामले में किसी भी तरह की कार्रवाई के आसार नहीं लग रहे हैं। सत्यपाल सिंह ने तहरीर देने से साफ इंकार कर दिया है जबकि पुलिस अपनी तरफ से कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है। यह दूसरा मौका है जब इस तरह की घटना पर कोई एक्शन नहीं होगा। इससे पहले सनी देओल के काफिले पर हुए पथराव के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
लेकिन इस बार मामला ज्यादा संगीन था। जिस बूथ पर यह हमला हुआ, वह संवेदनशील की श्रेणी में चिह्नित था। वहां न केवल पुलिस बल्कि पीठासीन अधिकारी भी मौजूद थे। उनकी आंखों के सामने ही सब कुछ हुआ। और तो और एक पुलिस वाले ने ही सत्यपाल सिंह को बचाया।
ऐसे मामलों में अगर तहरीर न भी आए तो पुलिस अपनी ओर से रिपोर्ट लिख सकती है लेकिन इस केस में ऐसा नहीं किया गया। मौके पर डीएम और एसपी ही नहीं, डीआईजी तक पहुंचे थे। सभी ने कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन बाद में मामला रफा दफा कर दिया गया।
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सत्यपाल सिंह का कहना था कि इस हमले में उनकी जान भी जा सकती थी लेकिन बाद में उन्होेंने तहरीर देने से ही मना कर दिया था।
नतीजा यह हुआ है कि न केवल हमलावर साफ बच गए हैं बल्कि ऐसे खुराफातियों के बीच संदेश भी गलत गया है। पुलिस ने हमलावरों को चिह्नित करना भी जरूरी नहीं समझा। सनी देओल के काफिले पर उपले और पत्थरों से हमला कर बागपत का नाम दूर-दूर तक बदनाम करने वाले खुराफाती भी खुले घूम रहे हैं। तब भी पुलिस ने तहरीर न मिलने का बहाना बनाया था।
सत्यपाल सिंह के मामले पर सीओ बड़ौत का कहना है कि तहरीर न आने के चलते रिपोर्ट नहीं लिखी गई। अगर अभी भी तहरीर आ जाती है तो पुलिस कार्रवाई को तैयार है।
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लेकिन इस बार मामला ज्यादा संगीन था। जिस बूथ पर यह हमला हुआ, वह संवेदनशील की श्रेणी में चिह्नित था। वहां न केवल पुलिस बल्कि पीठासीन अधिकारी भी मौजूद थे। उनकी आंखों के सामने ही सब कुछ हुआ। और तो और एक पुलिस वाले ने ही सत्यपाल सिंह को बचाया।
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ऐसे मामलों में अगर तहरीर न भी आए तो पुलिस अपनी ओर से रिपोर्ट लिख सकती है लेकिन इस केस में ऐसा नहीं किया गया। मौके पर डीएम और एसपी ही नहीं, डीआईजी तक पहुंचे थे। सभी ने कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन बाद में मामला रफा दफा कर दिया गया।
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सत्यपाल सिंह का कहना था कि इस हमले में उनकी जान भी जा सकती थी लेकिन बाद में उन्होेंने तहरीर देने से ही मना कर दिया था।
नतीजा यह हुआ है कि न केवल हमलावर साफ बच गए हैं बल्कि ऐसे खुराफातियों के बीच संदेश भी गलत गया है। पुलिस ने हमलावरों को चिह्नित करना भी जरूरी नहीं समझा। सनी देओल के काफिले पर उपले और पत्थरों से हमला कर बागपत का नाम दूर-दूर तक बदनाम करने वाले खुराफाती भी खुले घूम रहे हैं। तब भी पुलिस ने तहरीर न मिलने का बहाना बनाया था।
सत्यपाल सिंह के मामले पर सीओ बड़ौत का कहना है कि तहरीर न आने के चलते रिपोर्ट नहीं लिखी गई। अगर अभी भी तहरीर आ जाती है तो पुलिस कार्रवाई को तैयार है।