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निष्पक्ष कराई जाए निरपुड़ा की चकबंदी
Updated Wed, 17 Jan 2018 01:05 AM IST
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दोघट (बागपत)। निरपुड़ा गांव में 36 साल से चल रही चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसको लेकर मंगलवार को चकबंदी अधिकारी गांव पहुंचे और किसानों से चकबंदी के संबंध में वार्ता की।
मंगलवार को एसीओ चकबंदी, सहायक चकबंदी अधिकारी और चकबंदी लेखपाल निरपुड़ा गांव में पहुंचे और उन्होंने किसानों से चकबंदी के संबंध में बातचीत की। पूर्व ग्राम प्रधान कृष्णपाल राणा ने कहा कि गांव में 1982 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई है। किसान चकबंदी के हक में है, लेकिन वे बामनौली, रंछाड़ और बामनौली की तरह की चकबंदी नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा चकबंदी अभिलेखों को दुरुस्त किया जाए। गांव के बीच में बैठकर चकबंदी प्रक्रिया कराई जाए और चक काटे जाए। नए सिरे से चकों की कीमत लगाकर चकबंदी कराई जाए। कागजों के हिसाब से सेक्टर बनाए जाए। निष्पक्ष चकबंदी कराई जाए। उन्होंने कहा कि जिस गांव के किसान चकबंदी तो चाहते हैं, लेकिन चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार के कारण ठीक तरीके से चकबंदी नहीं करा पाते हैं। इससे किसानों को नुकसान होता है। यदि चकबंदी विभाग के अधिकारी किसानों के तरीके से चकबंदी कराने के लिए सहमत हो तो गांव में चकबंदी कार्रवाई शुरू की जाए अन्यथा हम गांव में चकबंदी नहीं होने देंगे। इसमें हरबीर, मास्टर महावीर, प्रताप, जयपाल, मास्टर हरबीर, धीरज सिंह, मांगेराम, रामपाल, भीम, जसवंत, नहार सिंह दरोगा आदि रहे।
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मंगलवार को एसीओ चकबंदी, सहायक चकबंदी अधिकारी और चकबंदी लेखपाल निरपुड़ा गांव में पहुंचे और उन्होंने किसानों से चकबंदी के संबंध में बातचीत की। पूर्व ग्राम प्रधान कृष्णपाल राणा ने कहा कि गांव में 1982 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई है। किसान चकबंदी के हक में है, लेकिन वे बामनौली, रंछाड़ और बामनौली की तरह की चकबंदी नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा चकबंदी अभिलेखों को दुरुस्त किया जाए। गांव के बीच में बैठकर चकबंदी प्रक्रिया कराई जाए और चक काटे जाए। नए सिरे से चकों की कीमत लगाकर चकबंदी कराई जाए। कागजों के हिसाब से सेक्टर बनाए जाए। निष्पक्ष चकबंदी कराई जाए। उन्होंने कहा कि जिस गांव के किसान चकबंदी तो चाहते हैं, लेकिन चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार के कारण ठीक तरीके से चकबंदी नहीं करा पाते हैं। इससे किसानों को नुकसान होता है। यदि चकबंदी विभाग के अधिकारी किसानों के तरीके से चकबंदी कराने के लिए सहमत हो तो गांव में चकबंदी कार्रवाई शुरू की जाए अन्यथा हम गांव में चकबंदी नहीं होने देंगे। इसमें हरबीर, मास्टर महावीर, प्रताप, जयपाल, मास्टर हरबीर, धीरज सिंह, मांगेराम, रामपाल, भीम, जसवंत, नहार सिंह दरोगा आदि रहे।
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