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मलकपुर चीनी मिल के गन्ना उत्पादकों में भारी आक्रोश
Updated Thu, 06 Dec 2018 01:49 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
मलकपुर चीनी मिल से जुड़े किसानों ने कहा मलकपुर मिल के संबंध में केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह का बयान क्षेत्रीय किसानों के लिए कुठाराघात है। इससे किसानों में केंद्रीय मंत्री के खिलाफ आक्रोष है।
किसान मजदूर उत्थान समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र उर्फ मुनेश बरवाला, नरेश ठेकेदार, महीपाल प्रधान, जगमेहर, बिजेंद्र डायरेक्टर, कंवर पाल सिंह आदि ने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सतपाल सिंह ने मलकपुर मिल संबंधित जो बयान दिया है, वह किसान हित में नहीं है। केंद्रीय मंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपने निजी एजेंडे की पूर्ति मेें लगे हैं। उन्हें किसानों की पीड़ा से कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि इस प्रकार के बयान से बैंकों द्वारा लगभग अंतिम चरण में सॉफ्ट लोन की स्वीकृति के लिए प्रक्रिया चल रही हैं। ऐसे में उन्हें ये बयान नहीं देना चाहिए था। यह बैंकों को भ्रमित करने से ऐसा प्रतीत होता है। उप्र सरकार द्वारा सॉफ्ट लोन की घोषणा के विरुद्ध षड्यंत्र कर मुख्यमंत्री एवं गन्ना मंत्री को असफल करने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में दो सरकारें चल रही हैं। क्षेत्र के किसानों ने यह बात भलीभांति समझी जा रही है कि केंद्रीय राज्यमंत्री द्वारा किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। क्षेत्र में किसानों ने चीनी मिल में जाकर लोन के बारे में पता किया तो लोन कब तक मिल जाएगा तो अधिकारियों द्वारा बताया कि मलकपुर मिल के 451 करोड़ रुपये के संपत्ति के कागजात जमा किए हैं। जब चीनी मिल ने संपत्ति के कागज जमा कर दिए तो लोन क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपना गन्ना मूल्य भुगतान लेकर रहेंगे एवं आने वाले चुनाव में इसकी कीमत सरकार को चुकानी पड़ेगी।
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मलकपुर चीनी मिल से जुड़े किसानों ने कहा मलकपुर मिल के संबंध में केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह का बयान क्षेत्रीय किसानों के लिए कुठाराघात है। इससे किसानों में केंद्रीय मंत्री के खिलाफ आक्रोष है।
किसान मजदूर उत्थान समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र उर्फ मुनेश बरवाला, नरेश ठेकेदार, महीपाल प्रधान, जगमेहर, बिजेंद्र डायरेक्टर, कंवर पाल सिंह आदि ने कहा कि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. सतपाल सिंह ने मलकपुर मिल संबंधित जो बयान दिया है, वह किसान हित में नहीं है। केंद्रीय मंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपने निजी एजेंडे की पूर्ति मेें लगे हैं। उन्हें किसानों की पीड़ा से कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि इस प्रकार के बयान से बैंकों द्वारा लगभग अंतिम चरण में सॉफ्ट लोन की स्वीकृति के लिए प्रक्रिया चल रही हैं। ऐसे में उन्हें ये बयान नहीं देना चाहिए था। यह बैंकों को भ्रमित करने से ऐसा प्रतीत होता है। उप्र सरकार द्वारा सॉफ्ट लोन की घोषणा के विरुद्ध षड्यंत्र कर मुख्यमंत्री एवं गन्ना मंत्री को असफल करने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में दो सरकारें चल रही हैं। क्षेत्र के किसानों ने यह बात भलीभांति समझी जा रही है कि केंद्रीय राज्यमंत्री द्वारा किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। क्षेत्र में किसानों ने चीनी मिल में जाकर लोन के बारे में पता किया तो लोन कब तक मिल जाएगा तो अधिकारियों द्वारा बताया कि मलकपुर मिल के 451 करोड़ रुपये के संपत्ति के कागजात जमा किए हैं। जब चीनी मिल ने संपत्ति के कागज जमा कर दिए तो लोन क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपना गन्ना मूल्य भुगतान लेकर रहेंगे एवं आने वाले चुनाव में इसकी कीमत सरकार को चुकानी पड़ेगी।
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