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37 साल तक चली चकबंदी से टूट गए किसान
Updated Sun, 03 Jun 2018 01:24 AM IST
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दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में चकबंदी प्रक्रिया 37 साल से चल रही है। आरोप लगते हैं। कई बार विवादों के बवंडर उठ चुके हैं। पिछले वर्ष चकबंदी की टीम पहुंची तो किसान धरने पर बैठ गए। नौ दिन तक धरना चला। इसके बाद किसानों को किसी तरह मनाकर चकबंदी कराई। पिछले वर्ष एक किसान ने जहर खाकर जान भी दे दी।
पूर्व प्रधान महिपाल सिंह ने बताया कि बामनौली गांव में 1981 से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन प्रक्रिया ने किसानों को बर्बाद करके रख दिया है। आरोप है कि किसानों के गलत तरीके से चक बनाए। इसे लेकर किसान कोर्ट चले गए। इसके बाद फिर 1989 में चक काटे, वह भी गलत तरीके से काटे। इसके बाद 1991 में चक काटे और धारा 20 लगा दी। उस समय न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस की टीम ने जांच की तो खामियां पाई । किसान राजेंद्र सिंह, राजबीर सिंह, ज्ञानेंद्र, सतपाल सिंह, महेंद्र सिंह और जयपाल सिंह का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने चकबंदी में व्याप्त खामियों को दूर किए बिना ही फिर से चक काट दिए, इसके विरुद्ध फिर से किसान कोर्ट चले गए। किसानों ने कहा वर्र्ष 2016 में चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज न्यायालय में पेश कर चकबंदी कराने के आदेश जारी करा लिए और कोर्ट के आदेश पर चकबंदी कराई। चकबंदी में इतनी खामियां थी कि किसानों ने इसका पुरजोर विरोध भी किया, लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोर्ट के आदेश पर यहां चकबंदी करा दी, लेकिन खामियां दूर नहीं की गई। चकबंदी अधिकारी आनन-फानन में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर चले गए। आधे किसानों को चकों पर कब्जे दिलाए और आधों को नहीं।
दस माह पहले पूरी हो गई थी प्रक्रिया
दोघट। चकबंदी प्रक्रिया पिछले वर्ष अगस्त 2017 में पूरी की। इसके बावजूद कई बार विवाद उठे। आरोप लगाया गया कि हवाई चक काटे हैं। इसके अलावा कई किसानों को अब तक कब्जे नहीं मिले। यही नहीं ऐसे भी मामले सामने आए कि किसानों ने फसलें काटकर जमीन अब तक खाली नहीं की। कई बार गांव में टकराव के हालात भी बने हैं। कलक्ट्रेट में किसान आए दिन अपनी मांग रखने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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रंगे हाथ पकड़ा था लेखपाल, कई पर गाज
दोघट। बामनौली गांव में पिछले दिनों ही लेखपाल को विजिलेंस की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया था। इसके अलावा शासन स्तर से कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन सिस्टम सुधरता नहीं दिख रहा है।
चार गांव में चल रही चकबंदी
दोघट। चकबंदी प्रक्रिया बामनौली के अलावा निरपुड़ा, रंछाड़, बरनावा में भी चल रही है। हैं। किसानों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया गलत है, जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बना दी जानी चाहिए, तभी किसानों को इंसाफ मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
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पूर्व प्रधान महिपाल सिंह ने बताया कि बामनौली गांव में 1981 से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन प्रक्रिया ने किसानों को बर्बाद करके रख दिया है। आरोप है कि किसानों के गलत तरीके से चक बनाए। इसे लेकर किसान कोर्ट चले गए। इसके बाद फिर 1989 में चक काटे, वह भी गलत तरीके से काटे। इसके बाद 1991 में चक काटे और धारा 20 लगा दी। उस समय न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस की टीम ने जांच की तो खामियां पाई । किसान राजेंद्र सिंह, राजबीर सिंह, ज्ञानेंद्र, सतपाल सिंह, महेंद्र सिंह और जयपाल सिंह का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने चकबंदी में व्याप्त खामियों को दूर किए बिना ही फिर से चक काट दिए, इसके विरुद्ध फिर से किसान कोर्ट चले गए। किसानों ने कहा वर्र्ष 2016 में चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज न्यायालय में पेश कर चकबंदी कराने के आदेश जारी करा लिए और कोर्ट के आदेश पर चकबंदी कराई। चकबंदी में इतनी खामियां थी कि किसानों ने इसका पुरजोर विरोध भी किया, लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोर्ट के आदेश पर यहां चकबंदी करा दी, लेकिन खामियां दूर नहीं की गई। चकबंदी अधिकारी आनन-फानन में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर चले गए। आधे किसानों को चकों पर कब्जे दिलाए और आधों को नहीं।
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दस माह पहले पूरी हो गई थी प्रक्रिया
दोघट। चकबंदी प्रक्रिया पिछले वर्ष अगस्त 2017 में पूरी की। इसके बावजूद कई बार विवाद उठे। आरोप लगाया गया कि हवाई चक काटे हैं। इसके अलावा कई किसानों को अब तक कब्जे नहीं मिले। यही नहीं ऐसे भी मामले सामने आए कि किसानों ने फसलें काटकर जमीन अब तक खाली नहीं की। कई बार गांव में टकराव के हालात भी बने हैं। कलक्ट्रेट में किसान आए दिन अपनी मांग रखने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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रंगे हाथ पकड़ा था लेखपाल, कई पर गाज
दोघट। बामनौली गांव में पिछले दिनों ही लेखपाल को विजिलेंस की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया था। इसके अलावा शासन स्तर से कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन सिस्टम सुधरता नहीं दिख रहा है।
चार गांव में चल रही चकबंदी
दोघट। चकबंदी प्रक्रिया बामनौली के अलावा निरपुड़ा, रंछाड़, बरनावा में भी चल रही है। हैं। किसानों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया गलत है, जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बना दी जानी चाहिए, तभी किसानों को इंसाफ मिलने की उम्मीद की जा सकती है।