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दस फरवरी से शूटिंग, वुमनियां में दिखेगी गन और गन्ना
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बिनौली (बागपत)। शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशो तोमर के जीवन संघर्ष पर बन रही बॉलीवुड की फिल्म वुमनियां की शूटिंग की तैयारियां तेज हो गई है। शूटिंग दस फरवरी से शुरू होगी। लोकेशन पर सामान पहुंचना शुरू हो गया है। आर्ट डायरेक्टर और डायरेक्टर जल्द ही गांव पहुंचकर तैयारी को अंतिम रूप देंगे। फिल्म में गन और गन्ने को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
मंगलवार को मुंबई और दिल्ली से प्रोडक्शन टीम की ओर से भेजा गया सामान जौहड़ी गांव में पहुंच गया। शूटिंग के दौरान लोकेशन में प्रयोग किया जाने वाला फर्नीचर, दरवाजे, पर्दे समेत अन्य घरेलू सामान यहां लगाया गया है, जिसे शूटिंग के दौरान प्रयोग किया जाएगा। प्रोडक्शन टीम के जल्द ही गांव में पहुंच जाने की संभावना है। शूटर दादी के आवास पर सामान रखवा दिया गया है। फिल्म निशानेबाजी पर आधारित है, इससे जाहिर है कि गन दिखेगी, लेकिन फिल्म में गन्ने को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा। शूटिंग की डेट फिलहाल 10 फरवरी तय कर दी गई है। शूटिंग से पहले डायरेक्टर तुषार हीरा नंदानी अपनी टीम के साथ लोकेशन का जायजा लेने यहां आएंगे।
फिल्म में दिखेगा 70 के दशक का जौहड़ी
बागपत। वमुनियां फिल्म में साल 1970 से लेकर वर्तमान तक के कई महत्वपूर्ण दृश्य होंगे। लोकेशन को साल 1970 से 1980 तक के हिसाब से ढालने की तैयारी चल रही है। पुराना सामान मंगाया गया है।
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पश्चिम यूपी के शब्दों से लबरेज होगी फिल्म
बागपत। पश्चिम उत्तर प्रदेश में बोलचाल की भाषा को ही फिल्म में रखा गया है। इसके लिए कथानक से लेकर स्क्रिप्ट तैयार की गई है। एक्सपर्ट टीम यहां दिनचर्या में शामिल शब्दों को डायलॉग में ढालकर दर्शकों तक ले जाएंगे।
लोकेशन पर मौजूद रहेंगे रियल किरदार
बागपत। फिल्म की शूटिंग के दौरान रियल किरदार भी मौजूद रहेंगे। फिल्म में गांव के हिस्से की शूटिंग जौहड़ी गांव में होगी, जबकि बाकी के हिस्से की शूटिंग मुंबई में होगी। इस दौरान शूटर दादी चंद्रो तोमर, प्रकाशो तोमर, चौधरी अटल सिंह ठेकेदार, निशानेबाज सीमा तोमर, शैफाली चौधरी मौजूद रहेंगी।
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मंगलवार को मुंबई और दिल्ली से प्रोडक्शन टीम की ओर से भेजा गया सामान जौहड़ी गांव में पहुंच गया। शूटिंग के दौरान लोकेशन में प्रयोग किया जाने वाला फर्नीचर, दरवाजे, पर्दे समेत अन्य घरेलू सामान यहां लगाया गया है, जिसे शूटिंग के दौरान प्रयोग किया जाएगा। प्रोडक्शन टीम के जल्द ही गांव में पहुंच जाने की संभावना है। शूटर दादी के आवास पर सामान रखवा दिया गया है। फिल्म निशानेबाजी पर आधारित है, इससे जाहिर है कि गन दिखेगी, लेकिन फिल्म में गन्ने को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा। शूटिंग की डेट फिलहाल 10 फरवरी तय कर दी गई है। शूटिंग से पहले डायरेक्टर तुषार हीरा नंदानी अपनी टीम के साथ लोकेशन का जायजा लेने यहां आएंगे।
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फिल्म में दिखेगा 70 के दशक का जौहड़ी
बागपत। वमुनियां फिल्म में साल 1970 से लेकर वर्तमान तक के कई महत्वपूर्ण दृश्य होंगे। लोकेशन को साल 1970 से 1980 तक के हिसाब से ढालने की तैयारी चल रही है। पुराना सामान मंगाया गया है।
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पश्चिम यूपी के शब्दों से लबरेज होगी फिल्म
बागपत। पश्चिम उत्तर प्रदेश में बोलचाल की भाषा को ही फिल्म में रखा गया है। इसके लिए कथानक से लेकर स्क्रिप्ट तैयार की गई है। एक्सपर्ट टीम यहां दिनचर्या में शामिल शब्दों को डायलॉग में ढालकर दर्शकों तक ले जाएंगे।
लोकेशन पर मौजूद रहेंगे रियल किरदार
बागपत। फिल्म की शूटिंग के दौरान रियल किरदार भी मौजूद रहेंगे। फिल्म में गांव के हिस्से की शूटिंग जौहड़ी गांव में होगी, जबकि बाकी के हिस्से की शूटिंग मुंबई में होगी। इस दौरान शूटर दादी चंद्रो तोमर, प्रकाशो तोमर, चौधरी अटल सिंह ठेकेदार, निशानेबाज सीमा तोमर, शैफाली चौधरी मौजूद रहेंगी।