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पिलाना के गन्ने वाले खेतों में देखिए एलोवेरा
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बागपत। गेहूं और गन्ने की खेती के फसल चक्र से बाहर निकलकर जिले के कई किसान फल, फूल और औषधीय पौधों की खेती करने के लिए आगे आ रहे हैं। पिलाना गांव में एलोवेरा की फसल लहलहा रही है। अनूठे प्रयोग से अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलेगी।
पिलाना गांव के किसान सुनील कुमार त्यागी के खेतों में एलोवेरा की फसल लहलहा रही है। उन्होंनेगन्ने की परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने कुछ नया करने की ठानी थी। कृषि वैज्ञानिकों और परिवार के लोगों से मशविरा कर एलोवेरा की फसल उगाने का फैसला किया। एक या दो नहीं बल्कि किसान ने पिलाना में 22 बीघा जमीन पर औषधीय पौधे की खेती की है। फसल लहलहा रही है और किसान को उम्मीद है कि उसे नुकसान नहीं होगा। फसल बेचने के लिए देहरादून, दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में बाजार खुला है। औषधीय पौधा होने के चलते पूरी मांग है।
राजस्थान का एलोवेरा पहुंचा पिलाना
बागपत। किसान सुनील कुमार बताते हैं कि राजस्थान के जयपुर से वह एलोवेरा की पौध लेकर गांव आए थे। यूं तो पौधे की कीमत ढाई से तीन रुपये ही है, लेकिन जैविक खाद, ढुलाई और अन्य खर्च जोड़कर देखें तो करीब दस रुपये में एक पौधा उनके खेत तक पहुंचा है।
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भाव मिला तो किसान की होगी चांदी
बागपत। किसान का कहना है कि अगर बाजार में उन्हें दस रुपये प्रति किलो का भाव मिल गया तो उन्हें निश्चित तौर पर मुनाफा होगा। इससे कम भाव में नुकसान हो सकता है। पत्ती कटने के करीब 48 घंटे में ही प्रयोग कर ली जानी चाहिए।
एक हजार रुपये तक की आमदनी
बागपत। एलोवेरा का कई जगह प्रयोग किया जाता है। एक पौधे से किसान को एक हजार रुपये तक की आय हो सकती है। किसान सुनील का कहना है कि एक ही फसल को दो या तीन साल तक रखा जा सकता है। अच्छी फसल मुनाफा देती है और इस पर कुछ अतिरिक्त खर्च नहीं करना होता।
जानकारी लेने पहुंच रहे किसान
बागपत। किसान का कहना है कि उनके यहां से एलोवेरा की जानकारी लेने के लिए बागपत के ही किसान आए दिन पहुंचते हैं।
जानिए एलोवेरा को
बागपत। एलोवेरा औषधीय पौधा है। स्किन और पेट के लिए इसे वरदान माना जाता है। इसका जूस भी पिया जाता है। बालों के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल किया जाता है। एलोवेरा का जूस खाली पेट पीने से सिर दर्द में आराम हो जाता है। एलोवेरा शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है।
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पिलाना गांव के किसान सुनील कुमार त्यागी के खेतों में एलोवेरा की फसल लहलहा रही है। उन्होंनेगन्ने की परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने कुछ नया करने की ठानी थी। कृषि वैज्ञानिकों और परिवार के लोगों से मशविरा कर एलोवेरा की फसल उगाने का फैसला किया। एक या दो नहीं बल्कि किसान ने पिलाना में 22 बीघा जमीन पर औषधीय पौधे की खेती की है। फसल लहलहा रही है और किसान को उम्मीद है कि उसे नुकसान नहीं होगा। फसल बेचने के लिए देहरादून, दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में बाजार खुला है। औषधीय पौधा होने के चलते पूरी मांग है।
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राजस्थान का एलोवेरा पहुंचा पिलाना
बागपत। किसान सुनील कुमार बताते हैं कि राजस्थान के जयपुर से वह एलोवेरा की पौध लेकर गांव आए थे। यूं तो पौधे की कीमत ढाई से तीन रुपये ही है, लेकिन जैविक खाद, ढुलाई और अन्य खर्च जोड़कर देखें तो करीब दस रुपये में एक पौधा उनके खेत तक पहुंचा है।
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भाव मिला तो किसान की होगी चांदी
बागपत। किसान का कहना है कि अगर बाजार में उन्हें दस रुपये प्रति किलो का भाव मिल गया तो उन्हें निश्चित तौर पर मुनाफा होगा। इससे कम भाव में नुकसान हो सकता है। पत्ती कटने के करीब 48 घंटे में ही प्रयोग कर ली जानी चाहिए।
एक हजार रुपये तक की आमदनी
बागपत। एलोवेरा का कई जगह प्रयोग किया जाता है। एक पौधे से किसान को एक हजार रुपये तक की आय हो सकती है। किसान सुनील का कहना है कि एक ही फसल को दो या तीन साल तक रखा जा सकता है। अच्छी फसल मुनाफा देती है और इस पर कुछ अतिरिक्त खर्च नहीं करना होता।
जानकारी लेने पहुंच रहे किसान
बागपत। किसान का कहना है कि उनके यहां से एलोवेरा की जानकारी लेने के लिए बागपत के ही किसान आए दिन पहुंचते हैं।
जानिए एलोवेरा को
बागपत। एलोवेरा औषधीय पौधा है। स्किन और पेट के लिए इसे वरदान माना जाता है। इसका जूस भी पिया जाता है। बालों के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल किया जाता है। एलोवेरा का जूस खाली पेट पीने से सिर दर्द में आराम हो जाता है। एलोवेरा शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है।