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आंगनबाडिय़ां बोली, हक मिलने तक करेंगी संघर्ष
Updated Sat, 28 Oct 2017 01:19 AM IST
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आंगनबाड़ियां बोलीं, हक मिलने तक संघर्ष करेंगी
बागपत। राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन कर सूबे की सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। मुख्यमंत्री के नाम डीएम भवानी सिंह खंगारौत को ज्ञापन सौंपा। एलान किया कि 30 अक्तूबर को काले कपड़े पहनकर विरोध करेंगी।
शुक्रवार को आंगनबाड़ी वर्कस कलेक्ट्रेट में एकत्र र्हुइं। सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान जो वायदे किए थे, योगी सरकार उन्हें भूल गई है। मांगों पर कोई ध्यान नहीं है। मजबूर होकर सरकार के विरोध में उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। जिलाध्यक्ष सुषमा गुर्जर ने कहा कि प्रशासन की ओर से फर्जी तरीके से बच्चों का वजन कराया जा रहा है। फर्जी आंकड़ें दर्शाकर भ्रमित कर रहे हैं। प्राइवेट स्तर पर युवकों को लगाया हुआ है, जिन्हें पांच सौ रुपये दिए जा रहे है। सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी। उनकी प्रमुख मांग आंगनबाड़ियों का मानदेय 15 हजार और सहायिकाओं को साढ़े नौ हजार, राज्य कर्मचारी घोषित, मनमाने ढंग से वेतन रोके न जाना, रिक्त पदों पर वरिष्ठता एवं योग्यता के आधार पर पदोन्नति, वार्षिक वृद्धि, चिकित्सा इलाज के दौरान पूरा मानदेय, वर्षभर में 15 दिन का चिकित्सा अवकाश की मांग पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। डीएम भवानी सिंह खंगारौत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बीच पहुंचे और भरोसा दिलाया कि वह उनकी मांग शासन तक पहुंचाएंगे।
उधर, जिलाध्यक्ष ने बताया कि 30 अक्तूबर को काले कपडे़ पहनकर कलक्ट्रेट में बड़ा धरना-प्रदर्शन होगा। विकास भवन तक जुलूस निकाला जाएगा। जिला उपाध्यक्ष सुषमा शर्मा, दर्शना, मुनेश, पिंकी, रश्मि, इंद्रेश, बबीता, मंजू, रेखा, अन्नू, रामबती, गीता, अलका देवी, मनीषा, राकेश, शर्मिष्ठा दांगी, ऊमा देवी, पवित्रा देवी मौजूद रहीं। प्रदर्शन के दौरान यहां पुलिसबल तैनात रहा।
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निकाय चुनाव का बहिष्कार, आत्मदाह की चेतावनी
जिलाध्यक्ष सुषमा गुर्जर ने कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो निकाय चुनाव का बहिष्कार करेंगे। बीएलओ का भी कार्य नहीं करेंगे। चुनाव में परिवार को भी वोट नहीं करने दिया जाएगा। अपनी मांगों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं का नारा दिया जा रहा है, लेकिन महिलाओं के ही हकों का दमन किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आत्मदाह भी कर लेंगी।
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बागपत। राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन कर सूबे की सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। मुख्यमंत्री के नाम डीएम भवानी सिंह खंगारौत को ज्ञापन सौंपा। एलान किया कि 30 अक्तूबर को काले कपड़े पहनकर विरोध करेंगी।
शुक्रवार को आंगनबाड़ी वर्कस कलेक्ट्रेट में एकत्र र्हुइं। सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान जो वायदे किए थे, योगी सरकार उन्हें भूल गई है। मांगों पर कोई ध्यान नहीं है। मजबूर होकर सरकार के विरोध में उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। जिलाध्यक्ष सुषमा गुर्जर ने कहा कि प्रशासन की ओर से फर्जी तरीके से बच्चों का वजन कराया जा रहा है। फर्जी आंकड़ें दर्शाकर भ्रमित कर रहे हैं। प्राइवेट स्तर पर युवकों को लगाया हुआ है, जिन्हें पांच सौ रुपये दिए जा रहे है। सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी। उनकी प्रमुख मांग आंगनबाड़ियों का मानदेय 15 हजार और सहायिकाओं को साढ़े नौ हजार, राज्य कर्मचारी घोषित, मनमाने ढंग से वेतन रोके न जाना, रिक्त पदों पर वरिष्ठता एवं योग्यता के आधार पर पदोन्नति, वार्षिक वृद्धि, चिकित्सा इलाज के दौरान पूरा मानदेय, वर्षभर में 15 दिन का चिकित्सा अवकाश की मांग पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। डीएम भवानी सिंह खंगारौत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के बीच पहुंचे और भरोसा दिलाया कि वह उनकी मांग शासन तक पहुंचाएंगे।
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उधर, जिलाध्यक्ष ने बताया कि 30 अक्तूबर को काले कपडे़ पहनकर कलक्ट्रेट में बड़ा धरना-प्रदर्शन होगा। विकास भवन तक जुलूस निकाला जाएगा। जिला उपाध्यक्ष सुषमा शर्मा, दर्शना, मुनेश, पिंकी, रश्मि, इंद्रेश, बबीता, मंजू, रेखा, अन्नू, रामबती, गीता, अलका देवी, मनीषा, राकेश, शर्मिष्ठा दांगी, ऊमा देवी, पवित्रा देवी मौजूद रहीं। प्रदर्शन के दौरान यहां पुलिसबल तैनात रहा।
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निकाय चुनाव का बहिष्कार, आत्मदाह की चेतावनी
जिलाध्यक्ष सुषमा गुर्जर ने कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो निकाय चुनाव का बहिष्कार करेंगे। बीएलओ का भी कार्य नहीं करेंगे। चुनाव में परिवार को भी वोट नहीं करने दिया जाएगा। अपनी मांगों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं का नारा दिया जा रहा है, लेकिन महिलाओं के ही हकों का दमन किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आत्मदाह भी कर लेंगी।